बुधवार, जून 06, 2018

साइबर अपराधों की शिकायतें दर्ज करने के लिए नई पहल

प्रविष्टि तिथि: 06 JUN 2018 8:07PM by PIB Delhi महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
ऑनलाइन केन्द्रीय सूचना प्रणाली शीघ्र ही स्थापित की जाएगी
श्रीमती मेनका संजय गांधी ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सभी मंत्रालयों को पत्र लिखा
 विशेष प्रकोष्ठ बनाने के लिए कहा 
नई दिल्ली: 6 जून 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध विशेषकर ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री, दुष्कर्म संबंधी वीडियो सामग्री और अन्य आपत्तिजनक सामग्री को हटाने से जुड़े मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी की अध्यक्षता में आज विभिन्न हितधारकों के साथ अपनी तरह की एक विशिष्ट गोलमेज बैठक आयोजित की गई। महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ हिंसा को लगातार जारी रखने के लिए डिजिटल माध्यम का व्यापक इस्तेमाल निरंतर बढ़ता जा रहा है।
उपर्युक्त बैठक में विभिन्न सरकारी हितधारकों, उद्योग संगठनों एवं भारतीय इंटरनेट सेवा प्रदाता संघ के साथ-साथ सोशल मीडिया एजेंसियों ने भी भाग लियाओ)। इस दौरान डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर भारतीय डेटा सुरक्षा परिषद द्वारा विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सिविल सोसायटी का भी प्रतिनिधित्व रहा।
संपन्न बैठक में निर्णय यह लिया गया कि अगले 3 महीनों में निम्नलिखित कार्य किए जायेंगे:
साइबर अपराध के अंतहीन प्रकृति से महिलाओं और बच्चों को पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाए।
किसी भी समय कहीं से भी साइबर अपराध की शिकायतों को दर्ज करने और कार्यान्वितकरने के लिए एक ऑनलाइन केंद्रीय सूचना तंत्र का विकास किया जाए।
ऑनलाइन बीभत्स/अपमानजनक सामग्री को वास्तविक समयसीमा में हटाने/अवरुद्ध करने के लिए एक तंत्र बनाया जाए।
एकल सुविधा केन्द्र
193 एकल सुविधा केन्द्र (ओएससी), जिसे लोकप्रिय रूप से सखी केंद्र के नाम से जाना जाता है, पूरे देश में कार्य कर रहा है। आज नई दिल्ली में डब्ल्यूसीडी मंत्रालय की उपलब्धियों पर मीडिया के साथ बातचीत करते हुए, डब्ल्यूसीडी मंत्री ने कहा कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए पूरे देश में 193 सखी केंद्र स्थापित किए गए हैं। साथ ही मंत्री ने कहा कि अगले वर्ष तक एकल सुविधा केन्द्रों (ओएससी) की संख्या बढ़ाकर 600 कर दिए जाने का लक्ष्य है।इन केन्द्रों के जरिए 1.3 लाख महिलाओं को सहायता प्रदान किया गया है।
मंत्रालयों में महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर विशेष प्रभाग
मंत्री ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय (एमएचए) ने हाल ही में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों के समाधान के लिए विशेष प्रभाग बनाया है। डब्ल्यूसीडी मंत्री ने सभी मंत्रालयों को इस तरह के प्रभाग बनाने के लिए पत्र लिखा है। मंत्री ने आगे कहा कि एमएचए सेक्स अपराधियों के राष्ट्रीय रिपोजिटरी (एनआरएसओ) का गठन कर रहा है। यौन अपराधियों की प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी सभी राज्य / केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा की जाएगी।
निर्भया कोष  
निर्भया कोष के तहत मूल्यांकन की गई परियोजनाओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रधान मंत्री को धन्यवाद दिया और कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा निर्भया कोष के तहत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है।
एनआरआई वैवाहिक विवाद
एनआरआई विवाह से संबंधित विवादों पर बोलते हुए, मंत्री ने कहा कि डब्ल्यूसीडी मंत्रालय रजिस्ट्रार को यह आदेश जारी करने की प्रक्रिया में है कि एनआरआई विवाह अगर 48 घंटे के अंदर पंजीकृत नहीं होता है तो उन्हें पासपोर्ट/वीजा जारी नहीं किया जाए। रजिस्ट्रार ऐसे एनआरआई विवाहों का विवरण डब्लूसीडी मंत्रालय को भेजेंगे ताकि केंद्रीय डेटाबेस बनाया जा सके। मंत्रालय ने हाल ही में ऐसे मामलों में 6 लुक आउट सर्कुलर जारी किए हैं तथा 5 मामलों में  विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट रद्द भी कर दिए गए हैं।
महिलाओं से संबंधित मामलों के लिए उन्नत डीएनए प्रयोगशाला
डब्ल्यूसीडी मंत्री ने 1 जून 2018 को सखी सुरक्षा उन्नत डीएनए प्रयोगशाला की नींव रखी ताकि केस-बैकलॉग को कम करने तथा महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाने के लिए यौन हमले के मामलों को तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटाया जा सके।इसके लिए निर्भया कोष के तहत 99.76 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। अगले 3 महीनों में मुंबई, चेन्नई, गुवाहाटी, पुणे और भोपाल में पांच और उन्नत फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।
बलात्कार के मामलों के लिए विशेष फोरेंसिक किट: यौन उत्पीड़न के मामलों में अपराधियों को पकड़ने में फोरेंसिक के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि बलात्कार के लिए विशेष फोरेंसिक किट जुलाई के महीने तक सभी पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों को वितरित कर दी जाएगी। इन किटों में सबूत इकट्ठा करने के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ एकत्र किए जाने वाले साक्ष्य/नमूने की पूरी सूची होगी। फोरेंसिक प्रयोगशालाओं को भेजने से पहले किट को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा।
महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति
मंत्रालय ने सभी हितधारकों से प्राप्त 15000 से अधिक सुझावों / टिप्पणियों पर विचार करने के बाद महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति, 2017 का मसौदा तैयार किया है। एक संवाददाता द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि नीति कैबिनेट को सौंपस दी गई है।
मौत की सजा संबंधित अध्यादेश
बच्चों के साथ बलात्कार के अपराधियों को सख्त सजा देने के लिए, सरकार ने आईपीसी और सीआरपीसी में संशोधन कर मृत्युदंड देने के एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 12 वर्ष की उम्र तक की लड़कियों के बलात्कारियों को मौत की सजा के लिए एक नया प्रावधान जोड़ा गया था।  
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी)
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना जनवरी 2015 में सेक्स चयन को रोकने, लड़कियों के संरक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
अप्रैल-मार्च, 2015-16 और 2016-17 के बीच की अवधि में 161 जिलों के लिए एमओएच एंड एफडब्ल्यू के नवीनतम एचएमआईएस डेटा के अनुसार उत्साहजनक रुझान दिखाई दिए हैं;
104 बीबीबीपी जिलों में एसआरबी की प्रवृत्ति में सुधार दिखाई दिया है।  
एंटी-नाटल केयर पंजीकरण के मामलों में 119 जिलों में पहले तिमाही में पंजीकरण में तेजी आई है।
146 जिलों में संस्थागत डिलीवरी में सुधार दिखाई दिया है।
एसएचई बॉक्स (SHe-BOX)
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों के लिए पहली इस तरह की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और शिकायत प्रबंधन प्रणाली 2017 में शुरू की गई थी। पोर्टल पर लगभग 191 शिकायतें दर्ज की गई और मंत्रालय ने उन पर कार्रवाई की।
प्रसूति लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 
प्रसूति लाभ (संशोधन) बिल, 2016 27 मार्च, 2017 को एक अधिनियम बन गया।इस अधिनियम के तहत मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह तक कर दिया गया जो इस तरह का दुनिया में तीसरा देश बन गया है।कमीशनिंग और गोद लेने वाली मांएं भी 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की हकदार हैं, बशर्ते बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो। 50 या अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों में अनिवार्य क्रैच सुविधा भी देने की भी प्रावधान इस अधिनियम के माध्यम से किया गया है।   
निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पिछले वर्ष पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (ईडब्ल्यूआर) का प्रशिक्षण का कार्य किया है ताकि वे अपने गांवों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकें और जमीनी परिवर्तन लाकर विकास की दिशा में अग्रसर हो सकें।इसके तहत अब तक 18,578 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है और इस वित्त वर्ष में 20,000 निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को और प्रशिक्षित किया जाएगा।
नई टैक्सी नीति दिशानिर्देश
महिलाओं को बेहतर सुरक्षा देने के उद्देश्य से 2017 में नई टैक्सी नीति दिशानिर्देश लाया गया था। इसके तहत सभी टैक्सियों में जीपीएस पैनिक डिवाइस, बच्चों के लिए-लॉकिंग सिस्टम को अक्षम करना, वाहनचालक के फोटो और पंजीकरण संख्या के साथ चालक की पहचान को प्रदर्शित, सीट सांझा करना महिला यात्रियों की इच्छा के अधीन होना आदि अनिवार्य किया गया है।   
181 महिला हेल्पलाइन
यह एक देशव्यापी टोल फ्री नंबर है जो हिंसा से प्रभावित महिलाओं को 24 घंटे की आपातकालीन और नन-आपातकालीन  सुविधा प्रदान करता है। इसके माध्यम से अब तक 16.5 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता दी गई है।
पुलिस बल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय संवेदनशील मामलों में समग्र पुलिस प्रतिक्रिया में सुधार लाने और पुलिस बल में महिलाओं को आगे लाने के लिए एमएचए (गृह मंत्रालय) के साथ काम कर रहा है।
पुलिस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 33 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए सभी राज्य सरकारों को सलाह दिया गया है।33 प्रतिशत आरक्षण को 10 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों तक कर दिया गया है
विधवाओं के लिए घर
केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित 1000 विधवाओं की क्षमता वाले एक विधवा घर  वृंदावन (यूपी) में शुरू किया गया है, जिसमें हर तक सुविधा दी जा रही है।
जेलों में महिलाएं
जेल में महिलाओं और बच्चों की हालत के अध्ययन के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इस संबंध में गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट को सिफारिशें भेज दी जाएंगी।
पोशन (POSHAN) अभियान
इसे 8 मार्च 2018 को प्रधान मंत्री द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बच्चों (0-6 वर्ष), किशोरावस्था वाली लड़कियों और गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण संबंधी स्थिति में सुधार हासिल करना है।
पॉक्सो ई-बॉक्स
पॉक्सो ई-बॉक्स (http://ncpcr.gov.in/) अगस्त 2016 में शुरू किया गया था और बच्चों या किसी वयस्क के लिए बाल यौन दुर्व्यवहार या उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के लिए एक आसान और उपयोगी सुविधा है।अब तक पोर्टल पर 1100 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
बच्चों के लिए हेल्पलाइन (1098)
यह मुश्किल में फंसे बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी आपातकालीन हेल्पलाइन है। यह वर्तमान में पूरे देश में 435 स्थानों पर परिचालित है। इस पर 2014 से हर वर्ष 1.8 करोड़ कॉल प्राप्त होते हैं।
ट्रैकचिल्ड और खोयापाया पोर्टल (Trackchild and KhoyaPaaya)
इन दोनों पोर्टल का उद्देश्य निम्नलिखित है:
लापता बच्चों की समय पर निगरानी सुनिश्चित करना
लापता बच्चों के लिए त्वरित प्रत्यावर्तन और पुनर्वास सुनिश्चित करना
बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों की निगरानी सुनिश्चित करना
प्रक्रिया में शामिल संगठनों के लिए एक ढांचा स्थापित करना
173441 बच्चों को इस प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया गया है।
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वीके/एएम/आरआरएस/पीकेपी/डीके – 8844  

रविवार, मई 20, 2018

FIB की नई पहल:पंजाब में नशे के जहर को रोकने की तैयारी

एक एक चेहरा किया जायेगा बेनकाब 
लुधियाना:19 मई 2018: (इर्द गिर्द टीम)::  
F.I.B. Media Inteligence Service  फिर तैयार है।  इस बार एक  नै जंग का ऐलान। पंजाब को नशे के ज़हर से अब हर तरह मुक्त किया जायेगा। इस मकसद के लिए इस संगठन ने अपनी कमर कस ली है। संगठन के प्रमुख डाक्टर भारत ने बताया कि हम किसी दबाव में आने वाले भी नहीं और न ही किसी लालच के जाल में। हमें अपने नेटवर्क से जो भी सूचना मिलेगी हम उस का पता लगाएंगे। हम न तो अदालत है और न ही पुलिस लेकिन नशे का ज़हर फ़ैलाने वाले हर चेहरे को हम बेनकाब अवश्य करेंगे। हमारे संगठन से हमदर्दी रखने वाले लोग उस मामले को मीडिया तक भी ले जायेंगे, अदालत तक भी और पुलिस तक भी। हम अपना काम करेंगे और हमारे सहयोगी अपना काम करेंगे। 
डाक्टर भारत ने कहा कि जबतक समाज के अग्रणीय व सामाजिक संगठन खुलकर पुलिस प्रशासन का सहयोग नहीं करते रब तक समाज में फ़ैल चुके नशे रूपी कुष्ट रोग के इस कैंसर को नहीं ख़त्म किया जा सकता।  यह जंग अकेले पुलिस के बस की बात नहीं जो समाज में फैली इन बुराइयों को ख़त्म  कर सके।इसके साथ बहुत सी अन्य बुराईयां भी जुडी हुई हैं।
      इस मीटिंग में डाक्टर भारत ने कहा कि वही देश समाज तरक्की कर आगे बढ़ कर शक्तिशाली हो सकता है जिस देश के नागरिक अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए  असामाजिक तत्वों और बुराइयों के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होकर मुकाबला कर जड़ से उखाड फेकने में सक्षम हों।  यह जाहिर  हो चूका है की कुछ तथाकथित राजनीतिक और कुछ भ्र्ष्ट नौकरशाहियों की वजह से हर तरह के अपराध जहाँ बढ़ते जा रहे हैं वहीँ कैंसर कोढ़ रूपी नशीले वस्तुवें  चिट्टा , ब्राउनशुगर , सिन्थेटिक , हैरोइन जैसी घातक ड्रग्स ने समाज को विकृति और खोखला कर दिया है। 
       इन्ही सब बातों को लेकर  राष्ट्र हित में काम करने वाला यह जानामाना गुप्तचर मीडिया संगठन  अब पूरी तरह सक्रिय है। (F.I.B. फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो) के मुख्य कार्यालय, जो लुधियाना के सिविल लाइन्स क्षेत्र में है के कार्यालय में  पंजाब मार्केटिंग मुलाजिम जत्थेबंदी के अकाउंटेंट सुपरिंटेंडेंट सुरजीत सिंह जोहल ( जालंधर ) पंजाब एलेक्ट्रसिटी बोर्ड़ रोपड़ से जूनियर इंजीनियर दर्शन सिंह , पंजाब  सरकार सेवा  के पूर्व अधिकारी  हरजीत सिंह मरिंडा रोपड़ ,   आनंदपुर साहिब से पंजाब बिजली बोर्ड के रि. अधिकारी दर्शन सिंह  व बलजिंदर सिंह संधू  ने ब्यूरो के डायरेक्टर = अध्यक्ष  डॉ.  भारत से विशेष मुलाक़ात  कर  जहाँ देश समाज में ब्याप्त बुराइयों को रोकने और संगठन द्वारा राष्ट्र हित में किये जा रहे कार्यों को सहयोग करने का बचनबद्ध हुए।  अलग अलग इलाकों के लोगों से अलग अलग बैठकों का यह सिलसिला अभी जारी है। 

शनिवार, मार्च 24, 2018

खुदकुशियों के मौसम में भी ज़िंदगी के गीत गुंजा रहे है PAU के किसान मेले

आंवला कैंडी से ले कर सोलर कूकर तक सफलता की गौरवगाथा 
लुधियाना: 24 मार्च 2018: (कार्तिका सिंह//इर्द गिर्द)::
हालात कुछ भी हो सकते हैं।  अच्छे भी बुरे भी। हम सभी की ज़िंदगी हमें बहुत से कड़वे अनुभव भी करवाती है जो हमें हर बार कोई न कोई नई सीख दे कर जाते हैं। यह कडुवाहट उस कड़वी दवा की तरह होती है जो हमारी बीमारी को ठीक कर के एक नयी ज़िंदगी देती है। संघर्ष की इस बेचैनी के बाद जो  स्कून मिलता है उसके आनंद की बराबरी जल्दी किये सम्भव ही नहीं होती। 
गुरवंत सिंह ने भी ऐसे दिन देखे। राजनीतिक सोच वामपंथी रही।  सीपीआई से जुड़े हुए भी हैं। इस सब के बावजूद विचारों में कभी कटड़ता नहीं आने दी। अन्ना हज़ारे के ग्रुप से संदेश आये तो उन को भी सहयोग दिया और अगर मेधा पाटेकर के साथियों ने कुछ कहा तो उनका भी साथ दिया। मकसद था बदलाव-किसी भी बहाने--किसी भी तरह। 
बदलाव का यह प्रयास केवल सियासत के मामले में नहीं था। उन्होंने व्यक्तिगत ज़िंदगी में भी हर पल स्वस्थ बदलाव के लिए निरंतर साधना की। खुद फैक्ट्री का मालिक होते हुए भी ज़रूरत पड़ने पर मज़दूरों की तरह काम किया। खेती विरासत मिशन की तरफ झुकाव हुआ तो उनका भी सक्रिय हो कर साथ दिया। 
समाज सेवा की तरफ लगातार बढ़ते रहे इस झुकाव ने काम-काज चौपट कर दिया। भाई की मौत ने उन्हें बहुत गहरा सदमा दिया। निराशा के इस गहन अँधेरे में एक बार फिर हिम्मत का हाथ पकड़ा।  हिम्मत ने रास्ता दिखाया। इस मामले में एक बार फिर पत्नी से भी साथ मिला और बेटियों से भी। पीएयू की ट्रेनिंग ने नया उत्साह और नई ऊर्जा दी। 
सोलर ऊर्जा की तरफ भी प्रयास किये जो कामयाब रहे। ज़िंदगी जो जो रंग दिखाती रही--गुरवंत सिंह उन्हें ध्यान से देखते भी रहे स्वीकार भी करते रहे। फिर धीरे धीरे उभरने लगा एक नया रंग। रात्रि के गहन अँधेरे के बाद उषा की लालिमा दस्तक देने लगी। 
गुरवंत सिंह की ज़िंदगी में एक नई ज़िंदगी की सुबह आने लगी। धोखे-फरेब और की विश्वासघात  की चोटों के बाद मिली संघर्ष से मिली सफलता की चमत्कारी मरहम। इस मरहम ने अपनों से मिली चोटों से लगे ज़ख्मों का दर्द दूर किया। एक नई राहत दी। नया हौंसला दिया। जिंदगी ने एक बार फिर सफलता की रफ्तार पकड़ ली। आज फिर गुरवंत सिंह सफलता की नई शिखरें छूने के लिए तैयार हैं। किसान मेले में उनसे और उनके परिवार से हुई भेंट यादगारी रही। उनके स्टाल पर आंवला कैंडी से ले कर आंवला शर्बत और सोलर कुकर तक बहुत कुछ था जो किसान मेले में आये लोगों को आकर्षित कर रहा था। गर्मी की धुप और किसान मेले के रास्तों से उड़ती धूल ने सारे परिवार के चेहरों का रंग कुछ सांवला कर दिया था लेकिन इस के बावजूद संघर्ष से मिली सफलता की चमक अपना रंग दिखा रही थी। जिम्मेदारियों का बोझ वरिष्ठता की गंभीरता भी दिखा रहा था। अपने पांवों की मजबूत होती स्वतन्त्रता की ख़ुशी भी सभी के चेहरों पर नजर आ रही थी। उनसे हुई बातचीत आप देख सकते इस पोस्ट के साथ दी गई वीडियो में। उन्हें देख कर याद आ रही हैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की पंक्तियाँ:
कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। 
किसान मेले लगते रहें। खुदकुशियों के मौसम में भी ज़िंदगी के गीत गूंजते रहें। निराशा के गहरे अंधेरों में भी संघर्ष का सूर्य चमकता रहे। ऐसी बहुत सी उमीदें हैं जो गुरवंत सिंह जैसे परिवारों को देख कर पूरी होने का विश्वास होने लगता है। सपनों को साकार करने का यह काफिला बढ़ता रहे। इसी कामना के साथ। 
                                                                                             -कार्तिका सिंह

शनिवार, जनवरी 07, 2017

प्रवासी भारतीयों ने एक लंबा सफर तय किया है

Posted On: 07th January 2017 at 5:35 PM by PIB
Special Service and Features                                      * प्रियदर्शी दत्ता 
कर्नाटक के बैंगलुरू में 7 से 9 जनवरी 2017 तक  विशेष आयोजन 
प्रियदर्शी दत्ता 
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के 15 वें संस्करण का कर्नाटक के बैंगलुरू में 7 से 9 जनवरी 2017 तक  विशेष आयोजन किया जाएगा। प्रथम वार्षिक सम्मेलन का आयोजन 9 से 11 जनवरी 2003 को किया गया था और अगस्‍त 2000 में गठित एक उच्‍च स्‍तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर इसे 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस अथवा ओवरसीज इंडियन के रूप में अपनाया गया।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अत्‍यंत उत्‍सुकता के साथ प्रवासी भारतीयों के मुद्दे में दिलचस्पी रखते थे। पोखरण द्वितीय के बाद जब भारत प्रतिबंधों से जूझ रहा था ऐसे में 1998 में उभरते हुए भारत के प्रति अपने संबंधों में मजबूत विश्वास दिखाया। उदारीकरण के वातावरण के बाद भारतीय मूल के समुदाय अपने देश के साथ जुड़ने को तैयार थे। भारत के एक सूचना प्रौद्योगिकी क्षमता केन्‍द्र तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और परमाणु शक्ति के रूप में उभरने से प्रवासी भारतीयों में अत्‍यधिक आत्‍मविश्‍वास जगा दिया था। यह खेल के मैदान से व्यापार सम्मेलनों और अंतरराष्ट्रीय बैठकों जैसे विभिन्‍न स्‍थलों पर दिखाई भी दिया।  
प्रवासी भारतीयों की चिंताएं भारतीय नेतृत्व के मस्‍तिष्‍क में लंबे समय से थीं। ब्रिटेन  में हाऊस ऑफ कॉमन्‍स पर 1841 की शुरूआत में जितना शीघ्र हो सके मॉरीशस में भारतीय अनुबंधित श्रमिकों की दयनीय हालत की जांच के लिए दबाब डाला गया था। यह ब्रिटिश साम्राज्य में गुलामी उन्मूलन (1833) के बाद अनुबंधित व्‍यवस्‍था की शुरुआत के कुछ वर्ष के भीतर हुआ था। इसी तरह से 1894 में कांग्रेस के मद्रास सत्र में दक्षिण अफ्रीकी उपनिवेशों में भारतीयों के मताधिकार से वंचित करने के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया था। कांग्रेस  ने पूना (1895) कोलकाता (1896) मद्रास (1898) लाहौर (1900) कोलकाता (1901) और अहमदाबाद (1902) सत्रों में भी इसी तरह के प्रस्तावों को अपनाया। उन दिनों में प्रवासी भारतीयों से अभिप्राय अधिकांश दक्षिण और पूर्वी अफ्रीका में भारतीयों से संबंधित था। इन्‍होंने स्थानीय ब्रिटिश सरकार द्वारा उनके अधिकारों के अतिक्रमण के खिलाफ कई संघर्ष आरंभ किए थे। गांधी-स्मट्स समझौता 1914 उनके लिए एक बड़ी जीत का द्योतक है।

दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बर्मा, सिंगापुर, मलेशिया, थाइलैंड इत्यादि में प्रवासी भारतीय काफी संख्या में थे। इनमें से कइ 1940 के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज में स्वयंसेवक रहे और साथ ही फंडिंग का भी इंतजाम किया। मलेशिया में जन्मी तमिल मूल की युवा लड़कियों की कहानियां भी है जिन्होंने बंदूक उठाकर कंधे से कंधा मिलाते हुए उस भारत की आजादी की लड़ाई करने का फैसला किया जिसे उन्होंने कभी देखा भी नहीं था।
प्रवासी भारतीय दिवस से महात्मा गांधी के 9 जनवरी 2015 को भारत आगमन की यादें भी ताजा होती हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के अधिकारों के लिए 21 साल तक लड़ाइयां लड़ी। उनके अहिंसक प्रतिरोध का रूप, जिसे उन्होंने सत्याग्रह नाम दिया, उसे लागू तो भारत में किया लेकिन उसका विकास दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। गांधी के समय के औपनिवेशिक विश्व में प्रवासी भारतीयों की स्थिति आज की स्थिति से बेहद अलग थी। वो ऐसे दिन थे जब विदेश जाना ये विदेश में बसने को प्रतिष्ठित नहीं माना जाता था। विदेश जाने वाले ज्यादातर भारतीय फैक्ट्रियों में मजदूरी और खेती से जुड़े कार्यों में मजदूर के लिए पट्टे पर (अफ्रीका, वेस्टइंडीज, फिजी, श्रीलंका, बर्मा इत्यादि देशों में) ले जाए जाते थे। लेकिन हिंदू समाज में समुद्री यात्रा निशेध जैसे मध्यकालीन मान्यताओं को बदलने का श्रेय उन्हीं लोगो को जाता है।

औपनिवेशिक काल में नस्लभेद को औपनिवेशिक सरकारों ने राज्य की नीति की तरह स्थापित किया था। लेकिन औपनिवेशिक काल के खात्मे के बाद भी कई दूसरी तरह की समस्याएं पैदा हुई। गांधी के जीवनकाल के दौरान ही सिलॉन (श्रीलंका) और बर्मा (म्यांमार) में भारतीयों और वहां के स्थानीय लोगों के बीच तकरार होने लगी और सिलॉन और बर्मा के लोग भारतीयों से दूरी चाहने लगे।
डीएस सेनानायके की सरकार द्वारा पारित शुरुआती 2 प्रस्ताव में ही आजाद सिलॉन के करीब 10 लाख भारतीय मूल के नागरिकों को वहां की नागरिकता से महरूम कर दिया। हालांकि मॉरिसस में भारतीयों ने सत्ता पर पकड़ मजबूत कर ली लेकिन म्यांमार में अल्पसंख्यक बना दिए गए। इस तरह के देशों में भारतीयों को एक नए तरह के नस्लवाद का शिकार होना पड़ा।

औपनिवेशिक काल समुद्री प्रभुत्व का काल भी था। 1950 के आखिर तक पानी के जहाज ही महाद्वीपों के बीच आने जाने का सबसे भरोसेमंद साधन थे। 1960 की शुरुआत में हवाई जहाज ने लंबी दूरी के लिए पसंदीदा आवागमन के साधन के रूप में पानी के जहाज की जगह ले ली। भारत से प्रवास के स्वरूप को देखें तो मानव संसाधन की दक्षता और भारत से आवागमन पर इसकी छाप स्पष्ट देखी जा सकती है। संयोग से करीब उसी समय अमेरिका में पारित हुए अप्रवास और राष्ट्रीयता कानून, 1965 ने कौशल संपन्न पेशेवरों और छात्रों के प्रवास की राह आसान कर दी। इस ऐतिहासिक कानून ने भारतीय प्रवासी समुदाय की संख्या और साख को बदलकर रख दिया। 1960 में जहां 12000 भारतीय अमेरिका में रहते थे वही आज उनकी संख्या 25 लाख हो चुकी है। ये पढ़े लिखे और सफल प्रवासी भारतीय दुनिया भर में फैले भारतीय मूल के लोगों को भी राह दिखा रहे हैं।

लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है। समाजवाद के दौर में जब भारत कमजोर विकास दर से जकड़ा हुआ था उस समय यहां के नागरिक विदेशों में अपनी भारतीय पहचान को उजागर होने देना नहीं चाहते थे। भारत में भी अप्रवासी भारतीयों को भगोड़े की तरह देखा जाता था। लेकिन उदारीकरण के बाद विकास दर में तेजी, आईटी पॉवर हब के रूप में भारत का उदय और वाजपेयी सरकार की विकास नीतियों ने मिलकर प्रवासी भारतीयों का हौसला बढ़ाया। सैटेलाइट टीवी, इंटरनेट के आगमन और उसके बाद 1990 के दशक में घर-घर में टीवी की पहुंच के बाद विदेशों में बसे भारतीयों को लगातार अपने देश से संपर्क का साधन मिल गया। अब प्रवासी भारतीयों के लिए भी अपनी जन्मभूमि के हित के बारे में सोचना संभव हो गया। भारतीय और अप्रवासी भारतीय मिलकर देश को दुनिया में ऊंचा स्थान दिलाने के बारे में सोच सकते हैं। इससे नए ‘वैश्विक भारतीय’ की अवधारणा को बल मिला और इसी नाम के साथ कंचन बनर्जी ने 2008 में बोस्टन में एक मैगजीन भी शुरू की।

लेकिन अभी भी दुनिया के कई हिस्सों में भारतीय समुदाय को नस्लवाद, धार्मिक कट्टरता और कानूनी भेदभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मोर्चों पर अभी सफलता मिलनी बाकी है। ऐसे में महात्मा गांधी के 1890 में दक्षिण अफ्रीका में शुरू किए गए संघर्ष की लौ बुझने नहीं देनी है।
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मंगलवार, सितंबर 02, 2014

प्रधानमंत्री मोदी ने की नेता जी के सबसे पुराने साथी के साथ मुलाक़ात

02-सितम्बर-2014 19:43 IST
भारतीय समुदाय के समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन यादगारी रहा 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 02 सितंबर, 2014 को जापान के तोक्यो में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सबसे पुराने साथी रहे 99 वर्षीय साइशिरो मिसुमी से मुलाकात करने पहुंचे। (पसूका-हिंदी इकाई)
The Prime Minister, Shri Narendra Modi reaches out to 99 year old Saichiro Misumi, Netaji's oldest living associate in Japan, in Tokyo, Japan on September 02, 2014
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज जापान के तोक्‍यो में एक स्‍वागत समारोह के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्‍होंने जापान की यात्रा को सफल बताया और जापान द्वारा की गई 3.5 ट्रिलियन येन के निवेश की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्‍होंने छह भारतीय कम्‍पनियों पर लगाई गई पाबंदी को हटाने का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि दोनों देशों के आपसी रिश्‍ते विश्वास के मजबूत धागे पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने वाराणसी-क्योतो साझेदारी नगर सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किए जाने पर भी संतोष जताया और उम्‍मीद जताई कि वाराणसी भी क्‍योतो जैसे एक आधुनिक धरोहर नगर के रूप में उभरेगा।

प्रधानमंत्री ने जिक्र किया कि उन्‍होंने जापान के सम्राट अकिहितो और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे दोनों को ही बतौर भेंट भगवत गीता दी है।

महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती यानी 2019 तक स्‍वच्‍छ भारत के अपने विजन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने जापान में भारतीय समुदाय के हर परिवार से आग्रह किया कि वे जापान से प्रत्‍येक वर्ष पांच जापानी परिवारों को भारत की यात्रा करने के लिए प्रेरित करें। उन्‍होंने जापान में भारतीय समुदाय से गवर्नेंस पर हाल ही लांच की गई ‘माईगव. इन’ वेबसाइट पर सुझाव देने की भी अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी निश्चित रूप से एशिया की सदी होगी लेकिन यह क्‍या आकार लेता है, यह इस पर निर्भर करेगा कि भारत और जापान के बीच रिश्‍ते किस प्रकार पनपते हैं, यह किन मूल्‍यों को बढ़ावा देता है और यह विश्‍व को किस दिशा में ले जाता है। उन्‍होंने जापान में भारतीय समुदाय से इस परिपेक्ष्‍य में इनकी अहमियत की सराहना करने का आग्रह किया।
वि. कासोटिया/एएम/आरआरएस/एसएसके-3471

गुरुवार, जनवरी 02, 2014

कौन सा मार्ग शेष रह गया//पंडित सिद्धार्थ शर्मा

Thu, Jan 2, 2014 at 12:36 PM
अब तो कमजोर और पाखण्ड का ये देश है 
अब ना भगत ना सुखदेव ना राज गुरु शेष हैं 

हे भारत भू हे सखी तू 
लौट जा उस काल में तू 
जब तेरे बालक के बाजू में था दम
जब था वो यमुना का जल सरस पावन
जब स्वम माधव ने भरी सभा चीर को बढाया 
जब एक धागे की कसम ने रक्षा बन्धन का सम्मान पाया 
जब भीम ने दुर्योधन के घमण्ड को जन्घा से हटाया
जब दुर्गा ने धरा पर माता का सम्मान पाया 
अब तो कमजोर और पाखण्ड का ये देश हैं 
अब ना भगत ना सुखदेव ना राज गुरु शेष हैं 
पैसा कमाना कैसे सब ये पढाते
जीवन जीना कैसे ये सब भूल जाते
आदर्श के नाम पे घोटाला लिखा हैं 
गैर ने नही ये खून तेरा अपनो ने पिया हैं 
हे भवानी ! क्यू राजपूतो का खून अब ना डोले
देख कर ये हशर कोई उद्धम सिंह क्यू ना बोले 
बस मंदिरो में सब ने तुझ को कैद कर दिया हैं 
केवल विनाश  का रास्ता ही शेष रह गया हैं 

--पंडित सिद्धार्थ शर्मा  (सत्र 2004-08)

मंगलवार, दिसंबर 31, 2013

बाबा रामदेव: 1 मार्च से घर-घर जाकर वोट फार मोदी कैंपेन चलाएंगे

Tue, Dec 31, 2013 at 1:58 PM
कहा-लोगों को पानी मुफ्त देना सरकार का दायित्व
केजरीवाल ने नया क्या किया
अमृतसर: 31 दिसंबर 2013 : (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन//इर्द गिर्द): 
देश में भ्रष्टाचार समाप्त करने और विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार से टक्कर लेने वाले योग गुरु बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया है, कि इस समय देश को नरिंदर मोदी जैसे दिग्गज नेता की जरूरत है, जो लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने में समर्थ हैं। वह आज अमृतसर पहुंचे थे। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा, कि 2014 में देवत्व की स्थापना के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी उनका आंदोलन जारी रहेगा। अपने आंदोलन के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, कि एक मार्च से वह और उनके कार्यकर्ता पूरे देश में घर-घर जाकर वोट फार मोदी और भ्रष्टाचार समेत अन्य मुद्दों के खिलाफ वोट करने के लिए लोगों से अपील करेंगे। इसके अलावा 23 मार्च को शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में वह दिल्ली में एक बहुत बड़ा योग कैंप लगा रहे हैं, जिसमें एकसाथ पूरे देश में करीब दस करोड़ लोग एकसाथ योगाभ्यास करेंगे।
   नरिंदर मोदी के प्रचारक के रूप में बाबा रामदेव के आगे आने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, कि वह नरिंदर मोदी के प्रचारक नहीं है। बल्कि वह इसलिए उनका साथ दे रहे हैं, क्योंकि नरिंदर मोदी और उनके मुद्दे एकसमान है। इसलिए वह नरिंदर मोदी का प्रचार करने में जुटे हुए हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से सत्ता में आते ही लोगों को मुफ्त पानी जैसी सुविधा दिए जाने के बारे में बाबा रामदेव ने कहा, कि इसमें केजरीवाल ने नया क्या किया। उन्होंने कहा, कि पहले आम आदमी पार्टी को अपनी विचार धारा स्पष्ट करनी होगी कि उनकी विचारधारा वामपंथी है या कुछ और। दिल्ली में नरिंदर मोदी के जादू के फेल होने के बारे में बाबा रामदेव ने कहा, यदि वहां मोदी फैक्टर नहीं चला होता, तो भाजपा की हालत कांग्रेस से भी बदत्तर होती।