मंगलवार, जून 21, 2022

स्वस्थ जीवन पर विशेष//योग द्वारा टाइप-2 मधुमेह पर कारगर नियंत्रण

 Posted On: 16th June 2017 at 8:07 PM

 योगमय जीवन पर विशेष लेख                        *योगाचार्य डॉ. आनंद बालयोगी भवनानी   

पी आई बी के सौजन्य से योग साधना पर विशेष: 21 जून 2022: (इर्दगिर्द डेस्क)::

योग का आमूल विज्ञान एक बेहतरीन जीवनशैली है, जिसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि उसके द्वारा तनाव से उत्‍पन्‍न विकारों और जीवनशैली से उत्‍पन्‍न होने वाले मधुमेह जैसे विकारों को प्रभावशाली तरीके से दुरूस्‍त किया जा सकता है। आधुनिक अनुसंधानों से पता लगा है कि योग द्वारा मनोवैज्ञानिक और शारीरिक लाभ प्राप्‍त होते है। योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है (इन्‍स और विन्‍सेंट, 2007)।

लेखक डा. आनंद बालयोगी 

बताया गया है कि योग आधारित जीवनशैली में थोड़े से बदलाव और तनाव कम करने के प्रयासों के जरिये हृदय रोग तथा मधुमेह के जोखिमों को 9 दिनों में ही कम किया जा सकता है (बिजलानी, 2005)। इसके अलावा 1980 और 2007 के बीच प्रकाशित होने वाले 32 आलेखों की समीक्षा से पता लगा है कि योग द्वारा वजन, रक्‍तचाप, शर्करा के स्‍तर और बढ़े हुये कोलेस्‍ट्रॉल को कम किया जा सकता है (यांग, 2007)।

अध्‍ययनों से पता लगा है कि मधुमेह के कारण शरीर की केन्‍द्रीय स्‍नायु तंत्र प्रणाली प्रभावित होती है। 6 सप्‍ताह की योग थेरेपी कार्यक्रम के जरिये मधुमेह के मरीजों में श्रवण प्रतिक्रिया समय में अभूतपूर्व कमी देखी गई है (मदनमोहन, 1984 : मदनमोहन, 2012)। यह भी प‍ता लगा है कि योग से स्‍नायु तंत्र में और मधुमेह के मरीजों के बायो-कैमिकल प्रोफाइल में सुधार होता है।

योगाभ्‍यास से मधुमेह के रखरखाव और उसकी रोकथाम में सहायता होती है तथा उच्‍च रक्‍तचाप और डिसलिपिडेमिया जैसी परिस्थितियों से बचाव होता है। लंबे समय तक योगाभ्‍यास करने से इन्‍सुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है और शरीर के वजन या कमर के घेरे तथा इन्‍सुलिन संवेदनशीलता के बीच का नकारात्‍मक संबंध घट जाता है (छाया, 2008)।  

योग का कोई साइफ इफेक्ट नहीं है। इसके कई संपार्श्विक लाभ हैं। यह इतना सुरक्षित और आसान है कि इसे बीमार, बुजुर्ग और दिव्यांग भी कर सकते हैं। सुरक्षित, साधारण और आर्थिक रूप से किफायती थेरेपी होने के चलते इसे मधुमेह रोगियों के लिए काफी सहायक माना गया है।

इन्स और विन्सेन्ट (2007) की एक व्यापक समीक्षा ने इससे कई जोखिम सूचकों में लाभदायक बदलाव पाए जैसे ग्लूकोस सहिष्णुता, इंसुलिन संवेदनशीलता, लिपिड प्रोफाइल, एन्थ्रोपोमेट्रिक विशेषताओं, रक्तचाप, ऑक्सीडेटिव तनाव,  कोग्यूलेशन प्रोफाइल, सिम्पेथेटिक एक्टिवेशन और पलमोनरी फंक्शन में इसे काफी फायदेमंद पाया गया। उन्होंने सुझाव दिया है कि योग व्यस्कों में टाइफ 2 डीएम के साथ जोखिम कर करता है। इसके अलावा हृदय संबंधी जटिलताओं की रोकथाम और प्रबंधन के लिए भी यह काफी फायदेमंद है।

इस तरह से योग टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस और इससे जुड़ी जटिलताओं की स्थिति में जोखिम कम करने में मदद कर सकता है

पुरानी बीमारियों को रोकने और उसे नियंत्रित करने में भी योग काफी मददगार साबित हो सकता है। जनसमूह के स्वास्थ्य में सुधार के लिए योग एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। योग में बीमारी को बढ़ने से रोकने की क्षमता है और यदि इसे जल्द शुरू किया जाए तो ये इलाज को भी प्रभावित करता है (भवनानी, 2013)।

डीएएम के प्रबंधन में उपयोग किए जाने वाले बुनियादी योग सिद्धांतों में शामिल हैं:

मनोवैज्ञानिक पुनर्स्थापन और यम-नियम, चुतर्भावना, प्रतिपक्ष भावानाम आदि दृष्टिकोणों के विकास।

काउंसलिंग, जाथी, आसन, क्रिया, प्रणायाम से तनाव प्रबंधन

सूर्य नमस्कार, आसन, क्रिया और प्रणायाम जैसी शारीरिक गतिविधि के माध्यम से ग्लूकोज को बेहतर बनाने में मदद करना

मधुमेह के लिए योग थेरेपीः

मधुमेह की रोकथाम और इसे नियंत्रित करने में योग एक महत्तवपूर्ण भूमिका निभाता है। योग का महत्त्व उन लोगों के लिए और महत्त्वपूर्ण हैं जो द्वितीय प्रकार या गैर इनसोलिन मधुमेह से पीड़ित है। यह एसे लोगो को अधिक प्रभावी ढंग से उपचार करने में मदद करता है। योग को अगर नियमित रुप से दिनचर्या में शामिल किया जाए तो इससे बीमारियों पर रोकथाम के साथ-साथ वजन कम करने में मदद मिलती है।

नियमित रुप से व्यायामः नियमित रूप से व्यायाम करने से अतिरिक्त ब्लड शुगर का उपयोग करने में मदद मिलता है। जितना संभव हो सके पैदल चलना चाहिएं या और योग थेरेपी के लिए तराकी भी एक बेहतर उपाय है।

खान-पान पर नियंत्रणः

नियमित रुप से कार्बोहाइड्रेट के साथ हल्का भोजन

रिफाइंड से बने खाद्य पदार्थों और जंक फूड से बचें

हरी सब्जी सलाद, करेला और नीम का सेवन करें

पानी की भरपूर मात्रा लें

सूर्यनमस्कारः तीन या छः बार सूर्य नमस्कार करने से शर्करा का स्तर कम हो जाता है। और इससे वजन को कम करने में भी मदद मिलती है।

योगा आसनः

कमर का आसनः

खड़े होकरः त्रिकोण आसन, अर्ध कटी चक्रासन

बैठकरः वक्रासन, अर्ध मत्सयेंद्र, भारतवाजा आसन, शशांग आसन

झुककरः जात्र परिवर्तन आसन

पेट के बल आसनः

बैठकरः उत्कट आसन, जानु सिरासा आसन, पश्चिमोत्तन आसन, नवा आसन, योग मुद्रा आसन, स्तम्बम आसन और मयूर आसन

झुककरः पवन मुक्त आसन, धनुर आसन, भुजंग आसन, शलभ आसन, नौका आसन

पीठ के बल लेट कर किए जाने वाले आसनः सर्वांग आसन, जानो सिरसा इन सर्वांग आसन, कर्णपीडी आसन, और हाला आसन

प्रणायामः

एडम प्रणायाम और एएए ध्वनि के साथ विभागा और प्रणव प्रणायाम।

भाषत्रिका प्रणायाम रक्त शर्करा को बेहतर करने में मदद करता है।

तानाव में कमी के लिए सावित्री प्रणायाम, चन्द्र अनुलोम प्रणायाम, नाडी शुद्धि प्रणायाम।

मुद्रा और बंधनः

विपारिता कारिणी और महामुद्रा।

+

    उद्यियना, मूल और जालंधरा बंध।

आसानः शैव आसन, मकरा आसान, काया क्रिया और योगनिद्रा

ध्यानः ओम जाप, अजाप जाप, प्राण दर्शन और प्रणव ध्यान। (PIB) 

***

लेखक अंतर्राष्ट्रीय योग शिक्षा और अनुसंधान केन्द्र, पुदुचेरी के अध्यक्ष हैं।

यह लेखक के निजी विचार हैं।  

 वीके/पीवी/एपी/केजे/सीएल/जीआरएस – 98

शुक्रवार, अप्रैल 29, 2022

हम ऐसे इंसान बनेंगे कब किस दिन?

क्या रहस्य है हिमांशु कुमार जी के चेहरे की शांति और चमक का 


लुधियाना: 29 अप्रैल 2022: (रेक्टर कथूरिया//इर्दगिर्द डेस्क)::

कुछ बरस पूर्व हिमांशु कुमार जी लुधियाना में थे। किसी पत्रकार सम्मेलन के संबंध में आए थे। पत्रकारों के हर सवाल का जवाब उन्होंने बहुत ही शांति से दिया था। हर पहलू को अपने नज़रिए से बहुत ही बारीकी से रखा था। यह मेरी खुशकिस्मती थी कि उनके पास बैठने और उनसे बातें करने के कुछ पल मुझे अन्य लोगों से ज़्यादा मिल गए थे क्यूंकि मैं निश्चित समय से कुछ पहले ही वहां पहुँच गया था। उनके पास बैठ कर एक स्कून का अहसास होता। उनका चेहरा और उस पर असीम शांति का प्रभाव उनकी वाणी और बातों से ज़्यादा बोलता था। मौन रह कर भी वे मुस्कराते हुए बहुत कुछ ऐसा कह जाते जिन्हें शब्दों में बताना मुश्किल सा है। उनके पास बैठ कर प्रकृति के पास बैठने जैसा अहसास होता। उनके सामीप्य में एक निडरता और निर्भयता का अहसास होता। एक गहन शांति सी मिलती। उनके चेहरे पर भी एक खास चमक थी और आँखों में भी। आज उनकी एक पोस्ट देखी तो कुछ कुछ समझ में आया कि यह शांति और चमक कहां से आ रही थी। --रेक्टर कथूरिया 


हिमांशु कुमार जी अपने लाईफ स्टाईल की जानकारी देते हुए बताते हैं:

जब हम आदिवासियों के पक्ष में आवाज़ उठाते हैं, तो बहुत से खाते पीते मौज की ज़िन्दगी जीने वाले सवर्ण हमसे कहते हैं कि तुम लोग विदेशी एजेंट हो, डालर से चंदा लेते हो, हवाई जहाज से घूमते हो सरकार के बारे में झूठा प्रचार करते हो, और आदिवासियों का विकास रोकते हो, तुम लोग विकास विरोधी हो आदि आदि। 

तो कुछ बातें साफ़ साफ़ बता दूं, मेरा कोई एनजीओ नहीं है, मैं किसी भी संगठन का सदस्य नहीं हूँ, मैं डालर, पाऊंड, रूबल या रूपये में किसी से चंदा नहीं लेता,मैं अनुवाद का काम करता हूँ, तथा लेख लिखता हूँ और अपना परिवार का काम चलाता हूँ। 

पहले छत्तीसगढ़ में संस्था के आश्रम में रहता था। वहाँ से निकलने के बाद दिल्ली में रहा लेकिन दिल्ली में ज्यादा खर्च होता था इसलिए अब हिमाचल के एक गांव में रहता हूँ. ताकि कम खर्च में गुज़ारा हो जाए। 

मेरी दो बेटियाँ हैं दोनों घर पर पढ़ती हैं उनका स्कूल कालेज का कोई खर्चा नहीं है। हम सभी शाकाहारी हैं सस्ता गांव का चावल और सब्जियां खाते हैं, एसी कूलर की ज़रूरत नहीं है। 

मेरे नाम से पूरी दुनिया में कोई ज़मीन नहीं है, मेरा कोई मकान नहीं है, ना ही मैंने किसी दुसरे के नाम से कोई ज़मीन मकान कभी खरीदा है क्योंकि कभी मेरे पास इतना पैसा रहा ही नहीं। मैं हमेशा किराए के मकान में रहा हूँ।

मैं किसी का अनुयायी नहीं हूँ ना गांधी का ना मार्क्स का ना अम्बेडकर या किसी और का,मैं इन सभी के अच्छे विचारों से प्रेरणा ज़रूर लेता हूँ। मैं एक मुक्त इंसान हूँ, मेरे दोस्त न्याय की लड़ाई लड़ने वाले दलित आदिवासी, अल्पसंख्यक हैं। 

मैं अपने जन्म से मिली जाति धर्म सम्प्रदाय और राष्ट्र के नकली गर्व को छोड़ चूका हूँ, मैं अपने खुद के धर्म की तलाश में हूँ अभी तक मुझे यही समझ में आया है कि मैं सत्ता के दमन का विरोध और पीड़ित की मदद करूं यही मेरे लिए सबसे अच्छा धर्म है।  

सभी सरकारें मुझे नापसंद करती रही हैं कांग्रेस की भी और भाजपा की भी। मेरे लिखने और पीड़ितों की मदद करने के कारण मुझे कभी भी जेल में डाला जा सकता है या मेरी हत्या करी जा सकती है। 

मुझे अब तक के जीवन पर पूरा संतोष है। मैं सदैव उत्साह और खुशी से भरा रहता हूँ मेरे मन पर कोई बोझ नहीं है। मुझे शान्ति प्राप्त करने के लिए किसी गुरु या ईश्वर की कोई ज़रूरत महसूस नहीं होती। 

मेरे लिए ये दुनिया बहुत आश्चर्यजनक जगह है मैं रोज़ इसमें एक उत्सुक बच्चे की तरह जागता हूँ और दिन भर उत्साह से भरा रहता हूँ। मेरे ज्यादातर दोस्त मेरी ही तरह के लोग हैं मैं उनकी संगत में बहुत आनन्द से जी रहा हूँ। 

बुधवार, फ़रवरी 16, 2022

बहुत दम है इन जांबाज़ लेकिन वफादार कुत्तों में

अमेरिकी सेना: कदम से कदम मिला कर चलते चार पैरों वाले फाईटर


इंटरनेट वर्ल्ड
: 16 फरवरी 2022: (इर्दगिर्द के लिए कार्तिका सिंह की खोज)::

बहुत सी हिंदी फिल्मों में जानवरों और इंसानों का प्रेम और हमदर्दी शिद्द्त से दिखाया गया है। किसी में हाथी से दोस्ती,  किसी में बंदर से, किसी में कुत्ते से और कहीं कहीं और मिसालें भी हैं। ऐसी बहुत सी फ़िल्में हैं जिनमें जानवर अपनी सीमाओं से विकास करते करते बल्कि उनसे भी कहीं पार जा कर इंसान की सहायता करते हैं। उनके लिए बाकायदा ज़िंदगी  के संघर्ष में भाग लेते हैं। इस तरह की मिसालें केवल भारत में ही नहीं विदेशों में भी हैं। आम लोगों के साथ साथ सेना में भी कुत्तों पर विशेष ध्यान दिया जाता है और उन्हें बाकायदा महंगी ट्रेनिंग दी जाती है। 

अमेरिकी सेना में जो ट्रेनिंग प्रोग्राम चलते हैं उनमें इस तरह एकमात्र नस्ल बेल्जियम मालिनोइस भी है जिसे उनकी उच्च ऊर्जा, मजबूत खोजी, प्रशिक्षण क्षमता, चपलता, गति, ड्राइव, कार्य नैतिकता, वफादारी और जब आवश्यक हो, उग्रवादियों के कारण सेना के लिए उसके दुश्मनों के साथ सख्त से सख्त जंग भी लड़नी। इसे इस दिशा में आदर्श माना जाता है। वे जर्मन शेफर्ड से मिलते जुलते हैं, लेकिन वास्तव में उनसे भी कहीं अधिक कॉम्पैक्ट हैं।

सूंघना, पहचान लेना, भाग कर पकड़ लेना जैसी इनकी बहुत सी खूबियां हैं। आग हो या पानी बस इसे आदेश की इंतज़ार रहती है। सड़क का सफर हो जा ट्रेन का या हवाज़ी जहाज़ का इसे कभी डर नहीं लगता। इसे सेना की महंगी ट्रेनिंग से पूरी तरह तैयार किया जाता है। इसमें हर आपातकाल से निपटने की पूरी तरह से क्षमता है। यह तस्वीरें और जानकारी अमेरिक रक्षा विभाग से साभार ली गई है। 

अमेरिकी सेना में कदम से कदम मिला कर चलते चार पैरों  वाले फाईटर