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गुरुवार, फ़रवरी 28, 2013

आम बजट: ग्रामीण विकास

28-फरवरी-2013 13:49 IST
ग्रामीण विकास की मुख्‍य योजनाओं के बजटीय आवंटन में 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी 
वित्‍त मंत्री पी. चिदबंरम ने आज संसद में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए बताया कि अनेक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम लागू करने वाले ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजटीय आवंटन में भारी बढ़ोतरी की गई है। अपने बजट भाषण में वित्‍त मंत्री ने यह घोषणा की कि मंत्रालय को 2013-14 में 80,194 करोड़ रुपये दिये जाएंगे जबकि 2012-13 में 55 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे। इस प्रकार आवंटन में 46 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ को 33 हजार करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 21,700 करोड़ रुपये तथा इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) को 15,184 करोड़ रुपये प्रदान किये जाएंगे। 

वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उद्देश्‍य अनेक राज्‍यों में व्‍यापक रूप से पूरे कर लिए गये हैं और ये राज्‍य इस बारे में और कार्य करने के इच्‍छुक हैं, इसलिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 शुरू करने और नये कार्यक्रम को धन का एक हिस्‍सा आवंटित करने का प्रस्‍ताव है। इससे आंध्र प्रदेश, हरियाण, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, पंजाब और राजस्‍थान जैसे राज्‍यों को फायदा होगा।

इसी प्रकार पेय जल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय को चालू वर्ष के दौरान 15,260 करोड़ रुपये दिये जाएंगे जबकि संशोधित अनुमान 13 हजार करोड़ रुपये का था। उन्‍होंने जल शुद्ध करने के सयंत्रों की स्‍थापन करने के‍लिए 1400 करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराने का भी प्रस्‍ताव किया है क्योंकि देश में अभी भी 2000 आर्सिनिक और 12 हजार फ्लोराइड से प्रभावित ग्रामीण बस्तियां मौजूद हैं। (PIB)
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मीणा/राजगोपाल/प्रदीप/सुधीर/संजीव/इन्‍द्रपाल/बिष्‍ट/शदीद/सुनील/शौकत/मनोज-

गुरुवार, फ़रवरी 21, 2013

विशेष लेख........//......... *डॉ के. परमेश्‍वरन

12-फरवरी-2013 19:04 IST
एक गांव में एक किसान क्‍लब: कृषि क्षेत्र में नई पहल 
कुछ समय पहले मदुरई जिले के पश्चिमी हिस्‍से के गांव में तैनात अधिकारियों ने महिला स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के प्रबंधन की जिम्‍मेदारी पडोस के रज्‍जुकर किसान क्‍लब को सौंपी। मदुरई जिले के मेलूर ब्‍लॉक के लक्ष्‍मीपुरम स्थित यह क्‍लब स्‍थानीय स्‍कूल के गरीब बच्‍चों को हर साल किताबें  बांट रहा है। जिले के वैगई विवासाइगलसंघम के किसान क़ृषि संबंधी कार्यक्रम राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में चला रहे हैं।  यह सब राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा देश के गांव में चलाए जा रहे अभियान के तहत हुआ। किसान क्‍लब की अवधारणा नाबार्ड समर्थित है और इसका नारा एक गांव में किसानों का एक क्‍लब है। इसके तहत प्रगतिशील किसान क्‍लब के झंडे तले एकत्रित होते हैं। नाबार्ड तीन वर्षों तक इन क्‍लबों को किसानी के प्रगतिशील तौर-तरीके संबंधी प्रशिक्षण और कृषि संबंधी यात्राओं के लिए राशि उपलब्‍ध कराता है।
    मदुरई जिले के विभिन्‍न गावों में अभी 170 किसान क्‍लब काम कर रहे हैं। इन क्‍लबों में सर्वाधिक सफल किसान हैं उत्‍थापनीकनूर के किसान। किसान चमेली उगाते हैं। नाबार्ड ने इस क्‍लब को इंडियन बैंक की साझेदारी में 30 क्‍लबों में शुमार किया है। एक कदम बढकर इन क्‍लबों ने एक फेडरेशन बनाया है जिसका नाम है उत्‍थापनीकनूर फलावर ग्रोअर फेडरेशन। जास्‍मीन उगाने वाले किसान चाहते हैं कि वे स्‍वयं अपना बाजार चलाएं। किसान इसके लिए जिला प्रशासन से समर्थन चाहते हैं और सिद्धांत रूप में उन्‍हें जमीन देने की मंजूरी भी दी गई है।
    नाबार्ड ने मदुरई जिले के अलंगनाल्‍लानूर के सहकारिता क्षेत्र की प्राथमिक कृषि सहयोग समितियां को इस तरह के क्‍लब बनाने की मंजूरी दी है। हाल में अलंगनाल्‍लानूर ब्‍लॉक में परीपेट्टी किसान क्‍लब और देवासेरी किसान क्‍लब के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलाया गया।
    नाबार्ड के एजीएम श्री शंकर नारायण की राय है कि किसान वैल्‍यू चैन की बारीकियों को पूरी तरह समझें। इससे उन्‍हें लाभ होगा और वे किसान क्‍लब को परिवर्तन एजेंट समझ लाभ की ओर बढ सकते हैं। उन्‍हें नवीनतम टेक्‍नॉलोजी के बारे में जानकारी मिल सकेगी, विशेषज्ञों की मदद ले सकेंगे और अतंत: अपने पेशे में निपुण हो जाएंगे।
    उन्‍होंने बताया कि नाबार्ड अपने किसान टेक्‍नॉलोजी ट्रांसफर फंड के जरिए किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, डेमोप्‍लॉट का विकास और कृषि ज्ञान के लिए किसानों की यात्राओं जैसे प्रयासों का पूरा खर्च वहन करेगा। उन्‍होंने कहा कि आने वाले दिनों में आम और अमरूद के पौधे लगाने के लिए गम्‍भीर प्रयास किए जाएंगे।           नाबार्ड किसान क्‍लब के लिए हर तीन साल पर दस हजार रूपये की राशि आबंटित करता है। तीन साल बाद किसान क्‍लब से जुडे लोगों को प्रोत्‍साहित किया जाता है कि वे वैसी छोटी-छोटी बचत करें जिनसे रोजाना के खर्च पूरा हो सकें और जरूरत पडने पर एक-दूसरे को ऋण भी दे सकें।
    किसान क्‍लब कार्यक्रम के तहत किसानों को तीन सालों के लिए वार्षिक रख-रखाव ग्रांट भी मिलता है। किसान तमिलनाडु में प्रशिक्षण के लिए कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं (पुड्डुकोटई, कोयम्‍बटूर, त्रिची और कांचीपूरम किसान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए चुने गए हैं।  किसानों को इस कार्यक्रम के तहत रायटर मार्केट लाइट लिमिटेड के जरिए स्‍थानीय भाषा में एसएमएस एलर्ट भी हा‍सिल होते हैं। जल प्रबंधन, डेयरी, ओर्गेनिक किसानी तथा सब्‍जी उगाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों की राय भी मिलती है।       क्‍लब की अवधारणा का लाभ उठाते हुए किसानों तथा क्‍लबों को नियमित बैठकें करनी चाहिए। प्रत्‍येक महीने बचत करनी चाहिए ताकि जरूरत पडने पर एक –दूसरे की मदद हो सके। इसके अलावा उन्‍हें ऋण अदायगी के उचित व्‍यवहारों का भी प्रचार करना चाहिए तथा अपने उत्‍पादों के मूल्‍यवर्धन पर ध्‍यान देना चाहिए ताकि वे स्‍वयं अपनी उत्‍पादक कंपनी खडी कर सकें। (PIB)


*लेखक पत्र सूचना कार्यालय मदुरई में सहायक निदेशक हैं
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वि.कासोटिया/गांधी/-निशांत 41     
पूरी सूची-12.02.2013

बुधवार, फ़रवरी 06, 2013

केंद्रीय विद्यालय संगठन का स्वर्ण जयंती समारोह


   प्रधानमंत्री का अभिभाषण                                                                                         06-फरवरी-2013 16:36 IST          
प्रधानमन्त्री डा मनमोहन सिंह ने किया उद्धघाटन सत्र  को सम्बोधित 

प्रधानमन्त्री ने इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा संगठन के नए लोगो का भी अनावरण किया  (फोटो:पीआईबी)

इस शुभ अवसर पर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा एम एम पलामू राजू ने प्रधानमन्त्री को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। इस यादगारी मौके पर इसी मन्त्रालय के राज्य मंत्री जीतीं प्रसाद और डा  थरूर भी मौजूद थे। (फोटो:पीआईबी)
डा. मनमोहन सिंह ने केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संगठन के शिक्षकों और छात्रों को शुभकामनाएं और बधाई दीं। 

केंद्रीय विद्यालय संगठन की 1963 में अपनी स्थापना के समय 20 रेजीमेंटल विद्यालयों के साथ व्याख्यात इस समय यह देश भर में फैले लगभग 1100 केंद्रीय विद्यालयों का प्रशासन संभालता है। यह लगभग 11 लाख बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है और इसके शिक्षकों सहित 46,000 से अधिक कर्मचारी हैं। यह संगठन केंद्र सरकार के स्थानांतरणीय केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के अपने दायित्व को विशिष्टता से साथ निभा रहा है। 50 वर्ष की इसकी यात्रा वास्तव में अत्याधिक सफल रही है। मैं उन सभी को बधाई देता हूं जिन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रियाओं में इतना अधिक योगदान करने में सक्षम बनाया है। 

केंद्रीय विद्यालय संगठन में जुड़े सभी लोगों के यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि देश के विभिन्न भागों में अतिरिक्त केंद्रीय विद्यालयों को खोलने की जोरदार मांग है और मौजूदा विद्यालयों में दाखिला की प्रक्रिया में भी अत्यधिक प्रतिस्पर्धा है। यह केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा स्थापित शिक्षा के उच्च मानक का भी संकेत है। मैं समझता हूं कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों ने लगातार बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है। यही नहीं, इन विद्यालयों ने अपने छात्रों की पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भाग लेने पर जोर देकर उनके व्यक्तित्व विकास की आवश्यकता के प्रति की सजगता दिखाई है। 

मुझे इस बात की खास खुशी है कि केंद्रीय विद्यालयों में छात्राओं का अनुपात 43 प्रतिशत है और संगठन के शिक्षकों में महिलाओं का बहुमत है। 

केंद्रीय विद्यालयों की एक बड़ी संख्या इस समय रक्षा और अर्ध-सैनिक संस्थानों के परिसरों में स्थित है। इससे रक्षा और अर्ध-सैनिक बलों के कर्मचारियों, जिनकी जोखिम भरी ड्यूटियां उन्हें अपने परिवारों के साथ अक्सर कम समय बिकाने का मौका देती हैं, केन्द्रीय विद्यालय बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता प्राप्त करते है। 

हमारी सरकार ने सदा इस बात को स्वीकारा है कि भारत एक आधुनिक, प्रगतिशील और समृद्ध देश के रूप में तभी उभर सकता है जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक हमारे नागरिकों की आसान पहुंच होगी। हम जानते हैं कि हमारा देश एक युवा देश है और एक शिक्षित एवं कुशल कार्यबल के होने पर ही हम जनांकिक लाभांश प्राप्त कर सकते हैं जो हमारी अर्थव्यवस्था को विस्तार करने और अधिक उत्पादक बनने में सहायक होगी। 

हमारी सरकार के 2004 में सत्ता में आने के समय से ही हमने शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। हमने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण स्तर पर निवेश बढ़ाया है। हमने शिक्षा के प्रति पहुंच का तेजी से विस्तार किया है। हमने शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए भी काम किया है ताकि शिक्षा के बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सके। हमने यह सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया है कि हमारे समाज के कमजोर वर्गों और देश के कम विकसित क्षेत्रों के छात्रों को भी शिक्षा संबंधी पर्याप्त अवसर प्राप्त हों। 

आज हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा की पहुंच लगभग सार्वभौमिक है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम सुनिश्चित करता है कि हमारे देश के प्रत्येक बच्चे को प्राथमिक शिक्षा के 8 वर्ष का अधिकार प्राप्त हो। मध्याह्न भोजन की योजना, जो हर रोज 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में गर्म भोजन उपलब्ध कराती है, ने बच्चों के स्कूलों में बने रहने में उल्लेखनीय सहायता की है। लेकिन शिक्षकों और शिक्षण का मानक उचित स्तर का नहीं है जिसके कारण परिणाम हमारी अपेक्षा से बहुत नीचे है। स्कूलों में प्राथमिक स्तर के बाद बच्चों का बीच में पढ़ाई छोड़ जाने वालों की संख्या अधिक बनी हुई है। निष्पक्षता से संबंधी कुछ बड़ी समस्याएं भी हल करना अभी शेष है। 

12वीं पंचवर्षीय योजना में इन चुनौतियों का समाधान करने में केन्द्रीय विद्यालय अन्य स्कूलों के लिए मानक और बेंचमार्क तय करने में बड़े पैमाने पर सहायक हो सकते हैं। यह केन्द्रीय विद्यालों के लिए 12वीं योजना में निर्धारित लक्ष्यों में से एक है। उन्हें अपने पड़ोस के विद्यालयों के साथ सर्वोत्तम युक्तियों को बांटने में रोल-मॉडल के रूप में कार्य करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन से आग्रह किया कि वह इन अपेक्षाओं को कारगर रूप में पूरा करने के उपायों का पता लगाए। 

मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने हमारे आसपास तेजी से बदलती हुई यर्थात स्थिति के साथ गति बनाये रखने के लिए कई नये कदम उठाये हैं इन में शिक्षा प्रदान करने, शिक्षकों और छात्रों के लिए विदेशों के साथ आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाने और विदेशी भाषाओं के शिक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग शामिल हैं। यह सभी सराहनीय कदम हैं जिनसे केन्द्रीय विद्यालयों को अपना स्तर सुधारने में सहायता मिलेगी। लेकिन केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करने में अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। मैं आशा करता हूं कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन, खासकर आधुनिक तकनीकों और प्रौद्योगिकी के प्रयोग में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करेगा। 

अंत में मैं केन्द्रीय विद्यालय संगठन परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। मुझे विश्वास है कि आप अपने विशिष्ट रिकार्ड को इस स्वर्ण जंयती समारोह के माध्यम से और बेहतर बनाने पर विचार करेंगे। (PIB)
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वि.कासोटिया/क्वात्रा/अर्जुन/मीना–455

रविवार, फ़रवरी 03, 2013

भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया

01-फरवरी-2013 15:23 IST
दो फ्रिगेट 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत        रक्षा पर विशेष लेख  
आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान *हामिद हुसैन
    भारतीय तटरक्षक 01 फरवरी, 2013 को अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी स्‍थापना के बाद से यह सेवा एक बहुआयामी और एक उत्‍साहपूर्ण बल के रूप में यह उभरी है जो बहु-भूमिका वाले पोतों और विमानों की तैनाती कर हर समय भारत के समुद्री क्षेत्रों की चौकसी करता है।
    भारतीय नौ-सेना के दो फ्रिगेट और सीमा शुल्‍क विभाग के 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत कर आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान हैं। गत वर्ष के दौरान एक प्रदूषण नियंत्रण पोत, 6 गश्ती पोत, 4 वायु कुशन पोत, 2 इंटरसेप्‍टर नौकाएं शामिल की गई हैं। इसके अतिरिक्‍त क्षेत्रीय मुख्‍यालय (एनई) की स्‍थापना तथा 8 सीजी स्‍टेशन का सक्रियण, सक्रियण/3 सीजी स्‍टेशनों की शुरूआत की योजना 2013 के प्रारंभ में की गई है।
    भारतीय तटरक्षक आज तीव्र विस्‍तार की राह पर है। इसमें आधुनिक स्‍तर के पोत, नौकाएं और विमान का निर्माण विभिन्‍न शिपयार्ड/ सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम में किया जा रहा है और भविष्‍य में तटरक्षक अकादमी की स्‍थापना की जाएगी। तटरक्षक के संगठनात्‍मक ढाँचे में 5 क्षेत्रीय मुख्‍यालय, 12 जिला मुख्‍यालय, 42 स्‍टेशन तथा सभी भारतीय तटों पर 15 एयर यूनिट कार्य कर रहे हैं।
    श्रम शक्ति की दृष्टि से इस सेवा ने सामान्‍य ड्यूटी में महिला अधिकारियों के लिए अल्‍प सेवा नियुक्ति की शुरूआत, मेधावी अधीनस्थ अधिकारियों को विभागीय पदोन्‍नति और विशेष नियुक्ति अभियान चलाकर अपने श्रम शक्ति में विस्‍तार किया है।
    बृहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और तट रक्षा पर सतत निगरानी के लिए औसतन 20 पोत और 8-10 विमान तैनात किए गए है। भारतीय तटरक्षक ने तटीय निगरानी नेटवर्क (सीएसएन) की भी स्‍थापना की है जिसमें तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और 46 सुदूर स्‍थलों पर इलेक्‍ट्रो ऑप्‍टीक सेंसर शामिल है। इन सेंसरों में 36 मुख्‍य क्षेत्र में, 6 लक्ष्‍यद्वीप समूह और 4 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लगाएं गए हैं।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा तट के आस-पास के गाँवों में नियमित समुदाय संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य मछली पकड़ने वाले समुदायों को मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उन्‍हें सतर्क रखना है। इसके अतिरिक्‍त गत वर्षों के दौरान भारतीय तट रक्षक ने 20 तटीय सुरक्षा अभ्‍यास और 21 तटीय सुरक्षा अभियान चलाया है।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा हर समय भारतीय खोज और बचाव क्षेत्रों में समुद्री जांच और बचाव किया जाता है। इस कठिन परिस्थिति में साहस दिखाते हुए पिछले वर्ष तटरक्षरक ने 204 लोगों की जान बचाई है। इस अवधि के दौरान भारतीय तटरक्षक द्वारा कुल 30 चिकित्‍सा बचाव किए गए।
    भारतीय तटरक्षक ने अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपनी पहचान स्‍थापित की है। सहयोग समझौता/ ज्ञापन के तहत संस्‍थागत यात्राएं नियमित की जाती हैं। 12वीं भारत-जापान तटरक्षक उच्‍च स्‍तरीय बैठक जापान के टोक्‍यो में जनवरी, 2013 में की गई। अक्‍तूबर, 2012 में नई दिल्‍ली में 8वां एशियाई तटरक्षक प्रमुखों का सम्‍मेलन आयोजित किया गया। यह सम्‍मेलन काफी महत्‍वपूर्ण था क्‍योंकि इसे पहली बार भारत में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्‍त, भारत-पाकिस्‍तान संयुक्‍त कार्य समूह बैठक का आयोजन पहली बार नई दिल्‍ली में जुलाई, 2012 में किया गया।
    भारतीय तटरक्षक लगातार अपना विस्‍तार कर रहा है और जिससे इसकी क्षमता में और विकास हो रहा है। सक्षम और पेशेवर अधिकारियों द्वारा आधुनिक पोतों और विमानों का संचालन किया जा रहा है जो देश सेवा और समुद्री सुरक्षा में कार्य कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते है। वर्ष 2013 के लिए भारतीय तटरक्षक का शीर्षक है 'समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित लक्ष्‍य'। यह शीर्षक इस सेवा की प्रतिबद्धता और संकल्‍प को प्रदर्शित करता है जो इसके आदर्श वाक्‍य 'वयम् रक्षाम:' में प्रतिबिम्‍बित है जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते है'। (PIB) (पसूका) 
*एपीआरओ (रक्षा) भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया 
मीणा/आनंद/लक्ष्‍मी - 33
पूरी सूची - 01.02.2013