शुक्रवार, जनवरी 10, 2020

कलम वाले कलम की साधना को मज़बूत बनाएं

भाषा को सियासत की साज़िशों का शिकार न होने दें 
लुधियाना: 10 जनवरी 2020: (कार्तिका सिंह//इर्द गिर्द डेस्क):: 
भाषा को सम्मान देने की बजाये उसे हथियार बना लिया गया है। सियासत एक बार फिर अपनी नापाक चाल चल रही है। कभी पंजाबी के खिलाफ, कभी अंग्रेजी के खिलाफ और कभी हिंदी के खिलाफ। कुल मिला कर इन खतरनाक साज़िशों का खतरनाक प्रभाव मानवता पर ही पड़ता है। समाज के टुकड़े करने वाले इसका फायदा उठाते हैं। सियासत वाले लोग तो गुंडागर्दी भी कर सकते हैं। किसी न किसी भाषा पर कालख भी पोत सकते हैं, किसी भाषा प्रेमी की हत्या भी कर सकते हैं। लेकिन कलम वाले तो इनकी तरह नहीं सोच सकते। इसके बावजूद उन्हें और दृढ़ बनना होगा। कलम की साधना को और और मज़बूत बनाना होगा। भाषा को समाज के फायदे का ज़रिया बनाना होगा न कि विघटन का। भाषा समाज की एकता के काम आये न कि सियासत का हथियार बने। आज विश्व हिंदी दिवस पर हम इस बात  संकल्प कर सकें तो सचमुच बहुत ही अच्छा होगा। इस विशेष दिवस पर प्रस्तुत है मेरी एक काव्य रचा जिसे शब्द भास्कर ने पुरस्कृत भी किया था। 
हर ह्रदय में प्रेम का जिसने दीप जलाया; हिंदी है!  
दिल को दिल से जोड़ के जिसने देश बनाया; हिंदी है।
कदम से कदम मिला के जिसने साथ निभाया; हिंदी है।

कई धर्म थे, कई वर्ग थे, रोज़ ये झगड़े आम हुए,
हर ह्रदय में प्रेम का जिसने दीप जलाया; हिंदी है।

उर्दू फारसी कठिन बहुत थे, इंग्लिश भी आसान न थी,
 झट से आ कर इक जादू जिसने सिखलाया; हिंदी है।

पढ़ने लिखने की हर दिल में ललक उठे; आसान न था,
हर ह्रदय को जोड़ के जिसने जोश जगाया; हिंदी है।

हर इक हाथ में इक पुस्तक और लोग दीवाने पुस्तक के,
हर पुस्तक को हर इक तक जिसने पहुंचाया;हिंदी है।

दुनिया का उत्कृष्ठ साहित्य; पढ़ा है मैंने हिंदी में;
मुझको हर लेखक से जिसने आ मिलवाया; हिंदी है।

हिंदी देश की बिंदी है; यह सच है; इसको मान भी लो,
आज यहां भी हम सबको जिसने मिलवाया; हिंदी है।
                                                    ---कार्तिका सिंह 

शनिवार, जनवरी 04, 2020

नहीं रहे भगीरथ नाथ चोपड़ा

शोकाकुल परिवार के पास पहुंचे परवीन बांसल और अन्य 
लुधियाना: 4 जनवरी 2020: (रेक्टर कथूरिया और इर्द गिर्द डेस्क)::
ज़िंदगी इतनी भागदौड़ करवाती है कि सांस तक ले पाना कठिन सा लगने लगता है। इतने झमेलों में से एक छोटी सी उम्र को चुरा पाना भी कभी कभी नामुमकिन सा लगने लगता है। ऐसे में अगर कोई अच्छा दोस्त मिल जाये तो नामुमकिन भी मुमकिन जैसा लगने लगता है। कुछ इसी तरह मिले थे मित्र प्रदीप चोपड़ा जी। टीवी चैनल की नौकरी। हमारे रात्रि शिफ्ट वाले ग्रुप को खबरों के बुलेटिन तैयार करते करते आधी रात हो जाती। टीवी चैनल से घर लौटना आधी रात के समय बहुत मुश्किल सा था। हालांकि चैनल की अपनी वैन भी थी जो मुझे घर छोड़ कर आती थी लेकिन कभी कभी उसका ड्राइवर रात की रोटी खाने चला जाता तो उसकी इंतज़ार के बिना कोई चारा न होता। एक रात इसी तरह ड्राईवर की इंतज़ार में चाय की चुस्कियां ले रहा था कि अचानक प्रदीप चोपड़ा जी सामने से आते नज़र आए। शायद उनके हाथ कोई देर शाम या रात को कोई बड़ी खबर लग गई थी। आते ही बोले मैं ज़रा फुटेज जमा करवा लून फिर मेरे साथ ही घर चलना। हम दोनों का घर एक दुसरे के काफी नज़दीक है इसका पता मुझे उसी दिन चला। ऊन बाज़ार जिसे पहले पहल मोच पुरा कहा जाता था और आजकल उसे ट्रंकों का बाजार भी कहा जाता है। उस बाजार के एक तरफ चोपड़ा जी का घर और एक तरफ हमारा घर। रास्ते की गलियों में अब छोटे छोटे बाजार खुल गए थे। उन्हीं दुकानों  में आती थी प्रदीप चोपड़ा जी के भाई की दुकान। हौज़री का काम था। प्रदीप जी के पिता जी भी अक्सर उसी दूकान पर बैठते।  कभी दुकान पर और कभी घर पर उनसे मिलना होता। बहुत ही प्यार और अपनत्व से सब का हालचाल पूछते। आशीर्वाद देते। साथ ही उनके चेहरे पर मुस्कराहट और चमक बढ़ जाती। बहुत मुश्किल था उनके सामने कोई झूठ बोल पाना। प्रदीप जी को कहीं ले जाना होता तो कोई न कोई बहाना सोचना पड़ता था। इस तरह उनके साथ एक स्नेह भी था और बड़ों की शख्सियत वाला डर भी था। उनके पास बैठ कर ज़िंदगी की चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत आती। अब वह नहीं रहे ,हिम्मत कौन देगा यह सवाल गंभीर बन कर खड़ा हो गया है।
मुझे याद है प्रदीप जी बताया करते थे। जब सभी भाईयों को उनका हिस्सा मिल गया तो बाकी बचे प्रदीप जी। अब इतनी दुकानें भी कहाँ से आतीं? परदीप जी ने पिता से पूछना मेरा क्या बनेगा? जवाब मिलता सबसे अच्छा। एक दिन प्रदीप जी ने पूछ लिया वह कैसे? मेरे हिस्से में तो दुकान ही नहीं बची। पिता जी बोले मैं तुझे एक नहीं कई दुकानें दूंगा। वास्तव में उन्होंने प्रदीप जी को अकाऊंट्स का काम सिखा दिया। बोले जहां जा कर भी काम करेगा समझना वह तेरी दुकान ही है। उसे बेगाना न समझना। अपना समझ कर ही काम करना।  सारा  इसी हिसाब किताब पर निर्भर होता है। आज प्रदीप चोपड़ा जी के पास बहुत सी फर्में अर्थात बहुत सी दुकानें हैं। उनके पिता मान्यवर भगीरथ नाथ चोपड़ा की की क्रिया बाजवा नगर के वेद मंदिर में थी। गरुड़ पुराण के पाठ का भोग और रस्म पगड़ी भी थी। मंदिर के हाल में आज कितने लोग आये--कितनी भीड़ थी--कैसे पूरा हाल भरा हुआ था--काश वह देख पाते। लग भी रहा था जैसे अभी कहीं से आ जायेंगे और उसी मनमोहक  मुस्कान से हम सब को हौंसला देंगें।  
प्रदीप चोपड़ा जी और परिवार के अन्य सदस्यों का दुःख बांटने के लिए हम सभी लोग भी पहुंचे। मेरे साथ डाक्टर भारत (एफ आई बी मीडिया), पत्रकार-सतपाल सोनी, पत्रकार एम एस भाटिया और कुछ अन्य लोग भी थे। हाल में बहुत से समाजिक और राजनीतिक लोग भी पहुंचे हुए थे। राजनीतिक और समाजिक चेतना को जगाने में अतिसक्रिय राजीव मल्होत्रा भी विशेष तौर पर पहुंचे हुए थे। टीवी चैनलों में कैमरामैन की ज़िम्मेदारी निभाने वाले मुकेश डोगरा भी आए। मानवता के दर्द को महसूस करने वाले पत्रकार जय कुमार भी अपनी टीम के साथ आये हुए थे। -रेक्टर कथूरिया 

गुरुवार, दिसंबर 19, 2019

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक

19 DEC 2019 6:05 PM by PIB Delhi 
 कहा ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने 
ग्रामीण विकास मंत्रालय का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार समारोह 2019 आयोजित
नई दिल्ली: 19 दिसंबर 2019: (पीआईबी//इर्द गिर्द ब्यूरो)::
भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनाने का बड़ा सपना गांवो के विकास के बगैर संभव नहीं है। ग्रामीण विकास ,कृषि और किसान कल्‍याण तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर  ने मंत्रालय के राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गांवों का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। ग्रामीण और शहरी विकास के बीच के अतंर को पाटने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि गांवों को आत्‍मनिर्भर बनाने के साथ ही कृषि को आर्थिक रूप से ज्‍यादा मुनाफे वाला बनाना जरूरी है।श

श्री तोमर ने इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी  योजना, प्रधानमंत्री  आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, दीनदयाल अंत्‍योदय योजना, दीनदयाल उपाध्‍याय ग्रामीण कौशल योजना, श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी  रूअरबन मिशन और सभी एसआईआरडीस का परिचालन करने वाले प्रशिक्षण विभाग में के 266 लोगों को उनकी उत्‍कृष्‍ट सेवाओं के लिए पुरस्‍कार प्रदान किए।  

ये पुरस्‍कार विभिन्‍न श्रेणियों में बेहतरीन प्रदर्शन्‍ करने वाले राज्‍यों, जिलों,ब्‍लॉकों, ग्राम पंचायतों और कर्मचारियों को प्रदान किये गए।

ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री साध्‍वी निरंजन ज्‍योति ने पुरस्‍कार पाने वालों को बधाई दी और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर वर्गों को ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से चलाए जाने वाले विभिन्‍न कार्यक्रमों का काफी लाभ मिला है, उन्‍हें रहने के लिए पक्‍के पकान, पास के बाजारों तक पहुंचने के लिए हर मौसम में इस्‍तेमाल की जा सकने वाली सड़कें और रोजगार के अवसर मिले हैं। वृद्धों, विधवाओं और निशक्‍तजनों को पेंशन की सुविधा तथा कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण की सुविधा भी मिली है।   


शनिवार, अगस्त 31, 2019

यह मौत सच का ईनाम होती है---मंजुल भारद्वाज

Saturday: 31st September 2019:7:56 PM: FB Messenger
सच बोलिए! -*मंजुल भारद्वाज
सच के बदले मिलती है मौत यह मौत सच का ईनाम होती है आदि से आज तक इतिहास में दर्ज़ है सच बोलने वाला चाहे सुकरात हो मंसूर हो या गांधी सत्ता के अंधियारे में सच बोलना जुर्म है जिसकी सजा मौत है सत्ता हमेशा सच से कांपती है सच से मनुष्यता की जीत होती है तानाशाहों की हार
सच का साथी है विवेक इसलिए सच बोलिए मनुष्यता के लिए मानवता के लिए
सच ही प्राण है
आज के अंहकार और अंधकार से आपको सिर्फ़ सच बचा सकता है इसलिए सच बोलिए!
मंजुल भारद्धाज मुख्यता एक रंग चिंतक हैं। सामजिक सरोकारों पर उनके नाटक नयी चेतना जगाते ही रहते हैं- कभी देश के एक कोने में तो कभी किसी दुसरे कोने में। इसके साथ ही उनकी कविता भी अक्सर जन मंच की तरह कहीं न कहीं, कभी भी बुलंद आवाज़ लगा देती है। जागते रहो---संघर्ष नहीं छोड़ना। यूं लगता है उनकी कविता और नुक्क्ड़ नाटक एक ही कला के दो रूप हैं। आपको यह बात कहाँ तक सही लगी अवश्य बताना। उनकी मुख्य कर्मभूमि मुम्बई है लेकिन सारा जहाँ हमारा की भावना भी है। -रेक्टर कथूरिया

मंगलवार, अगस्त 27, 2019

श्री अमित खरे ने किया 7वें सामुदायिक रेडियो सम्मेलन का उद्घाटन*

 प्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2019 5:14PM by PIB Delhi
प्रत्येक आकांक्षी जिले में एक सामुदायिक रेडियो की स्थापना सरकार की प्राथमिकता:श्री अमित खरे
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री अमित खरे ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. बी.आर. अंबेदकर भवन में आयोजित 7वें सामुदायिक रेडियो सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश में कार्यरत सभी सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के प्रतिनिधि तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री अमित खरे ने सामुदायिक रेडियो स्टेशनों पर आधारित एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
उद्घाटन अवसर पर श्री खरे ने सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के उत्साह की प्रशंसा की और कहा कि वे देश में सामुदायिक रेडियो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने सामुदायिक रेडियो के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आपदाओ के वक्त सूचनाओं को तेजी से पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि इन स्टेशनों में कार्यरत व्यक्तियों के मेहनत से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव दिखाई पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक रेडियो के लिये स्थानीय भाषा में सामग्री की आवश्यकता होती है। सामुदायिक रेडियो स्थानीय स्तर पर इन सूचनाओं का प्रसार करने के लिये हब की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक जिले में एक सामुदायिक रेडियो केन्द्र होना चाहिये और प्रत्येक आकांक्षी जिले में सामुदायिक रेडियो की स्थापना को प्राथमिकता दी जानी चाहिये। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आग्रह किया कि उन्हें सामुदायिक रेडियो अपनाने के संदर्भ में ब्रांड एम्बेसेडर की भूमिका निभानी चाहिए।
सम्मेलन की थीम के बारे में श्री खरे ने कहा कि सामुदायिक रेडियो की सामग्री और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के बीच परस्पर संबंध बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सामुदायिक रेडियो प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि उन्हें सरकार के कार्यक्रमों और योजनाओं के बारे में लोगों तक जानकारी पहुंचानी चाहिए। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि उन्हें स्थानीय स्तर पर शिक्षकों और खिलाड़ियों जैसे आदर्श व्यक्तियों का चयन करना चाहिए। इससे लोगों तक संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावी सिद्ध होगी।
इस अवसर पर श्री अमित खरे ने एक लघु फिल्म को लांच किया, जो सामुदायिक रेडियो स्टेशन की स्थापना की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से दिखाती है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अवर सचिव श्री अतुल कुमार तिवारी ने कहा कि सामुदायिक रेडियो स्थानीय लोगों को अवसर प्रदान करने का एक प्लेटफार्म है और यह सामुदायों के सशक्तीकरण के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एसडीजी की थीम है-‘किसी को पीछे नहीं छोड़ना है’। व्यक्ति को समुदाय के साथ जोड़ने से तथा समुदाय को राष्ट्र के साथ जोड़ने के साथ सामुदायिक रेडियो मजबूत बनेगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री टी. सी. ए. कल्याणी ने देश के सभी भागों से आये सामुदायिक रेडियो प्रतिनिधियों को एक मिनी भारत की संज्ञा देते हुए कहा कि क्षमता निर्माण के जरिये सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की निरंतरता को बनाये रखा जा सकता है।
द एसडीजी जर्नी–लीविंग नो वन बिहाइंड पर आधारित दीक्षांत सत्र की अध्यक्षता नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार श्री राकेश रंजन ने की, जबकि सामुदायिक रेडियो : मुद्दे, विचार और अनुभव की अध्यक्षता पत्र सूचना कार्यालय की पूर्व महानिदेशक सुश्री एस्थर कार ने की। इस सत्र में सोशल मीडिया के जरिये सामग्री प्रबंधन, अनुसंधान, प्रोडक्शन, प्रसारण और सामग्री के प्रसार जैसे विषयों पर चर्चा की गई। आकांक्षी जिलों, आपदा संभावित क्षेत्रों, एलडब्ल्यूई क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक रेडियो स्टेशनों ने अपने अनुभाव साझा किये। प्रतिनिधियों ने एसडीजी, प्रशासन और पोषण जैसे विषयों के लिए सरकार के साथ जुड़कर कार्य करने के संदर्भ में अपने अनुभव साझा किए।   (PIB)
*श्री अमित खरे सूचना एवं प्रसारण सचिव हैं।  
***
आर.के.मीणा/आरएनएम/एएम/जेके/डीएस– 2658   
(रिलीज़ आईडी: 1583181) आगंतुक पटल : 19 

सोमवार, अगस्त 26, 2019

सभी गांव ग्रामनेट के जरिये वाई-फाई से जल्द जुड़ेंगे:श्री धोत्रे

प्रविष्टि तिथि: 26 AUG 2019 3:51PM by PIB Delhi
सी-डॉट–एक्सजीएसपीओएन, सी-सैट-फाई और सीआईएसटीबी जैसे नए उत्पाद जारी    
सी-डॉट का 36वां स्थापना दिवस
सरकार ने आज अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि ग्रामनेट के जरिये सभी गांव में वाई-फाई उपलब्ध कराया जाएगा, जिसकी कनेक्टिविटी 10 एमबीपीएस से 100 एमबीपीएस गति के बीच होगी। आज नई दिल्ली में सी-डॉट के 36वें स्थापना दिवस समारोह में संचार राज्य मंत्री श्री संजय शामराव धोत्रे ने मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि भारतनेट 01 जीबीपीएस कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रहा है, जिसे 10 जीबीपीएस तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज सी-डॉट के. जारी होने वाले एक्सजीएसपीओएन से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में बहुत सहायता होगी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर यह बापू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिनका सपना था कि भारत के गांव आत्मनिर्भर बनें।
श्री धोत्रे ने कहा कि सी-डॉट की सी-सैट-फाई प्रौद्योगिकी से भारत के लोग, खासतौर से गांव और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा। इसके जरिये उन्हें टेलीफोन और वाई-फाई सुविधाएं मिलेंगी। इस प्रौद्योगिकी से देश के सभी भागों में यह सुविधा सभी मोबाइल फोनों पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि नई प्रौद्योगिकी से सुदूर स्थानों पर रहने वाले लोग उपग्रह के जरिये संपर्कता प्राप्त करके मुख्यधारा में आ जायेंगे।इन स्थानों पर फाइबर लाइन बिछाना कठिन होता है और वहां इंटरनेट उपलब्ध नहीं है। श्री धोत्रे ने सी-डॉट – एक्सजीएसपीओएन, सी-सैट-फाई और सीआईएसटीबी जैसे नए उत्पाद भी जारी किये।
इस अवसर पर सी-डॉट के कार्यकारी निदेशक श्री विपिन त्यागी ने कहा कि सी-सैट-फाई वायरलैस और उपग्रह संचार पर आधारित है, ताकि दुर्गम स्थानों और दूरदराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि इस सस्ती सुविधा में महंगे सेटेलाइट फोनों की जरूरत नहीं है और यह सुविधा वाई-फाई वाले फोन पर काम करेगी।
समारोह में ईटीएसआई के महानिदेशक श्री लुई जॉर्ज रोमेरो, भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत महामहिम श्री रेमंड मैगिस और संचार मत्रांलय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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आर.के.मीणा/आरएनएम/एएम/एकेपी/सीएस–2638
रिलीज़ आईडी: 1583066) आगंतुक पटल : 144 

शनिवार, अगस्त 24, 2019

प्रधानमंत्री ने बहरीन में भारतीय समुदाय को संबोधित किया

प्रविष्टि तिथि: 24 AUG 2019 5:10PM by PIB Delhi
मेरा उद्देश्‍य यहां बसे भारतीयों से भेंट करना 
प्रधानमन्‍त्री ने कहा ‘बहरीन की मेरी यात्रा शासनाध्‍यक्ष के रूप में, प्रधानमंत्री के रूप में हो सकती है, लेकिन मेरा उद्देश्‍य यहां बसे भारतीयों से भेंट करना और बहरीन के लाखों मित्रों से बातचीत करना है। आज जन्‍माष्‍टमी का पवित्र त्‍यौहार है। मुझे बताया गया कि खाड़ी क्षेत्र में जन्‍माष्‍टमी के अवसर पर कृष्‍ण कथा सुनाने की परंपरा आज भी है। कल मैं श्रीनाथ जी के मंदिर जाऊंगा और आप सभी लोगों और आपके मेजबान देश की समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करूंगा’।
प्रधानमन्‍त्री ने कहा ‘मैं जानता हूं कि आप और भारत के श्रद्धालु किस प्रकार से इस त्‍यौहार को श्रद्धा और उल्‍लास के साथ मनाते हैं। यह खुशी की बात है कि कल इस मंदिर का पुनर्निमाण कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा’।
प्रधानमन्‍त्री ने कहा कि भारतीयों की ईमानदारी निष्‍ठा और क्षमता और बहरीन के सामाजिक आर्थिक जीवन में उनके योगदान के कारण बहरीन में भारतीयों के प्रति सद्भाव है। प्रधानमन्‍त्री ने कहा, ‘आप लोगों ने अपने कठोर परिश्रम से यहां अपने लिए स्‍थान बनाया है। हमें इस सद्भावना को मजबूत बनाना होगा। मैं जब कभी भी यहां सरकार के भारतीय सहयोगियों, यहां व्‍यवसाय करने वाले लोगों, यहां बसे लोगों, यहां काम करने वाले लोगों की प्रशंसा सुनता हूं, मेरा मन खुशी से भर जाता है।
प्रधानमन्‍त्री ने कहा कि आज भारत में लगभग प्रत्‍येक परिवार बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा हुआ है। मोबाइल फोन, इंटरनेट भारत के सामान्‍य परिवार की पहुंच के भीतर है। दुनिया में सबसे सस्‍ता इंटरनेट डेटा भारत में उपलब्‍ध है। इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे भारत में अधिकतर सेवाएं डिजिटल दी जा सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा प्रत्‍येक भारतीय को यकीन होने लगा है कि भारत के सपनों, उम्‍मीदों और आकाक्षांओं को पूरा किया जा सकता है। प्रधानमन्‍त्री ने कहा, ‘हमारे लक्ष्‍य काफी ऊंचे है, लेकिन जब आपके पास 130 करोड़ लोगों की भुजाएं हों, आप प्रोत्‍साहित होते हैं। भारत आज  न केवल सरकार के प्रयासों से बल्कि करोड़ों भारतीयों की भागीदारी से आगे बढ़ रहा है। सरकार केवल स्‍टीयरिंग पर है, देश की जनता ही एक्‍सीलरेटर दबा रही है।
उन्‍होंने कहा कि भीम ऐप, यूपीआई और जनधन खाते ने भारत में बैंकिंग तक आम नागरिकों की पहुंच बना दी है। हमारा रूपे कार्ड अब दुनियाभर में लेन-देन का प्राथमिक माध्‍यम बन गया है। अब हमारे रूपे कार्डों को दुनियाभर में बैंकों और बिक्रेताओं द्वारा स्‍वीकार किया जाता है।
प्रधानमन्‍त्री ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि आप जल्‍द ही बहरीन में रूपे कार्ड से लेन-देन कर सकेंगे। रूपे कार्ड के इस्‍तेमाल के लिए आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए। हमारा इरादा आप लोगों को भारत में अपने घर पर धनराशि भेजने के लिए रूपे कार्ड की सुविधा प्रदान करना है। अब आप यह कह सकेंगे कि बहरीन-रूपे से भुगतान।
उन्‍होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हमारा प्रयास रहा है कि विदेशों में रह रहे करोड़ों भारतीयों और देश में रह रहे 130 करोड़ भारतीयों का सिर हमेशा ऊंचा रहे। आज यदि भारत दुनिया को सम्‍मान से देखता है, तो इसका एक बड़ा कारण आप जैसे लाखों साथी हैं।
भारत में विकास की चर्चा करते हुए, उन्‍होंने कहा कि समेकित गतिशीलता के लिए भारत ‘एक देश एक कार्ड’ की दिशा में बढ़ रहा है। पूरा भारत ‘एक देश एक ग्रेड’ और जीएसटी के रूप में ‘एक देश एक कर’ से जुड़ गया है। भारत में जीवन और व्‍यवसाय को सुगम बनाने के लिए सभी उपाय किए गए हैं। सभी समाधानों का अविष्‍कार भारत के युवाओं ने किया है। भारत के युवा वैश्विक एप्‍लीकेशनों के साथ स्‍थानीय समाधान ढूंढने के लिए काफी गंभीरता से कार्य कर रहे हैं। भारत की प्रतिभा को दुनियाभर में पहचान मिल रही है। उनकी प्रतिभा वैश्विक परियोजनाओं और संस्‍थाओं में आश्‍चर्यजनक कार्य कर रही है। छोटे से बजट में चन्‍द्रयान जैसी उपलब्धियां हासिल करने को लेकर भारत के वैज्ञानिकों की दुनिया में सराहना की जा रही है। यह गुण न केवल हमारे लिए फायदेमंद है बल्कि हमारी पहचान भी है। हम बजट पर ही ध्‍यान केन्द्रित नहीं करते बल्कि हमारे अंदर अपने लक्ष्‍य को हासिल करने की इच्‍छा शक्ति है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2022 में भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे कर लेगा। मेरा आपसे आग्रह है कि आप अपने स्‍तर पर कुछ नई प्रतिज्ञाएं लें। आप फैसला कीजिए कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति हर वर्ष बहरीन के अपने कुछ मित्रों को भारत के खूबसूरत पहाड़ी स्‍थानों से लेकर समृद्ध अध्‍यात्‍म और सांस्‍कृतिक विरासत को देखने के लिए भारत यात्रा करने के लिए प्रेरित करेगा। हमने शपथ ली है कि हम भारत को 2022 तक प्‍लास्टिक के एकल इस्‍तेमाल से मुक्‍त कर देंगे।
प्रधानमन्‍त्री ने कहा, ‘’आइये भारत और बहरीन अपने साझा मूल्‍यों और हितों की दिशा में मिलकर कार्य करें। भारत और बहरीन प्राचीन सभ्‍यता वाले आधुनिक देश हैं। दोनों देशों में काफी संभावनाएं हैं। मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि बहरीन में मेरे भारतीय साथी भारत-बहरीन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संबंधों और संभावनाओं के इस बंधन को मजबूत बनाएंगे’’।       
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आर.के.मीणा/आरएनएम/एएम/केपी/एमबी – 2629  
(रिलीज़ आईडी: 1582968) आगंतुक पटल : 87