11-फरवरी-2013 17:48 IST
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज राष्ट्रपति भवन में किया सम्मेलन का उद्धाटन
एकता/अखंडता को कमजोर करने की कोशिशों को नाकाम करते रहें
सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी करें
सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह आयोजन दिल्ली में एक लड़की के साथ निर्मम बलात्कार और उसकी मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के साये में हो रहा है जिसने राष्ट्र के सामूहिक अन्त:करण को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्मा समिति की सिफारिशों पर तत्काल कार्रवाई की और आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2013 संसद के बजट सत्र में रखे जाने के लिए तैयार है। उन्होंने राज्यपालों से आग्रह किया कि वे महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण में सुधार की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि समाज में लोगों की सोच बदलने की जरूरत है, ताकि महिलाओं के साथ सम्मानजनक तरीके से व्यवहार किया जाए।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में 2012 में सुधार हुआ, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें देश की एकता और अखण्डता को कमजोर करने वाली राष्ट्र विरोधी ताकतों की किसी भी साजिश को विफल करने के अपने प्रयासों में अटल रहना होगा। आतंकवाद से निपटने की हमारी प्रतिबद्धता मजबूत रहनी चाहिए। उन्होंने सीमावर्ती राज्यों को सलाह दी कि वे अतिरिक्त सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विकास से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों में तेजी लाने की जरूरत है, ताकि बढ़ती चुनौतियों से मुकाबला किया जा सके। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था को तत्काल मजबूत बनाने की जरूरत है।
सरकार ने पंजाब और हरियाणा में फसलों की विविधता की तैयारी करते हुए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्वी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए एक रणनीति तैयार की है। असम, बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाने के लिए 2010-11 में एक कृषि विकास कार्यक्रम को लागू करने का फैसला किया गया। 2010-11 और 2011-12 के दौरान कार्यक्रम के लिए 400 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई, जिसे 2012-13 के दौरान बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये कर दिया गया। पूर्वी भारत में दूसरी हरित क्रांति पर लगातार ध्यान केन्द्रित करने और केन्द्र और राज्यों की सभी सम्बद्ध एजेंसियों द्वारा प्रयास करने की जरूरत है। राष्ट्रपति ने कहा कि पहली हरित क्रांति और उसके पर्यावरण पर प्रभाव से सबक लेकर हमें दूसरी हरित क्रांति करनी चाहिए, जिसमें मिट्टी और जल प्रबंधन के मुद्दों पर शुरू से ही विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि खरीद नीति क्षेत्र के किसानों के हित में होनी चाहिए और क्षेत्र में पर्याप्त भण्डारण सुविधाएं बनाई जानी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगातार जारी प्रयासों के काफी उत्साहवर्धक परिणाम रहे। देश में चावल के कुल उत्पादन में पूर्वी क्षेत्र के हिस्से में काफी बढ़ोत्तरी हुई। 2011-12 के दौरान देश में चावल का कुल 104.32 मिलियन टन उत्पादन हुआ, जिसमें से पूर्वी क्षेत्र के उत्पादन का 55.34 मिलियन टन रिकॉर्ड योगदान रहा। राष्ट्रपति ने कहा कि जल क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार ने राष्ट्रीय जल नीति (2012) घोषित की और इसके कार्यान्वयन से जल क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों से निपटा जा सकेगा। भारत की आबादी विश्व की कुल आबादी का 18 प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन केवल चार प्रतिशत के पास उपयोग करने योग्य ताजा जल संसाधन हैं। भारत में पानी की कमी है और पानी की प्रति व्यक्ति उपलब्धता कम हो गई है। हमारी जल्दी ही पानी की कमी वाले देशों में गिनती होने लगेगी। एक अनुमान के अनुसार 2050 में 17 प्रतिशत आबादी के पास पानी की कमी होगी। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि पानी और स्वच्छता जीवन की मूलभूत जरूरतें हैं और इन्हें संतोषजनक तरीके से प्रदान करना सुशासन का संकेत है। भूमिगत जल के प्रबंध को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम लागू कर रहा है ताकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल प्रदान करने के राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रयासों को सहायता मिल सके। इसके लिए 2012-13 के बजट में 10,500 करोड़ रुपये का खर्च रखा गया। इस कार्यक्रम पर सावधानीपूर्वक नजर रखने की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच सीधा संबंध है। सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल, खुले में शौच, स्वच्छ भोजन के अभाव से उच्च शिशु मृत्यु दर और अनेक बीमारियों को जन्म देती है। उन्होंने कहा कि हमें ग्रामीण और शहरी भारत में उपलब्ध जल संसाधनों का इस्तेमाल तरीके से करना चाहिए, बेकार पानी को फिर से इस्तेमाल योग्य बनाना चाहिए और पानी को बर्बाद होने से बचाना चाहिए, भूमिगत जल को रिचार्ज करने और स्वच्छता की सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। राष्ट्रपति ने सभी राज्यपालों से आग्रह किया कि वे निर्मल भारत अभियान पर विशेष ध्यान दें, जिसे सरकार ने पीने के पानी की सुविधा देने के साथ सभी ग्राम पंचायतों को निर्मल बनाने के लिए शुरू किया है, ताकि गांव वालों को बेहतर स्वास्थ्य और अच्छा जीवन मिल सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि 2005 से लागू जेएनएनयूआरएम शहरी बुनियादी सुविधाएं सृजित करने के लिए एक प्रमुख निवेश कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि शहर और शहरी इलाके जीडीपी का 60 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देते हैं और देश में रोजगार सृजन का 80 प्रतिशत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और हम इन्हें उचित शिक्षा और हुनर देकर बेहतर भविष्य की आशा कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि चूंकि राज्य विश्वविद्यालयों के पास वित्तीय संसाधनों की कमी है, 12वीं योजना में एक नए कार्यक्रम राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए केन्द्रीय धनराशि को स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की स्थापना जनवरी 2013 में की गई। उन्होंने राज्यपालों से कहा कि वे राज्य वित्त आयोगों के गठन पर ध्यान दें, जिसमें पर्याप्त कर्मचारी हों, राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट समय पर राज्यपाल को मिले और उस रिपोर्ट पर सरकार समय पर कार्रवाई करे।
इस दो दिवसीय सम्मेलन की कार्यसूची में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने, पूर्वी क्षेत्र में दूसरी हरित क्रांति के विस्तार, जल प्रबंध और स्वच्छता, जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और सुशासन के संदर्भ में राज्यपालों की भूमिका शामिल है।
सम्मेलन में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, नौ केन्द्रीय मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और युआईडीएआई के अध्यक्ष भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन को सुबह मंत्री और दोपहर में प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति सम्बोधित करेंगे। (PIB)
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राष्ट्रपति ने किया राज्यपालों के 44वें सम्मेलन का उद्धाटन वि.कसोटिया/कविता/राजेश-524
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सोमवार, फ़रवरी 11, 2013
गुरुवार, फ़रवरी 07, 2013
21 फरवरी से संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत
07-फरवरी-2013 12:37 IST
पंद्रहवीं लोकसभा के तेरहवें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत और अवधि
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है।
पंद्रहवीं लोक सभा के 13वें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और सरकारी कामकाज की अनिवार्यताओं के अध्याधीन 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है।
राष्ट्रपति 21 फरवरी 2013, गुरुवार को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रुप से नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सुबह 11 बजे संबोधित करेंगे।
मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों पर स्थायी समिति द्वारा विचार और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 मार्च 2013 को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा और 22 अप्रैल 2013 को सदन का सत्र पुनः आरंभ होगा। (PIB)
वि.कासोटिया/सुधीर पी. /विजयलक्ष्मी – 469
संसद के बजट सत्र
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत
संसद:बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी से
21 फरवरी से संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत
पंद्रहवीं लोकसभा के तेरहवें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत और अवधि
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| Courtesy Photo |
पंद्रहवीं लोक सभा के 13वें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और सरकारी कामकाज की अनिवार्यताओं के अध्याधीन 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है।
राष्ट्रपति 21 फरवरी 2013, गुरुवार को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रुप से नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सुबह 11 बजे संबोधित करेंगे।
मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों पर स्थायी समिति द्वारा विचार और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 मार्च 2013 को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा और 22 अप्रैल 2013 को सदन का सत्र पुनः आरंभ होगा। (PIB)
वि.कासोटिया/सुधीर पी. /विजयलक्ष्मी – 469
संसद के बजट सत्र
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत
संसद:बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी से
21 फरवरी से संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत
भारतीय चित्रकार पर धार्मिक भावनाओं को ठेस का आरोप
6.02.2013, 21:24
यदि ये चित्र प्रदर्शनी में लगे रहते तो समस्या पैदा हो सकती
बंगलुरु पुलिस की मांग पर चित्रकला परिषद में हो रही प्रदर्शनी में से 5 फरवरी 2013 को 22 वर्षीय चित्रकार अनिरुद्ध साईनाथ कृष्णामणि की तीन तस्वीरें हटा दी गईं| इनमें एक में विष्णु मोहिनी अवतार के रूप में चित्रित हैं, एक काली देवी का चित्र है और एक शिव-पार्वती का रोमांसी मुद्रा में चित्र है| क्रुद्ध भीड़ ने चित्रकार पर देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप लगाया है| पुलिस का कहना है कि यदि ये चित्र प्रदर्शनी में लगे रहते तो इससे कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में समस्या पैदा हो सकती थी| गैलरी के प्रबंधकों का भी कहना है कि उन्हें क्रुद्ध लोगों के फोन आए, जिन्होंने कहा कि इन चित्रों से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है| अतः गैलरी ने चित्रकार से यह मांग करना ही उचित समझा कि वह चित्र हटा ले| (रेडियो रूस से साभार )
यदि ये चित्र प्रदर्शनी में लगे रहते तो समस्या पैदा हो सकती
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| Collage: the Voice of Russia |
‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस एंड जर्मनी’
06-फरवरी-2013 18:11 IST
पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की
‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस एंड जर्मनी’ नामक पुस्तक की पहली प्रति आज यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. अनिता बी. पाफ की ओर से राष्ट्र्पति श्री प्रणब मुखर्जी को भेंट की गई। इस पुस्तक को फेडरेशन ऑफ इंडो-जर्मन सोयाटिज इन इंडिया की ओर से तैयार किया गया है। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि इस पुस्तक को देखकर वे काफी प्रसन्न हुए, क्योंकि यह प्रो. अनिता बी. पाफ द्वारा खुद तथा अन्य जानेमाने लेखकों और जीवनी लेखकों द्वारा एक असाधारण संग्रह है।
श्री मुखर्जी ने कहा कि इस पुस्तक में नेताजी के जीवन के अनोखे पहलुओं को चित्रित करने के साथ ही और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति उनके असाधारण योगदान का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से हम एक बार फिर अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए नेताजी के प्रयासों और उनके समर्पण द्वारा प्रेरित महसूस करते हैं।
राष्ट्रपति महोदय ने 1995 में ऑग्सबर्ग में प्रो. अनिता बी. पाफ के निवास पर अपने दौरे को याद किया और कहा कि वहां उन्हें नेताजी के परिवार की तीन पीढि़यों के साथ मुलाकात करने का सुअवसर मिला। उन्होंने वहां नेताजी के बारे में दिलचस्प और स्मरणीय बातचीत की थी।
राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि यह पुस्तक नेताजी के प्रति एक श्रद्धांजलि है, जो राष्ट्रीय आंदोलन के महानतम नेताओं में एक थे और जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी ने अविस्मरणीय भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि नेताजी सभी भारतीयों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे। (PIB)
वि.कासोटिया/सुधीर/तारा – 463
पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की
‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस एंड जर्मनी’ नामक पुस्तक की पहली प्रति आज यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. अनिता बी. पाफ की ओर से राष्ट्र्पति श्री प्रणब मुखर्जी को भेंट की गई। इस पुस्तक को फेडरेशन ऑफ इंडो-जर्मन सोयाटिज इन इंडिया की ओर से तैयार किया गया है। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि इस पुस्तक को देखकर वे काफी प्रसन्न हुए, क्योंकि यह प्रो. अनिता बी. पाफ द्वारा खुद तथा अन्य जानेमाने लेखकों और जीवनी लेखकों द्वारा एक असाधारण संग्रह है।
श्री मुखर्जी ने कहा कि इस पुस्तक में नेताजी के जीवन के अनोखे पहलुओं को चित्रित करने के साथ ही और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति उनके असाधारण योगदान का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से हम एक बार फिर अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए नेताजी के प्रयासों और उनके समर्पण द्वारा प्रेरित महसूस करते हैं।
राष्ट्रपति महोदय ने 1995 में ऑग्सबर्ग में प्रो. अनिता बी. पाफ के निवास पर अपने दौरे को याद किया और कहा कि वहां उन्हें नेताजी के परिवार की तीन पीढि़यों के साथ मुलाकात करने का सुअवसर मिला। उन्होंने वहां नेताजी के बारे में दिलचस्प और स्मरणीय बातचीत की थी।
राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि यह पुस्तक नेताजी के प्रति एक श्रद्धांजलि है, जो राष्ट्रीय आंदोलन के महानतम नेताओं में एक थे और जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी ने अविस्मरणीय भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि नेताजी सभी भारतीयों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे। (PIB)
वि.कासोटिया/सुधीर/तारा – 463
बुधवार, फ़रवरी 06, 2013
केंद्रीय विद्यालय संगठन का स्वर्ण जयंती समारोह
प्रधानमंत्री का अभिभाषण 06-फरवरी-2013 16:36 IST
प्रधानमन्त्री डा मनमोहन सिंह ने किया उद्धघाटन सत्र को सम्बोधित
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| प्रधानमन्त्री ने इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा संगठन के नए लोगो का भी अनावरण किया (फोटो:पीआईबी) |
डा. मनमोहन सिंह ने केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संगठन के शिक्षकों और छात्रों को शुभकामनाएं और बधाई दीं।
केंद्रीय विद्यालय संगठन की 1963 में अपनी स्थापना के समय 20 रेजीमेंटल विद्यालयों के साथ व्याख्यात इस समय यह देश भर में फैले लगभग 1100 केंद्रीय विद्यालयों का प्रशासन संभालता है। यह लगभग 11 लाख बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है और इसके शिक्षकों सहित 46,000 से अधिक कर्मचारी हैं। यह संगठन केंद्र सरकार के स्थानांतरणीय केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के अपने दायित्व को विशिष्टता से साथ निभा रहा है। 50 वर्ष की इसकी यात्रा वास्तव में अत्याधिक सफल रही है। मैं उन सभी को बधाई देता हूं जिन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रियाओं में इतना अधिक योगदान करने में सक्षम बनाया है।
केंद्रीय विद्यालय संगठन में जुड़े सभी लोगों के यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि देश के विभिन्न भागों में अतिरिक्त केंद्रीय विद्यालयों को खोलने की जोरदार मांग है और मौजूदा विद्यालयों में दाखिला की प्रक्रिया में भी अत्यधिक प्रतिस्पर्धा है। यह केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा स्थापित शिक्षा के उच्च मानक का भी संकेत है। मैं समझता हूं कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों ने लगातार बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है। यही नहीं, इन विद्यालयों ने अपने छात्रों की पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भाग लेने पर जोर देकर उनके व्यक्तित्व विकास की आवश्यकता के प्रति की सजगता दिखाई है।
मुझे इस बात की खास खुशी है कि केंद्रीय विद्यालयों में छात्राओं का अनुपात 43 प्रतिशत है और संगठन के शिक्षकों में महिलाओं का बहुमत है।
केंद्रीय विद्यालयों की एक बड़ी संख्या इस समय रक्षा और अर्ध-सैनिक संस्थानों के परिसरों में स्थित है। इससे रक्षा और अर्ध-सैनिक बलों के कर्मचारियों, जिनकी जोखिम भरी ड्यूटियां उन्हें अपने परिवारों के साथ अक्सर कम समय बिकाने का मौका देती हैं, केन्द्रीय विद्यालय बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता प्राप्त करते है।
हमारी सरकार ने सदा इस बात को स्वीकारा है कि भारत एक आधुनिक, प्रगतिशील और समृद्ध देश के रूप में तभी उभर सकता है जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक हमारे नागरिकों की आसान पहुंच होगी। हम जानते हैं कि हमारा देश एक युवा देश है और एक शिक्षित एवं कुशल कार्यबल के होने पर ही हम जनांकिक लाभांश प्राप्त कर सकते हैं जो हमारी अर्थव्यवस्था को विस्तार करने और अधिक उत्पादक बनने में सहायक होगी।
हमारी सरकार के 2004 में सत्ता में आने के समय से ही हमने शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। हमने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण स्तर पर निवेश बढ़ाया है। हमने शिक्षा के प्रति पहुंच का तेजी से विस्तार किया है। हमने शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए भी काम किया है ताकि शिक्षा के बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सके। हमने यह सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया है कि हमारे समाज के कमजोर वर्गों और देश के कम विकसित क्षेत्रों के छात्रों को भी शिक्षा संबंधी पर्याप्त अवसर प्राप्त हों।
आज हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा की पहुंच लगभग सार्वभौमिक है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम सुनिश्चित करता है कि हमारे देश के प्रत्येक बच्चे को प्राथमिक शिक्षा के 8 वर्ष का अधिकार प्राप्त हो। मध्याह्न भोजन की योजना, जो हर रोज 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में गर्म भोजन उपलब्ध कराती है, ने बच्चों के स्कूलों में बने रहने में उल्लेखनीय सहायता की है। लेकिन शिक्षकों और शिक्षण का मानक उचित स्तर का नहीं है जिसके कारण परिणाम हमारी अपेक्षा से बहुत नीचे है। स्कूलों में प्राथमिक स्तर के बाद बच्चों का बीच में पढ़ाई छोड़ जाने वालों की संख्या अधिक बनी हुई है। निष्पक्षता से संबंधी कुछ बड़ी समस्याएं भी हल करना अभी शेष है।
12वीं पंचवर्षीय योजना में इन चुनौतियों का समाधान करने में केन्द्रीय विद्यालय अन्य स्कूलों के लिए मानक और बेंचमार्क तय करने में बड़े पैमाने पर सहायक हो सकते हैं। यह केन्द्रीय विद्यालों के लिए 12वीं योजना में निर्धारित लक्ष्यों में से एक है। उन्हें अपने पड़ोस के विद्यालयों के साथ सर्वोत्तम युक्तियों को बांटने में रोल-मॉडल के रूप में कार्य करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन से आग्रह किया कि वह इन अपेक्षाओं को कारगर रूप में पूरा करने के उपायों का पता लगाए।
मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने हमारे आसपास तेजी से बदलती हुई यर्थात स्थिति के साथ गति बनाये रखने के लिए कई नये कदम उठाये हैं इन में शिक्षा प्रदान करने, शिक्षकों और छात्रों के लिए विदेशों के साथ आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाने और विदेशी भाषाओं के शिक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग शामिल हैं। यह सभी सराहनीय कदम हैं जिनसे केन्द्रीय विद्यालयों को अपना स्तर सुधारने में सहायता मिलेगी। लेकिन केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करने में अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। मैं आशा करता हूं कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन, खासकर आधुनिक तकनीकों और प्रौद्योगिकी के प्रयोग में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करेगा।
अंत में मैं केन्द्रीय विद्यालय संगठन परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। मुझे विश्वास है कि आप अपने विशिष्ट रिकार्ड को इस स्वर्ण जंयती समारोह के माध्यम से और बेहतर बनाने पर विचार करेंगे। (PIB)***
वि.कासोटिया/क्वात्रा/अर्जुन/मीना–455
सोमवार, फ़रवरी 04, 2013
‘एयरो इंडिया -2013’ में रूसी शस्त्रास्त्र
4.02.2013, 09:07
बंगलुरु में 6 से 11 फरवरी तक अंतर्राष्ट्रीय एयरो-स्पेस प्रदर्शनी
रूस और भारत की मित्रता का सम्बन्ध का सम्बन्ध काफी पुराना है। जब जब भी भारत पर मुश्किलें आईं तब तब रूस ने अपनी दोस्ती निभाई। इन पुराने सम्बन्धों की एक झलक इस बार बंगलूरु में भी नजर आयेगी जहां एक विशेष प्रदर्शनी लगने वाली है। आज के नए अंतर्राष्ट्रीय हालात में इस प्रदर्शनी से जहाँ एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश जायेगा वहीँ भारत की शक्ति और ज़िम्मेदारी की छवि भी मजबूत होगी। रेडिओ रूस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि
‘एयरो इंडिया -2013’ में रूसी शस्त्रास्त्र
बंगलुरु में 6 से 11 फरवरी तक अंतर्राष्ट्रीय एयरो-स्पेस प्रदर्शनी
| © Collage: «the Voice of Russia» |
बंगलुरु में 6 से 11 फरवरी तक होने जा रही अंतर्राष्ट्रीय एयरो-स्पेस प्रदर्शनी ‘एयरो इंडिया -2013’ में रूस अपने अनेक नवीनतम शस्त्रास्त्र दिखाएगा| रूसी निगम ‘अलमाज़-अनतेई’ यहां पहली बार मॉडल और पोस्टरों में अपना धरती से आकाश में वार करने वाला नवीनतम रॉकेट समुच्चय ‘तोर-एम2केएम’ दिखाएगा| यह लघु दूरी पर प्रहार करने वाला समुच्चय है, जिसके तकनीकी और शस्त्र साधन मोडुलर हैं, निगम की प्रेस-सेवा ने बताया है|
“इस समुच्चय के अलावा निगम अपने सैनिक उपयोग के बीस से अधिक उत्पाद दिखाएगा, जिनमें बड़ी दूरी के मिसाइल कॉम्प्लेक्स ‘एस-300वीएम’, मध्यम दूरी के ‘बुक-एएम2ए’ तथा लघु दूरी के ‘तोर-एम2ए’ भी होंगे| इनके अलावा मिसाइलों की स्वचालित प्रबंधन प्रणालियाँ, रेडियोलोकेशन स्टेशन, तथा मिसाइल समुच्चयों में खराबियों का निदान करने और मरम्मत करने के उपकरण भी होंगे,” प्रेस सेवा की विज्ञप्ति में कहा गया है| (रेडिओ रूस से साभार)
© Collage: «the Voice of Russia»
‘एयरो इंडिया -2013’ में रूसी शस्त्रास्त्र
रविवार, फ़रवरी 03, 2013
भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया
01-फरवरी-2013 15:23 IST
दो फ्रिगेट 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत रक्षा पर विशेष लेख
आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान *हामिद हुसैन
भारतीय तटरक्षक 01 फरवरी, 2013 को अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी स्थापना के बाद से यह सेवा एक बहुआयामी और एक उत्साहपूर्ण बल के रूप में यह उभरी है जो बहु-भूमिका वाले पोतों और विमानों की तैनाती कर हर समय भारत के समुद्री क्षेत्रों की चौकसी करता है।
भारतीय नौ-सेना के दो फ्रिगेट और सीमा शुल्क विभाग के 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत कर आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान हैं। गत वर्ष के दौरान एक प्रदूषण नियंत्रण पोत, 6 गश्ती पोत, 4 वायु कुशन पोत, 2 इंटरसेप्टर नौकाएं शामिल की गई हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय मुख्यालय (एनई) की स्थापना तथा 8 सीजी स्टेशन का सक्रियण, सक्रियण/3 सीजी स्टेशनों की शुरूआत की योजना 2013 के प्रारंभ में की गई है।
भारतीय तटरक्षक आज तीव्र विस्तार की राह पर है। इसमें आधुनिक स्तर के पोत, नौकाएं और विमान का निर्माण विभिन्न शिपयार्ड/ सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम में किया जा रहा है और भविष्य में तटरक्षक अकादमी की स्थापना की जाएगी। तटरक्षक के संगठनात्मक ढाँचे में 5 क्षेत्रीय मुख्यालय, 12 जिला मुख्यालय, 42 स्टेशन तथा सभी भारतीय तटों पर 15 एयर यूनिट कार्य कर रहे हैं।
श्रम शक्ति की दृष्टि से इस सेवा ने सामान्य ड्यूटी में महिला अधिकारियों के लिए अल्प सेवा नियुक्ति की शुरूआत, मेधावी अधीनस्थ अधिकारियों को विभागीय पदोन्नति और विशेष नियुक्ति अभियान चलाकर अपने श्रम शक्ति में विस्तार किया है।
बृहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और तट रक्षा पर सतत निगरानी के लिए औसतन 20 पोत और 8-10 विमान तैनात किए गए है। भारतीय तटरक्षक ने तटीय निगरानी नेटवर्क (सीएसएन) की भी स्थापना की है जिसमें तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और 46 सुदूर स्थलों पर इलेक्ट्रो ऑप्टीक सेंसर शामिल है। इन सेंसरों में 36 मुख्य क्षेत्र में, 6 लक्ष्यद्वीप समूह और 4 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लगाएं गए हैं।
भारतीय तटरक्षक द्वारा तट के आस-पास के गाँवों में नियमित समुदाय संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मछली पकड़ने वाले समुदायों को मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उन्हें सतर्क रखना है। इसके अतिरिक्त गत वर्षों के दौरान भारतीय तट रक्षक ने 20 तटीय सुरक्षा अभ्यास और 21 तटीय सुरक्षा अभियान चलाया है।
भारतीय तटरक्षक द्वारा हर समय भारतीय खोज और बचाव क्षेत्रों में समुद्री जांच और बचाव किया जाता है। इस कठिन परिस्थिति में साहस दिखाते हुए पिछले वर्ष तटरक्षरक ने 204 लोगों की जान बचाई है। इस अवधि के दौरान भारतीय तटरक्षक द्वारा कुल 30 चिकित्सा बचाव किए गए।
भारतीय तटरक्षक ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित की है। सहयोग समझौता/ ज्ञापन के तहत संस्थागत यात्राएं नियमित की जाती हैं। 12वीं भारत-जापान तटरक्षक उच्च स्तरीय बैठक जापान के टोक्यो में जनवरी, 2013 में की गई। अक्तूबर, 2012 में नई दिल्ली में 8वां एशियाई तटरक्षक प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसे पहली बार भारत में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त, भारत-पाकिस्तान संयुक्त कार्य समूह बैठक का आयोजन पहली बार नई दिल्ली में जुलाई, 2012 में किया गया।
भारतीय तटरक्षक लगातार अपना विस्तार कर रहा है और जिससे इसकी क्षमता में और विकास हो रहा है। सक्षम और पेशेवर अधिकारियों द्वारा आधुनिक पोतों और विमानों का संचालन किया जा रहा है जो देश सेवा और समुद्री सुरक्षा में कार्य कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते है। वर्ष 2013 के लिए भारतीय तटरक्षक का शीर्षक है 'समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित लक्ष्य'। यह शीर्षक इस सेवा की प्रतिबद्धता और संकल्प को प्रदर्शित करता है जो इसके आदर्श वाक्य 'वयम् रक्षाम:' में प्रतिबिम्बित है जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते है'। (PIB) (पसूका)
*एपीआरओ (रक्षा) भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया
मीणा/आनंद/लक्ष्मी - 33
पूरी सूची - 01.02.2013
दो फ्रिगेट 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत रक्षा पर विशेष लेख
आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान *हामिद हुसैन
भारतीय तटरक्षक 01 फरवरी, 2013 को अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी स्थापना के बाद से यह सेवा एक बहुआयामी और एक उत्साहपूर्ण बल के रूप में यह उभरी है जो बहु-भूमिका वाले पोतों और विमानों की तैनाती कर हर समय भारत के समुद्री क्षेत्रों की चौकसी करता है।
भारतीय नौ-सेना के दो फ्रिगेट और सीमा शुल्क विभाग के 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत कर आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान हैं। गत वर्ष के दौरान एक प्रदूषण नियंत्रण पोत, 6 गश्ती पोत, 4 वायु कुशन पोत, 2 इंटरसेप्टर नौकाएं शामिल की गई हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय मुख्यालय (एनई) की स्थापना तथा 8 सीजी स्टेशन का सक्रियण, सक्रियण/3 सीजी स्टेशनों की शुरूआत की योजना 2013 के प्रारंभ में की गई है।
भारतीय तटरक्षक आज तीव्र विस्तार की राह पर है। इसमें आधुनिक स्तर के पोत, नौकाएं और विमान का निर्माण विभिन्न शिपयार्ड/ सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम में किया जा रहा है और भविष्य में तटरक्षक अकादमी की स्थापना की जाएगी। तटरक्षक के संगठनात्मक ढाँचे में 5 क्षेत्रीय मुख्यालय, 12 जिला मुख्यालय, 42 स्टेशन तथा सभी भारतीय तटों पर 15 एयर यूनिट कार्य कर रहे हैं।
श्रम शक्ति की दृष्टि से इस सेवा ने सामान्य ड्यूटी में महिला अधिकारियों के लिए अल्प सेवा नियुक्ति की शुरूआत, मेधावी अधीनस्थ अधिकारियों को विभागीय पदोन्नति और विशेष नियुक्ति अभियान चलाकर अपने श्रम शक्ति में विस्तार किया है।
बृहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और तट रक्षा पर सतत निगरानी के लिए औसतन 20 पोत और 8-10 विमान तैनात किए गए है। भारतीय तटरक्षक ने तटीय निगरानी नेटवर्क (सीएसएन) की भी स्थापना की है जिसमें तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और 46 सुदूर स्थलों पर इलेक्ट्रो ऑप्टीक सेंसर शामिल है। इन सेंसरों में 36 मुख्य क्षेत्र में, 6 लक्ष्यद्वीप समूह और 4 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लगाएं गए हैं।
भारतीय तटरक्षक द्वारा तट के आस-पास के गाँवों में नियमित समुदाय संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मछली पकड़ने वाले समुदायों को मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उन्हें सतर्क रखना है। इसके अतिरिक्त गत वर्षों के दौरान भारतीय तट रक्षक ने 20 तटीय सुरक्षा अभ्यास और 21 तटीय सुरक्षा अभियान चलाया है।
भारतीय तटरक्षक द्वारा हर समय भारतीय खोज और बचाव क्षेत्रों में समुद्री जांच और बचाव किया जाता है। इस कठिन परिस्थिति में साहस दिखाते हुए पिछले वर्ष तटरक्षरक ने 204 लोगों की जान बचाई है। इस अवधि के दौरान भारतीय तटरक्षक द्वारा कुल 30 चिकित्सा बचाव किए गए।
भारतीय तटरक्षक ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित की है। सहयोग समझौता/ ज्ञापन के तहत संस्थागत यात्राएं नियमित की जाती हैं। 12वीं भारत-जापान तटरक्षक उच्च स्तरीय बैठक जापान के टोक्यो में जनवरी, 2013 में की गई। अक्तूबर, 2012 में नई दिल्ली में 8वां एशियाई तटरक्षक प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसे पहली बार भारत में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त, भारत-पाकिस्तान संयुक्त कार्य समूह बैठक का आयोजन पहली बार नई दिल्ली में जुलाई, 2012 में किया गया।
भारतीय तटरक्षक लगातार अपना विस्तार कर रहा है और जिससे इसकी क्षमता में और विकास हो रहा है। सक्षम और पेशेवर अधिकारियों द्वारा आधुनिक पोतों और विमानों का संचालन किया जा रहा है जो देश सेवा और समुद्री सुरक्षा में कार्य कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते है। वर्ष 2013 के लिए भारतीय तटरक्षक का शीर्षक है 'समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित लक्ष्य'। यह शीर्षक इस सेवा की प्रतिबद्धता और संकल्प को प्रदर्शित करता है जो इसके आदर्श वाक्य 'वयम् रक्षाम:' में प्रतिबिम्बित है जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते है'। (PIB) (पसूका)
*एपीआरओ (रक्षा) भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया
मीणा/आनंद/लक्ष्मी - 33
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