शनिवार, जनवरी 28, 2012

कडवी हकीकतों के रूबरू कराते सादगी भरे शब्द

गाँधी के गुजरात से मेहल मकवाना की एक कविता  
जैसे मेरे पास भी एक योनि है…सोनी सोरी
जज साहब,
मेरे साल तेंतीस होने को आये लेकिन,
मैंने कभी कारतूस नहीं देखी है !
सिर्फ बचपन में फोड़े दीपावली के पटाखों की कसम,
आज तक कभी छुआ भी नहीं है बन्दुक को !
हा, घर में मटन-चिकन काटने इस्तेमाल होता,
थोडा सा बड़ा चाकू चलाने का महावरा है मुझे !
लेकिन मैंने कभी तलवार नहीं उठाई है हाथ में !
में तो कब्बडी भी मुश्किल से खेल पानेवाला बंदा हूँ,
मल्ल युद्द्द या फिर कलैरीपट्टू की तो बात कहा ?
प्राचीन या आधुनिक कोई मार्शल आर्ट नहीं आती है मुझे !
में तो शष्त्र और शाष्त्र दोनों के ज्ञान से विमुख हूं !
यह तक की लकड़ी काटने की कुल्हाड़ी भी पड़ोसी से मांगता हूँ !

लेकिन मेरे पास दो हाथ है जज साहब,
महनत से खुरदुरे बने ये दोनों हाथ मेरे अपने है !
पता नहीं क्यों लेकिन जब से मैंने यह सुना है,
मेरे दोनों हाथो में आ रही है बहुत खुजली !
खुजला खुजला के लाल कर दिए है मेने हाथ अपने !

और मेरे पास दो पैर है जज साहब !
बिना चप्पल के काँटों पे चल जाये और आंच भी न आये
एसे ये दोनों पैर, मेरे अपने है जज साहब !
और जब से मेंने सुना है
की दंतेवाडा कि आदिवासी शिक्षक सोनी सोरी की योनि में
पुलिसियों ने पत्थर भरे थे,
पता नहीं क्यों में बार बार उछाल रहा हु अपने पैर हवा में !
और खींच रहा हूं सर के बाल अपने !
जैसे मेरे पास भी एक योनि है और कुछ पैदा ही रहा हो उस से !

हा, मेरा एक सर भी है जज साहब,
हर १५ अगस्त और २६ जनवरी के दिन,
बड़े गर्व और प्यार दुलार से तिरंगे को झुकनेवाला
यह सर मेरा अपना है जज साहब !
गाँधी के गुजरात से हूं इसलिए
बचपन से ही शांति प्रिय सर है मेरा !
और सच कहू तो में चाहता भी हूं कि वो शांति प्रिय रहे !
लेकिन सिर्फ चाहने से क्या होता है ?

क्या छत्तीसगढ़ का हर आदिवासी,
पैदा होते हर बच्चे को नक्सली बनाना चाहता है ?
नहीं ना ? पर उसके चाहने से क्या होता है ?
में तो यह कहता हु की उसके ना चाहने से भी क्या होता है ?
जैसे की आज में नहीं चाहता हु फिर भी ...
मेरा सर पृथ्वी की गति से भी ज्यादा जोर से घूम रहा है !
सर हो रहा है सरफिरा जज साहब,
इससे पहले की सर मेरा फट जाये बारूद बनकर,
इससे पहले की मेरा खुद का सर निगल ले हाथ पैर मेरे ,
इससे पहले की सोनी की योनि से निकले पत्थर लोहा बन जाए,
और ठोक दे लोकतंत्र के पिछवाड़े में कोई ओर कील बड़ी,
आप इस चक्रव्यूह को तोड़ दो जज साहब !
रोक लो आप इसे !
इस बिखरते आदिवासी मोती को पिरो लो अपनी सभ्यता के धागे में !
वेसे मेरे साल तेंतीस होने को आये लेकिन,
मैंने कभी कारतूस नहीं देखी !
कभी नहीं छुआ है बन्दुक को ,
नहीं चलाई है तलवार कभी !
और ना ही खुद में पाया है
कोई जुनून सरफरोशी का कभी !
– मेहुल मकवाना, अहमदाबाद, गुजरात
94276 32132 and 84012 93496



गुरुवार, जनवरी 26, 2012

एक यादगारी भेंट

इस बार भारत के 63वें गणतन्त्र दिवस के शुभ अवसर पर थाईलैंड की प्रधानमंत्री कुमारी यिंगलुक्क  शिनावत्रा मुख्य मेहमान थी. उनके सम्मान में राष्ट्रपति भवन नै दिल्ली २६ जनवरी, 2012 को किये गए एक विशेष आयोजन में प्रधान मंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी श्रीमती गुरशरण कौर भी उपस्थित रहे. इस ख़ास मेहमान की उपस्थिति से यह दिन और भी यादगारी बन गया. इन पलों को हमेशां के लिए संजोये रखने के मकसद से पी आई बी के कैमरामैन ने इन की एक शानदार और जानदार तस्वीर भी खींच ली. 

सीएमसी अस्पताल लुधियाना में भी मनाया गया गणतन्त्र दिवस

बेटियों की हत्या के खिलाफ दिया गया एक ज़ोरदार संदेश
सी एम सी छात्र-छात्रायों ने किया दिल को झंक्झौर देने वाला मंचन
लुधियाना//26 जनवरी, 2012// शालू अरोड़ा और रेक्टर कथूरिया:
गणतन्त्र दिवस के शुभ अवसर पर जगह जगह पर रंगारंग कार्यक्रम हुए. कार्यक्रमों की इस भीड़ में एक अलग सा आयोजन था लुधियाना के सी एम् सी अस्पताल और कालेज प्रबन्धन की ओर से,  झंडे की रस्म थी, गीत संगीत था, और मिल; बैठने का एक ऐसा खूबसूरत बहाना जिसमें जग रहा था देश का प्रेम, देश के लोगों का फ़िक्र और दुनिया के विकास की रफ़्तार में भारत को सबसे आगे देखने का जनून.
इस यादगारी अवसर पर जानेमाने उद्योगपति जोगिन्दर कुमार भी विशेष तौर पर उपस्थित हुए. उन्होंने मीडिया  से एक संक्षिप्त भेंट के दौरान भारत की प्रगति, आर्थिक मजबूती और अनेकता में एकता का उल्लेख करते हुए कहा की आज गणतन्त्र दिवस के मौके पर इन सब बातों को याद करके एक बार फिर हमारा सर फखर से ऊंचा हो जाता है. उन्होंने याद दिलाया की आज भारत आर्थिकता केमामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है.
कालेज के छात्र छात्रायों की ओर से बहुत सी रंगारंग आईटमें प्रस्तुत की गयीं. मंच से दिल में उतर जाने वाला मनमोहक गीत संगीत भी था, पंजाब की पहचान, पंजाबियों की जान भांगड़ा भी, अनेकता में एकता का संदेश देता राजस्थानी लोक नाच भी और आज के समाज में लगातार सर उठा रही बुराई भ्रूण हत्या का मर्मस्पर्शी मंचन भी.
ह्रदय को बार बार छू कर दिल और दिमाग को झंक्चौर देने वाली इस प्रस्तुती को तैयार किया था सी एम् सी के ही कालेज आफ फिजियोथरेपी के छात्र-छात्रायों ने. इस टीम में अगर एक आशिमा लुधियाना की थी तो दूसरी आशिमा मनाली से आई थी.कनिका सिंह चंडीगढ़ से थी तो पुबली दास कोलकाता से. बनीत शर्मा की कला से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की झलक मिल रही थी तो नवां शहर से रमण दीप की कला भी कम नहीं थी. बेगिवल दोराहा से दपिन्द्र ने भी इसी टीम अपनी आवाज़ बुलंद की थी की मर मरो बेटियों को. इन्होने ही हमें जन्म दिया है. इनकी हत्या करके हम कहाँ जायेंगे.  किसे मूंह दिखायेंगे. लुधियाना की सुखं प्रीत ने इस सम्बन्ध में बात करते हुए इस शानदार प्रस्तुती का सेहरा अपनी पूरी टीम को दिया. करीब ढाई घंटे तक चले इस आयोजन ने दर्शकों पर एक गहरी चाप छोड़ी और साबित किया कि इस बार इन टीमों ने पहले से कहीं अधिक मेहनत की है. इस दिन को और भी यादगारी बनाने के लिए हुए इस आयोजन में सीएमसी अस्पताल और कालेज पर्बंधन की और से डाक्टर ए जी थोमस और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी, डाक्टर अ प्रोफेसर शामिल हुए.

बुधवार, जनवरी 25, 2012

लुधियाना में भी चुनाव अभियान ज़ोरों पर

स्वपन सुंदरी हेमा मालिनी नें भी की सतपाल गोंसाई के लिये वोट की अपील
लुधियाना 25 जनवरी (गुलशन) 30 जनवरी को होंने जा रहे पंजाब विधान सभा चुनावों के चलते लुधियाना के विधान सभा क्षेत्र सेंट्रल के भाजपा-अकाली गठबंधन के प्रत्याशी सतपाल गोंसाई की चुनाव मुहिंम को गति देने के लिये किदवाई नगर स्थित मैंबर पार्लीयामैंट व  लुधियाना की बहु और प्रख्यात बालीवुड़ अभिनेत्री स्वपन सुन्दरी हेमा मालिनी ने एक प्रभावशाली चुनाव रैली में पहुंच कर बोले सो निहाल के जैकारे के साथ शुरूआत करते हुऐ लोगों को संबोधित करते कहा  कि पंजाब में दूसरी बार आई है और इस से पहले भी वह गोंसाई जी के चुनाव प्रचार के लिये लुधियाना आई थी।  उन्होंने कहा कि पंजाब से मुझे प्यार है क्योंकि यहां का खाना, पानी और पंजाब के लोगों की (बल्ले बल्ले). उन्होंने कहा कि  अब में एक बार फिर सतपाल जी के लिये आप लोगों से वोट देकर जीत दिलाने की अपील करने आई हूँ उन्होंने गोंसाई दी को शेरे पंजाब सतपाल कहते हुऐ कहा कि इन्होंने पंजाब के अस्पतालों में ऐम्बोलैंस बस सेवा चालु करवाई है और रोज गार्डन, चिल्डऱ्न पार्क, गन्दा नाला को कवर करने का काम, गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में शगुन देने और न्रून हत्या पर रोक लगाने आदि अच्छे कार्य करवाये हैं जो जनता के हित में हैं। उन्होंने जोदार अपील में कहा कि पंजाब में सरदार बादल को फिर मुख्यमन्त्री बनाने के लिये, विकास के बल पर एक बार फिर अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार कों सत्ता में लाने के लिए अपना वोट अकाली भाजपा को दें। इस अवसर पर जिला भाजपा प्रधान राजीव कतना, ओम प्रकाश रतड़ा, संजय कपूर, नरेश धीगान, पार्षद गुरदीप सिंह नीटू,बजुर्ग अकाली नेता कुलवंत सिंह दुखिया, ज्ञान चंद गुप्ता, सुभाष वर्मा, प्राण नाथ भाटिया आदि सैकड़े अकाली व भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित हुए। 

बहादुरी दिखाने पर किया देश और दुनिया ने फखर

राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार से सम्‍मानित बच्‍चों ने की उप राष्‍ट्रपति से मुलाकात
वीरता पुरस्‍कार-2011 से सम्‍मानित बच्‍चों ने आज यहां एक समारोह में भारत के उपराष्‍ट्रपति श्री हामिद अंसारी से मुलाकात की। उपराष्‍ट्रपति ने बहादुर बच्‍चों तथा उनके परिवार के सदस्‍यों से बातचीत की। बहादुर बच्‍चों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्‍होंने कहा कि इन बच्‍चों में अपार क्षमता और सामर्थ्य है तथा वह निश्‍चित रूप से अपने जीवन में उच्‍च लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करेंगे। बच्‍चों ने अपने साहस और बहादुरी के कारनामें उपराष्‍ट्रपति से बांटे। 

इस वर्ष 24 बच्‍चों को राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार प्राप्‍त हुए हैं। इनमें से पाँच बच्‍चों को यह पुरस्‍कार मरणोपरांत दिया गया है। विजेता बच्‍चों को एक पदक, प्रमाणपत्र और नकद राशि ईनाम के रूप में दी गई। प्रतिष्ठित भारत पुरस्‍कार रूद्रप्रयाग (उत्‍तराखंड) के स्‍वर्गीय मास्‍टर कपिल सिंह (15 वर्ष) को दिया गया जिसने अदम्‍य साहस का प्रदर्शन करते हुए अपने स्‍कूल के बच्‍चों की जान बचाई। गीता चोपड़ा पुरस्‍कार अहमदाबाद की कुमारी मित्‍तल महेंद्रभाई (12 वर्ष 2 महीने) को दिया गया। संजय चोपड़ा पुरस्‍कार आज़मगढ़ (उत्‍तर प्रदेश) के मास्‍टर ओम प्रकाश यादव (11 वर्ष 5 महीने) को दिया गया।

इस योजना की शुरूआत के बाद से भारतीय बाल कल्‍याण परिषद द्वारा 584 लड़कों तथा 240 लड़कियों सहित 824 बच्‍चों को पुरस्‍कार दिए गए हैं। विजेताओं को परिषद की छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत उनकी स्‍कूली शिक्षा पूरी होने तक वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाएगी। 

मंगलवार, जनवरी 24, 2012

धूमधाम से हुआ पूर्वोत्‍तर संस्‍कृति केंद्र का उद्घाटन

संस्‍कृति मंत्रालय कला संस्‍कृति को बढ़ावा संरक्षण देने को प्रतिबद्ध
कुमारी सैलजा ने किया पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के साथ वायदा
केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री ने यह बताया कि उनका मंत्रालय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की सम्‍पन्‍न, विविध तथा अनोखी कला एवं संस्‍कृति को बढ़ावा तथा संरक्षण देने को अत्‍यंत महत्‍व देता है। उन्‍होंने यह बात पूर्वोत्‍तर संस्‍कृति केंद्र के उद्घाटन अवसर के दौरान कही। क्षेत्र की सांस्‍कृतिक परंपराओं की सुरक्षा के भाग के रूप में संगीत नाटक अकादमी ने पूर्वोत्‍तर केंद्र शिलांग में गठित किया है। इसने गुवाहाटी में सत्रिया केंद्र गठित किया है, जो असम की सत्रिया परंपरा के बारे में देखभाल करता है। 

उन्‍होंने यह भी बताया कि दीमापुर में पूर्वोत्‍तर आंचलिक सांस्‍कृतिक केंद्र थियेटर रूपांतरित योजना को लागू कर रहा है। इसके अंतर्गत पूर्वोत्‍तर क्षेत्रों में थियेटरों की सुरक्षा और इनके लिए सहायता दी जाती है। मंत्री महोदया ने यह भी बताया कि नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा पूर्वोत्‍तर नाट्य समारोह अलग से आयोजित करता है, जिसमें प्रतिष्ठित निर्देशकों के नाटक तथा पूर्वोत्‍तर की प्रमुख परंपराओं को दर्शाया जाता है। (तस्वीर व विवरण: पत्र सूचना कार्यालय)

सोमवार, जनवरी 23, 2012

भारत निर्माण स्‍वयंसेवी-ग्रामीण जागरूकता के संवाहक

परिवारों तथा विभिन्‍न विभागों के बीच सहज कड़ी
पत्र सूचना कार्यालय अगरतला की ओर से कराई गई.एक संगोष्ठी में बेबाक होकरसवाल पूछती एक महिला. इस संगोष्ठी का आयोजन भारत निर्माण जन सूचना अभियान के अंतर्गत २० जनवरी को राज नगर दक्षिणी त्रिपुरा में किया गया था. (फोटो: पी.आई.बी.
भारत निर्माण स्‍वयंसेवी एक ऐसा व्‍यक्‍ति है जो ग्रामीण परिवेश से जुड़ा है वह अपनी मर्जी से परिवारों तथा विभिन्‍न विभागों के मेजबानों के बीच सहज कड़ी के रूप में कार्य करता है। वह सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्‍न कार्यक्रमों के लाभ बिना पहुंच वाले ग्रामीणों को दिलवाना सुनिश्‍चित करता है। दूसरे शब्‍दों में, वे कार्यक्रमों तथा इन कार्यक्रमों की पहंच से दूर बिना के लोगों के बीच मील का आखिरी मानवीय संपर्क है। अब तक देश में 31,000 स्‍वयंसेवी को भारत निर्माण स्‍वयंसेवी के रूप में नामांकित कर लिया गया है। इस वर्ष मार्च तक 1,60,000 को नामांकित करने का लक्ष्‍य है।
भारत निर्माण स्‍वयंसेवी क्‍यों?
     सरकार तथा संबंधित राज्‍य सरकारें कई दशकों से विभिन्‍न कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों को संचालित कर रही हैं। तथापि, कई मूल्‍यांकन अध्‍ययनों में यह दर्शाया गया है कि कार्यक्रमों के कार्यान्‍वयन में कमी रह गई और गरीबी से नीचे रहने वाले कई संबद्ध परिवारों को वांछित लाभ नहीं मिल पाया। विभिन्‍न स्‍तरों पर इन सुविधाओं का लाभ देने वालों का आकार सीमित रहने तथा पर्याप्‍त समय न देने पर लक्षित ग्रामीण घर परिवारों को इनका लाभ भी समय पर नहीं मिल पाया तथा कहीं पर ऐसे लोगों को भी लाभ मिल गया जिन्‍हें इसकी जरूरत नहीं थी।

     ग्रामीण घर परिवारों के साथ आखिरी जुड़ाव के रूप में मानवीय चेहरा प्रस्‍तुत करने के लिए यह सोचा गया कि क्षमतावान युवकों का उपयोग भारत निर्माण स्‍वयंसेवी के नाम से किया जाए जो ग्रामीण घर परिवारों के बीच कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाएंगे जिससे बेहतर योजना तथा कार्यक्रमों का सुचारू कार्यान्‍वयन हो और पारदर्शिता तथा जवाबदेही लाई जा सके।
वे क्‍यों स्‍वयंसेवी बने?
पिछले काफी समय से देखा जा रहा था कि ग्रामीण परिवेश में स्‍थानीय शक्‍ति के समूह बढ़ने, विभिन्‍न समुदायों के बीच एकता का अभाव, उनसे संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता का अभाव, कार्यक्रम की कार्यान्‍वयन प्रक्रिया के पहलुओं के बारे में जागरूकता का अभाव जैसे मुद्दे सामने आ रहे थे इससे विभिन्‍न सरकारी कार्यक्रमों का लाभ गरीब परिवारों को नहीं पहुंच पा रहा था। इसके साथ ही, विभिन्‍न कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों की योजना की प्रक्रिया में ग्रामीण परिवारों की सहभागिता पर्याप्‍त नहीं थी। इसलिए, ग्रामीणों की विशेष तौर पर युवाओं की स्‍वयंसेवी भागीदारी तथा ग्राम विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में भाग लेने का अवसर प्रदान करना आवश्‍यक समझा गया। भारत निर्माण स्‍वयंसेवकों ने अपने कार्यों से अपने व्‍यक्‍तित्‍व, व्‍यवहार में काफी परिवर्तन महसूस किया। उन्‍होंने सम्‍मान और पहचान प्राप्‍त की तथा जहां उन्‍होंने कोई विशिष्‍ट कार्य किया तो उनमें यह भाव पैदा हुआ कि ‘यह हमने किया’।

     प्रशिक्षण में मूल्‍यों तथा नैतिकता के साथ-साथ सरकार की सभी विकास योजनाओं के उद्देश्‍यों पर बल दिया गया है। इससे उनका ध्‍यान उनके समुदाय में व्‍याप्‍त विभिन्‍न बुराइयों जैसे कि शराबखोरी, जल्‍दी स्‍कूल छोड् देने के साथ ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था, सुशासन और योजना की ओर गया। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत तथा समितियों के अंतर्गत मुद्दों का निपटान, अनुशासन, सहजता तथा निर्धारित ढंग के होने से वे स्‍वयं अचंभित थे और ऐसा उन्‍होंने पहले सोचा भी नहीं था। वे शक्‍तिशाली स्‍तंभों से भी सामना करने लगे और उन्‍हें अपने विकास कार्यक्रम के अनुरूप ढालने में समर्थ रहे।

     अनेक गांवों में गलियों की सफाई की, कूड़े का निपटान किया, टैंकों को साफ किया, श्रमदान करके सड़क तैयार की, सूचना प्रदान की। कई बार उन्‍होंने अपनी कमाई भी लगाई। उनमें से कुछ ने बेसहारा परिवारों, जिनमें केवल महिलाएं घर चलाती थीं जिनके लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली से प्राप्‍त चावल पूरा नहीं पड़ता था, ऐसे परिवारों की पहचान की और कार्यकर्ताओं ने ऐसे परिवारों की मदद की और यह सुनिश्‍चित किया कि वे हर रोज अपने तीन समय का भोजन प्राप्‍त कर सकें। कई स्‍वयंसेवी अपने गांव में रोशनी लाने के लिए ऊर्जा के वैकल्‍पिक स्रोतों की योजना सरकार से धनराशि प्राप्‍त करने के लिए बना रहे हैं। कुछ अपनी गलियों में सौर ऊजा से रोशनी तथा कुछ सौर कुकर और बिजली के लिए योजना बना रहे हैं। गांव में विभिन्‍न समुदायों के बीच काफी समय से चल रहे झगड़ों का निपटारा कर लिया गया है और भाईचारा पनपा है। भारत निर्माण स्‍वयंसेवी ने मंडल स्‍तर पर सभी विभागों से संपर्क कर समुदायों के पूरे नहीं किए गए अनुरोधों के संबंध में उत्‍तर प्राप्‍त किए हैं। इनमें से अनेक ने दफनाने के लिए स्‍थान, खेल के मैदान तथा कुछ ने अपने गांव में बस चलाने के लिए प्रशासन से पहचान तथा अधिसूचना प्राप्‍त कर ली है। प्राय: सभी गांव वालों ने यह सूचित किया है कि उन्‍होंने ऐसी दुकानें (शराब की दुकान) बंद कराने के प्रयास किए और उनमें से कई ऐसी दुकाने बंद कराने में सफल रहे। कुछ ने गांव की दुकानों में पान और गुटकों की बिक्री बंद करा दी। कइयों ने सौ प्रतिशत आईएसएल कवरेज के बारे में अनेक लोगों को सूचित किया है।

     कइयों ने प्रशासन से नालियों की लाइन के निर्माण के लिए संपर्क किया है। एक गांव में प्रत्‍येक घर परिवार के लिए गड्ढ़ा भरना निश्‍चित किया गया है, यह उनका लक्ष्‍य है और उन्‍हें यह विश्‍वास कि वे इस कार्य को शीघ्र ही पूरा कर लेंगे। कुछ गांवों में खुली हवादार लाइब्रेरी शुरू की गयी हैं। अख़बार और पत्रिकाएं शाम तक छोटे कमरे में रख दी जाती हैं और शाम को इन्‍हें पेड़ के पास चौपाल में पढ़ने के लिए पहुंचा दिया जाता है। बाद में इन्‍हें फिर से स्‍वयंसेवी  प्रभारीद्वारा कमरे में वापस पहुंचा दिया जाता है।

     आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास अकादमी (अपार्ड) के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों को स्‍वयं सेवा की भावना का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रबुद्ध व्‍यक्‍तियों, उस्‍मालिया विश्‍वविद्यालय के साइक्‍लोजिस्‍ट, ब्रह्म कुमारियां, भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम द्वारा शुरू किया गया लीड इंडिया फाउंडेशन, अनुभवी पत्रकार तथा प्रोग्रेसिव सरपंच तथा अपार्ड से लोगों को शामिल किया गया।

इस प्रयोग की सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह रही कि यह सभी स्‍वयंसेवी किसी भी स्रोत से कोई वित्‍तीय सहायता या मानदेय प्राप्‍त नहीं करते। इसके विपरीत कई मामलों में वे जहां आवश्‍यकता पड़ती है अपनी खुद की धनराशि खर्च करते हैं। उन्‍होंने यह सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण समुदाय निष्‍क्रिय नहीं हैं और वे अपनी समस्‍याओं का समाधान करने में सक्षम हैं। उन्‍होंने यह भी सिद्ध कर दिया है कि वे अपने समुदाय के अधूरे सपनों को पूरा कर सकते हैं तथा वे ग्रामीण आंध्र प्रदेश के स्‍तर में गुणवत्‍ता परक सुधार लाएंगे। एक खास बात जो अपार्ड ने देखी कि भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच कार्य का बेहतर माहौल बना जबकि यह लगता था कि इनके बीच टकराव तथा तकरार न हो जाए। यात्रा जारी है और भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों से लम्‍बी सूची प्राप्‍त करने की अपेक्षा है।                                       {
पी.आई.बी.} 
***

*ग्रामीण विकास मंत्रालय से प्राप्‍त सामग्री के आधार पर

बाल श्रम पर नवगठित केन्‍द्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक

बच्‍चों के भविष्‍य को सुरक्षित बनाने का आह्वान:खड़गे ने की अध्यक्षता
केन्‍द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में बच्‍चों के भविष्‍य को सुरक्षित बनाने के लिए और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया है। श्री खड़गे आज बाल श्रम पर नवगठित केन्‍द्रीय सलाहकार बोर्ड की पहली बैठक की अध्‍यक्षता कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि उनके मंत्रालय को बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) कानून 1986 के कार्यान्‍वयन का महत्‍वपूर्ण अधिकार मिला हुआ है, जिसके तहत 14 वर्ष की आयु से कम के बच्‍चों को 16 व्यवसायों एवं 65 प्रक्रियाओं में लगाए जाने की मनाही है। ये व्‍यवसाय हैं कसाई घर/पशु वध स्‍थल, मोटर व्यवसाय, हानिकारक अथवा ज्‍वलनशील सामग्री को संभालना, कपड़ा उद्योग, खान उद्योग, घरेलू नौकरों के तौर पर, ढाबों में, तैराकी, सर्कस और हाथियों की देख-रेख। अपने मंत्रालय की उपलब्धियों का ब्‍यौरा देते हुए श्री खड़गे ने कहा कि राष्‍ट्रीय बाल श्रम नीति के अनुपालन में वर्ष 1988 में बाल श्रमिकों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत 271 जिलों की पहचान की गई और वर्तमान में यह योजना 20 राज्‍यों के 266 जिलों में लागू है, जिसमें लगभग 3.39 लाख बच्‍चों को 7300 विशेष विद्यालयों में पढ़ाया जाता है। इस योजना के अंतर्गत बच्‍चों को काम से हटाकर विशेष स्‍कूल में भर्ती कराया जाता है और उन्‍हें ब्रिज शिक्षा, व्‍यावसायिक शिक्षा, 150 रुपये का मानदेय, मध्‍यान भोजन तथा स्‍वास्‍थ्‍य देख-रेख की जाती है। इसके अलावा मंत्रालय बाल श्रम के लिए अनुदान सहायता योजना भी चला रहा है, जिसमें परियोजना लागत की 75 प्रतिशत धनराशि स्वयंसेवी संगठनों को सीधे दी जाती है, जो उन जिलों में बाल श्रम उन्‍मूलन के काम कर रहे है, जहां एनसीएलपी विद्यालय बनाना संभव नहीं है। 

श्री खड़गे ने कहा कि सरकार बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) कानून 1986 में संशोधन करने का विचार भी कर रही है, जिसके तहत 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चों को काम पर लगाने की मनाही का प्रस्‍ताव है। ऐसा शिक्षा के अधिकार कानून-2009 के लागू होने के कारण किया जा रहा है, जिसमें 06 से 14 वर्ष के बच्‍चों को नि:शुल्‍क एवं अनिवार्य शिक्षा दिये जाने का प्रावधान है। यह विषय हाल में ही आयोजित एक बैठक में उठाया गया, जिसमे सभी राज्‍यों के सचिव और केन्‍द्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल थे, जो लगभग 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चों को रोजगार में लगाने पर प्रतिबंध के लिए एकमत थे। आज की बैठक इस कानून में संशोधन पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी। इस अवसर पर श्रम मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव श्री अनुप पांडेय द्वारा बाल श्रम कानून के विभिन्‍न पहलूओं तथा अंतर्राष्‍ट्रीय राय से सम्‍बद्ध एक प्रस्‍तुती भी दी गई। (
20-जनवरी, 2012 20:45) {पत्र सूचना कार्यालय}