शनिवार, फ़रवरी 23, 2013

चंद्रगिरि : भूरे सोने की पहाड़ियां

21-फरवरी-2013 19:32 IST
वाणिज्य फीचर                                                     अमित गुइन*
विश्व के कॉफी पारखियों को दिसंबर 2007  में केंद्रीय कॉफी अनुसंधान संस्थान (सीसीआरआई) ने नए किस्म की कॉफी के पौधे चंद्रगिरि के बीज से परिचित कराया था। तभी से 'भूरे सोने' की खुशबू और रंग ने विश्व के विभिन्न भागों के कॉफी प्रेमियों को अपने से बांध लिया  है। चंद्रगिरि  पौध जब भारत के कॉफी बागानों में व्यावसायिक उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया गया तो उनका अच्छा परिणाम निकला और इसके बीज की भारी मांग होने लगी।
    इसके बारे में प्रचलित लोक कथा कुछ इस प्रकार है कि लगभग चार सौ साल पहले एक युवा फकीर बाबा बुदान मक्का की यात्रा पर निकले। यात्रा से थक कर चूर होने के बाद वे सड़क के किनारे एक दुकान पर नाश्ते के लिए रूके। वहां उन्हें काले रंग का मीठा तरल पदार्थ एक छोटे कप में दिया गया। उसे पीते ही युवा फकीर में गजब की ताजगी आ गयी। उन्होंने उसे अपने देश ले जाने का निश्चय कर लिया। लेकिन उन्हें जानकारी मिली कि अरब के लोग अपने रहस्यों की कड़ाई से रक्षा करते हैं और स्थानीय कानून उसे अपने साथ ले जाने की अनुमति नहीं देंगे। बाबा ने अरब के कॉफी के पौधे के सात बीज अपने कमर में अपने चोले के नीचे छिपा लिए। स्वदेश लौटने पर बाबा बुदान ने कर्नाटक की चंद्रगिरि  पहाड़ियों में बीज को बोया। आज वे सात बीज विभिन्न किस्मों में बदल गए हैं और एक देश में विश्व की तरह-तरह की कॉफी पैदा होने लगी है।
    चंद्रगिरि की झाड़ियां छोटी किंतु कॉफी की अन्य किस्मों कावेरी और सान रेमन की तुलना में घनी होती हैं। इसके पत्ते बड़े, मोटे और गहरे हरे रंग के होते हैं। कॉफी की यह किस्म अन्य किस्मों के मुकाबले लंबे और मोटे बीज पैदा करती है।
    कॉफी उत्पादकों से इस किस्म के पैदाबार के बारे में बहुत उत्साहजनक जानकारी मिली है। इसकी अनुवांशिकी एकरूपता और शुरूआती पैदावार भी अच्छी होती है। इसके अलावा अधिकतर उत्पादक चंद्रगिरि  को अपने खेतों में खाली समय की भरपाई के लिए इस्तेमाल करते हैं।
    यह भी देखा गया है कि अगर खेती के उचित तरीके अपनाए जाएं तो कावेरी  एचडीटी और चंद्रगिरि  जैसी विभिन्न घनी झाड़ियों से उपज में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता। चंद्रगिरि  की फलियां अच्छे किस्म की होती हैं और औसतन 70  प्रतिशत फलियां 'ए' स्तर की होती हैं, इनमें से 25-30 प्रतिशत एए स्तर की होती हैं। अन्य किस्मों की तुलना में 'ए' स्तर की फलियां 60-65 प्रतिशत होती हैं  जिनमें से 15-20 प्रतिशत एए स्तर की होती हैं।
अनुसंधानकर्ताओं को यह भी पता चला है कि चंद्रगिरि  में बीमारी अन्य किस्मों के मुकाबले बहुत देर से लगती है। इसके अलावा बीमारी की गंभीरता बहुत कम (5  प्रतिशत से भी कम) होती है। लेकिन कॉफी के पौधे के तनों में छिद्र करने वालो सफेद कीटों के मामले में चंद्रगिरि  भी अन्य किस्मों की तरह ही है। भारत और दक्षिण एशिया में ये कॉफी के सबसे खतरनाक कीट होते हैं। लेकिन उत्पादन की आदर्श परिस्थितियों यथा समुद्र से 1000 मीटर की ऊंचाई वाले खेतों में कीट लगने की घटनाएं कम होती है। ऐसा इसलिए होता है कि झाड़ियां बहुत घनी और डालियां चारों ओर फैली होती हैं, जिससे सफेद कीट मुख्य तने पर हमला नहीं कर पाते। कीट नियंत्रण के लिए संक्रमित पौधों को नष्ट करना आवश्यक है। कीट प्रबंधन के लिए अन्य उपायों में आवश्यकतानुसार 10 प्रतिशत चूने का उपयोग, फेरोमोन जालों का इस्तेमाल और तने को लपेटने आदि का काम किया जा सकता है।
(पीआईबी फीचर)
*लेखक स्वतंत्र पत्रकार है
लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और पसूका का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं।
वी.कासोटिया/राजेन्द्र/चित्रदेव-45
पूरी सूची-21-02-2013

शुक्रवार, फ़रवरी 22, 2013

एमआईजी फ्लैट का आवंटन

22-फरवरी-2013 12:54 IST
दिसंबर 2012 को दिल्‍ली में यौन हिंसा की पीडिता के परिवार को एमआईजी फ्लैट का आवंटन
केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 16 दिसंबर 2012 को दिल्‍ली में यौन हिंसा की पीडिता के परिवार को डीडीए के एमआईजी फ्लैट आवंटित करने की मंजूरी दी है। 

यह डीडीए फ्लैट आवंटित करने की मौजूदा नीति/दिशा निर्देश में छूट के तहत बिना बारी के आधार पर दिया जाएगा। फ्लैट की लागत दिल्‍ली सरकार द्वारा वहन की जाएगी। (PIB)

मीणा/शोभा/यशोदा - 677

गुरुवार, फ़रवरी 21, 2013

विशेष लेख........//......... *डॉ के. परमेश्‍वरन

12-फरवरी-2013 19:04 IST
एक गांव में एक किसान क्‍लब: कृषि क्षेत्र में नई पहल 
कुछ समय पहले मदुरई जिले के पश्चिमी हिस्‍से के गांव में तैनात अधिकारियों ने महिला स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के प्रबंधन की जिम्‍मेदारी पडोस के रज्‍जुकर किसान क्‍लब को सौंपी। मदुरई जिले के मेलूर ब्‍लॉक के लक्ष्‍मीपुरम स्थित यह क्‍लब स्‍थानीय स्‍कूल के गरीब बच्‍चों को हर साल किताबें  बांट रहा है। जिले के वैगई विवासाइगलसंघम के किसान क़ृषि संबंधी कार्यक्रम राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में चला रहे हैं।  यह सब राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा देश के गांव में चलाए जा रहे अभियान के तहत हुआ। किसान क्‍लब की अवधारणा नाबार्ड समर्थित है और इसका नारा एक गांव में किसानों का एक क्‍लब है। इसके तहत प्रगतिशील किसान क्‍लब के झंडे तले एकत्रित होते हैं। नाबार्ड तीन वर्षों तक इन क्‍लबों को किसानी के प्रगतिशील तौर-तरीके संबंधी प्रशिक्षण और कृषि संबंधी यात्राओं के लिए राशि उपलब्‍ध कराता है।
    मदुरई जिले के विभिन्‍न गावों में अभी 170 किसान क्‍लब काम कर रहे हैं। इन क्‍लबों में सर्वाधिक सफल किसान हैं उत्‍थापनीकनूर के किसान। किसान चमेली उगाते हैं। नाबार्ड ने इस क्‍लब को इंडियन बैंक की साझेदारी में 30 क्‍लबों में शुमार किया है। एक कदम बढकर इन क्‍लबों ने एक फेडरेशन बनाया है जिसका नाम है उत्‍थापनीकनूर फलावर ग्रोअर फेडरेशन। जास्‍मीन उगाने वाले किसान चाहते हैं कि वे स्‍वयं अपना बाजार चलाएं। किसान इसके लिए जिला प्रशासन से समर्थन चाहते हैं और सिद्धांत रूप में उन्‍हें जमीन देने की मंजूरी भी दी गई है।
    नाबार्ड ने मदुरई जिले के अलंगनाल्‍लानूर के सहकारिता क्षेत्र की प्राथमिक कृषि सहयोग समितियां को इस तरह के क्‍लब बनाने की मंजूरी दी है। हाल में अलंगनाल्‍लानूर ब्‍लॉक में परीपेट्टी किसान क्‍लब और देवासेरी किसान क्‍लब के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलाया गया।
    नाबार्ड के एजीएम श्री शंकर नारायण की राय है कि किसान वैल्‍यू चैन की बारीकियों को पूरी तरह समझें। इससे उन्‍हें लाभ होगा और वे किसान क्‍लब को परिवर्तन एजेंट समझ लाभ की ओर बढ सकते हैं। उन्‍हें नवीनतम टेक्‍नॉलोजी के बारे में जानकारी मिल सकेगी, विशेषज्ञों की मदद ले सकेंगे और अतंत: अपने पेशे में निपुण हो जाएंगे।
    उन्‍होंने बताया कि नाबार्ड अपने किसान टेक्‍नॉलोजी ट्रांसफर फंड के जरिए किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, डेमोप्‍लॉट का विकास और कृषि ज्ञान के लिए किसानों की यात्राओं जैसे प्रयासों का पूरा खर्च वहन करेगा। उन्‍होंने कहा कि आने वाले दिनों में आम और अमरूद के पौधे लगाने के लिए गम्‍भीर प्रयास किए जाएंगे।           नाबार्ड किसान क्‍लब के लिए हर तीन साल पर दस हजार रूपये की राशि आबंटित करता है। तीन साल बाद किसान क्‍लब से जुडे लोगों को प्रोत्‍साहित किया जाता है कि वे वैसी छोटी-छोटी बचत करें जिनसे रोजाना के खर्च पूरा हो सकें और जरूरत पडने पर एक-दूसरे को ऋण भी दे सकें।
    किसान क्‍लब कार्यक्रम के तहत किसानों को तीन सालों के लिए वार्षिक रख-रखाव ग्रांट भी मिलता है। किसान तमिलनाडु में प्रशिक्षण के लिए कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं (पुड्डुकोटई, कोयम्‍बटूर, त्रिची और कांचीपूरम किसान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए चुने गए हैं।  किसानों को इस कार्यक्रम के तहत रायटर मार्केट लाइट लिमिटेड के जरिए स्‍थानीय भाषा में एसएमएस एलर्ट भी हा‍सिल होते हैं। जल प्रबंधन, डेयरी, ओर्गेनिक किसानी तथा सब्‍जी उगाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों की राय भी मिलती है।       क्‍लब की अवधारणा का लाभ उठाते हुए किसानों तथा क्‍लबों को नियमित बैठकें करनी चाहिए। प्रत्‍येक महीने बचत करनी चाहिए ताकि जरूरत पडने पर एक –दूसरे की मदद हो सके। इसके अलावा उन्‍हें ऋण अदायगी के उचित व्‍यवहारों का भी प्रचार करना चाहिए तथा अपने उत्‍पादों के मूल्‍यवर्धन पर ध्‍यान देना चाहिए ताकि वे स्‍वयं अपनी उत्‍पादक कंपनी खडी कर सकें। (PIB)


*लेखक पत्र सूचना कार्यालय मदुरई में सहायक निदेशक हैं
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वि.कासोटिया/गांधी/-निशांत 41     
पूरी सूची-12.02.2013

बुधवार, फ़रवरी 20, 2013

2 दिवसय देशव्यापी हड़्ताल

सैन्ट्रल ट्रेड यूनियनों की 10 मांगो के चार्टर का समर्थन 
युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स की २ दिवसय देशव्यापी हड़्ताल के आह्वान पर सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक कर्मचारीयों तथा आफिसर्स ने २० एंव २१ फरवरी को हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है । युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स की और से बहुत से रोष प्रोग्राम निर्धारित किये गये हैं । 
युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स ने आज केनरा बैंक, भारत नगर चौंक,  लुधियाना के सामने रोष रैली की । कामरेड सुदेश कुमार, चैयरमैन, पंजाब बैंक इम्प्लाईज फैडरेशन, कामरेड नरेश गौड़, कन्विनर, युनाईटेड फोरम आफ बैंक युनियन्स, कामरेड अशोक अवस्थी (पी.बी.ई.एफ), कामरेड गुल्शन चौहान, कामरेड राकेश खन्ना, कामरेड बलजिंद्र सिंह, कामरेड जे.पी.कालड़ा (ए.आई.बी.ओ.सी), कामरेड डी.सी.लांडरा (एन.सी.बी.ई), कामरेड के.एस.संधु, कामरेड गुरबचन सिंह, ((ए.आई.बी.ओ.ए) तथा कामरेड डी.पी.मौड़, महासचिव, ज्वाईंट काउंसिल आफ ट्रेड यूनियन्स  ने बैंक कर्मचारियों को संबोधित किया ।कर्मचारियों को संबोधित करते युनाईटेड फोरम के नेताओं ने कहा कि हड्ताल का आह्वान निम्नलिखित मुद्दों तथा मांगों को लेकर किया गया है:-
१) सैन्ट्रल ट्रेड यूनियनों की १० मांगो के चार्टर का समर्थन 
२) बढ़्ती हुई कीमतों को काबू करो
३) मजदूर विरोधी नितियों को रोको
४) बैंकिग क्षेत्र में सुधारों को बंद करो 
५) स्थाई कार्यों को बाहर से करवाना बंद करो 
६) बैंक कर्मचारियों के बकाया मुद्दों का निपटान करो 

आफिर्स तथा कर्मचारियों को संबोधित करते हुए युनाईटेड फारम आफ बैंक ईम्पलाइज़ के नेताओं ने कहा कि ट्रेड यूनियनों की ऐतिहासिक एकता से एक ही प्लेट्फार्म पर आने के साथ ही, सरकार तथा कार्पोरेट्स द्बारा किए जा रहे आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध करने के लिए नई सम्भावनाओं का रास्ता खुल गया है । खाद्द पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं । अर्थ-व्यवस्था ठ्प है यह उस संकट का द्दोतक है जिससे राष्ट्र घिर गया है । कीमतों को बढ़्ने से रोकने, आर्थिक मंदी को रोकने, गरीबी को दूर करने और काम के नुकसान को सीमित करने के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं है । सरकार की आर्थिक नितियों को लागु करने की होड़ में राजनीतिक और आर्थिक संकट छाया हुआ है । अर्थ-व्यवसथा ठप है । इस चुनौती का सामना करने के लिए कोई रणनीति नहीं है । यह सरकार संकट का पूरा बोझ आम जनता पर डालने की कोशिश कर रही है । राषट्रीय हितों से मुख मोड़कर, सरकार एक के बाद दूसरा ऐसा कदम उठा रही है जो मंहगाई को बढ़ा रहा है तथा आर्थिक मंदी का कारण बन रहा है । सरकार बिना सोचे समझे रोजमर्रा की जिन्दगी के लिए जरुरी वस्तुओं की कीमतों को बढ़ाती जा रही है । यह केवल औद्दोगिक क्षेत्र का संगठित मजदूर वर्ग ही नहीं है जो पूरी तरह से प्रभावित हुआ है बल्कि वह ठेके पर काम करने वाले मजदूर अन आधिकारिक और दिहाड़ी मजदूर हैं जिन पर बहुत बुरा असर पड़ा है । जबकि औद्दोगिक मजदूर जो संगठित है उनको अपने कानून सम्म्त अधिकारों, बोनस तथा मजदूरी को बढ़वाने से बंचित कर दिया जाना तो निश्चित है नहीं असंगठित मजदूर वर्ग को काम के नुकसान, मजदूरी में कटौती, कम से कम मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने और कानूनी बकायों की नामंजूरी के माध्यम से बहुत अधिक निर्दयी असर को झेलना पड़ेगा ।    
बैंकिंग क्षेत्र भी इसका अपवाद नहीं है । सरकारी क्षेत्र के बैंकों में सरकार की ईक्विटी कैपीटल को कम करने और घटाने की कोशिश की जा रही है । सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए सरकार सामाजिक बैंक के दायरे को संकुचित करने के लिए विलय तथा समेकित करने की बात करती है । परन्तु उसी सांस में सरकार निजी क्षेत्र की बैंकिंग मो उत्साहित करने की बात करती है । बड़े-बड़े औद्दिगिक घरानों को अपने निजी बैंक शुरु करने के लिए लाइसेंस देने की बात की जा रही है  धनवान ऋणकर्ताओं को सुविधा देने के लिए उनके बड़े-बड़े कर्जों को बटटे खाते डाला जा रहा है । ग्रामीण शाखाओं को बंद करने और ग्रामीण बैंकिंग को बाहर से कारोबारी प्रतिनिधियों के माध्यम से निजी हाथों में दिया जा रहा है । कारपोरेट ऋण बढ़ रहे हैं । बैंक, राष्र्ट्रीयकरण और उद्देश्यों से दूर जा रहे हैं ।                    
  
बहुत से जरूरी मुद्दे जैसे कि मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सहायता, काम करने का समय निर्धारित करना, बैंकों की पैंशन स्कीम का केंद्रीय सरकारी पैंशन स्कीम की तरह सुधार करना, सप्ताह में पांच दिन की बैंकिग रखने पर बहुत समय से बिचार विमर्श नहीं किया गया है।  स्थायी कार्यों को भी निजी हाथों में सौंपने के प्रयास तेज़ी से किये जा रहे हैं । ये सब कदम स्थायी नौकरियों के लिए तथा पढ़े लिखे नौजवानों के लिए नौकरियों के अवसरों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है । यह बैंक के ग्राहकों के हित के लिए भी बहुत नुक्सानदायक है । बैंकों को और अधिक मजबूत करने के जरुरत है । लेकिन इसके वजाय सरकार बैंकों की कार्यप्रणाली में कुछ और ही तरह के संशोधन करने के लिए तत्पर है  जैसे कि पब्लिक सैक्टर बैंकों का निजीकरण, सरकारी पूंजी को घटाना, पब्लिक सैक्टर बैंकों का विलय, निजी व्यवसाय प्रतिनिधि स्कीम को लागू करना । बैंक देश्वासियों की मेहनत की कमाई का प्रतिनिधित्व करते हैं ।  इसलिए बैंकों को मजबूत बनाने की जरुरत है तांकि यू एस ए और दूसरे देशों में बैंकों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है हमारे बैंकों को उनका सामना नही करना पड़े । लेकिन बदकिस्मति से सरकार हमारे बैंकिंग क्षेत्र को मुक्त छोड़ देने पर तुली हुई है । नई शाखायें खोलने की बजाय पहले से खुली शाखायें जो कि बहुत बेहतर ढ़ंग से कार्य कर रहीं हैं, उन्हें बंद करने की कोशिशें की जा रहीं हैं ।

युनाईटेड फारम के नेताओं ने आगे कहा कि "जो लोगों पर आक्रमण करते हैं उनकी निंदा करो" । सरकारी अत्याचार को रोकने के लिए प्रति रक्षा के उपाय करो । सरकार द्वारा की जा रही अत्याचारी कार्रवाइयों के विरुद्ध सामूहिक हस्तक्षेप करने के लिए यही ठीक समय है । हर जगह क्रोध प्रकट किया जा रहा है । मंहगाई की आग में जल रहे लोग सरकार तथा इसके सभी तंत्रों को रोकने और सरकार की नितियों का विरोध करने वाले लोगों की शक्ति  को दिखाने के लिए सभी  सड़कों पर उतर आये हैं ।  बैंकिंग उद्दोग पूरी तरह से बंद है । सरकार का काम बंद रहना चाहिए । सरकार के आक्रमण का प्रतिरोध करने तथा लोगों के हित में मांगो को मनवाने का एक मात्र यही तरीका है । एकता की शक्ति ने एक अवसर प्रदान किया है, इसका संकट को प्रतिरोध की एक नई लहर में बदल देने  का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए।

नरेश गौड़, 
कन्विनर 
         

सोमवार, फ़रवरी 11, 2013

राष्‍ट्रपति ने किया राज्‍यपालों के 44वें सम्‍मेलन का उद्धाटन

11-फरवरी-2013 17:48 IST
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज राष्‍ट्रपति भवन में किया सम्‍मेलन का उद्धाटन
एकता/अखंडता को कमजोर करने की कोशिशों को नाकाम करते रहें 
सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था भी करें 
सम्‍मेलन का शुभारंभ करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि यह आयोजन दिल्‍ली में एक लड़की के साथ निर्मम बलात्‍कार और उसकी मौत की दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना के साये में हो रहा है जिसने राष्‍ट्र के सामूहिक अन्‍त:करण को झकझोर कर रख दिया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने वर्मा समिति की सिफारिशों पर तत्‍काल कार्रवाई की और आपराधिक कानून (संशोधन) अध्‍यादेश 2013 संसद के बजट सत्र में रखे जाने के लिए तैयार है। उन्‍होंने राज्‍यपालों से आग्रह किया कि वे महिलाओं की सुरक्षा और कल्‍याण में सुधार की दिशा में कार्य करें। उन्‍होंने कहा कि समाज में लोगों की सोच बदलने की जरूरत है, ताकि महिलाओं के साथ सम्‍मानजनक तरीके से व्‍यवहार किया जाए। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में 2012 में सुधार हुआ, लेकिन उन्‍होंने जोर देकर कहा कि हमें देश की एकता और अखण्‍डता को कमजोर करने वाली राष्‍ट्र विरोधी ताकतों की किसी भी साजिश को विफल करने के अपने प्रयासों में अटल रहना होगा। आतंकवाद से निपटने की हमारी प्रतिबद्धता मजबूत रहनी चाहिए। उन्‍होंने सीमावर्ती राज्‍यों को सलाह दी कि वे अतिरिक्‍त सतर्कता बरतें। उन्‍होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विकास से संबंधित विभिन्‍न कार्यक्रमों में तेजी लाने की जरूरत है, ताकि बढ़ती चुनौतियों से मुकाबला किया जा सके। राष्‍ट्रपति ने कहा कि सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था को तत्‍काल मजबूत बनाने की जरूरत है। 

सरकार ने पंजाब और हरियाणा में फसलों की विविधता की तैयारी करते हुए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्वी क्षेत्र में उत्‍पादन बढ़ाने पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए एक रणनीति तैयार की है। असम, बिहार, झारखण्‍ड, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाने के लिए 2010-11 में एक कृषि विकास कार्यक्रम को लागू करने का फैसला किया गया। 2010-11 और 2011-12 के दौरान कार्यक्रम के लिए 400 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई, जिसे 2012-13 के दौरान बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये कर दिया गया। पूर्वी भारत में दूसरी हरित क्रांति पर लगातार ध्‍यान केन्द्रित करने और केन्‍द्र और राज्‍यों की सभी सम्‍बद्ध एजेंसियों द्वारा प्रयास करने की जरूरत है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि पहली हरित क्रांति और उसके पर्यावरण पर प्रभाव से सबक लेकर हमें दूसरी हरित क्रांति करनी चाहिए, जिसमें मिट्टी और जल प्रबंधन के मुद्दों पर शुरू से ही विशेष ध्‍यान दिया जाए। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि खरीद नीति क्षेत्र के किसानों के हित में होनी चाहिए और क्षेत्र में पर्याप्‍त भण्‍डारण सुविधाएं बनाई जानी चाहिए। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगातार जारी प्रयासों के काफी उत्‍साहवर्धक परिणाम रहे। देश में चावल के कुल उत्‍पादन में पूर्वी क्षेत्र के हिस्‍से में काफी बढ़ोत्‍तरी हुई। 2011-12 के दौरान देश में चावल का कुल 104.32 मिलियन टन उत्‍पादन हुआ, जिसमें से पूर्वी क्षेत्र के उत्‍पादन का 55.34 मिलियन टन रिकॉर्ड योगदान रहा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि जल क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार ने राष्‍ट्रीय जल नीति (2012) घोषित की और इसके कार्यान्‍वयन से जल क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों से निपटा जा सकेगा। भारत की आबादी विश्‍व की कुल आबादी का 18 प्रतिशत से ज्‍यादा है, लेकिन केवल चार प्रतिशत के पास उपयोग करने योग्‍य ताजा जल संसाधन हैं। भारत में पानी की कमी है और पानी की प्रति व्‍यक्ति उपलब्‍धता कम हो गई है। हमारी जल्‍दी ही पानी की कमी वाले देशों में गिनती होने लगेगी। एक अनुमान के अनुसार 2050 में 17 प्रतिशत आबादी के पास पानी की कमी होगी। राष्‍ट्रपति ने जोर देकर कहा कि पानी और स्‍वच्‍छता जीवन की मूलभूत जरूरतें हैं और इन्‍हें संतोषजनक तरीके से प्रदान करना सुशासन का संकेत है। भूमिगत जल के प्रबंध को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय, राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम लागू कर रहा है ताकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल प्रदान करने के राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों के प्रयासों को सहायता मिल सके। इसके लिए 2012-13 के बजट में 10,500 करोड़ रुपये का खर्च रखा गया। इस कार्यक्रम पर सावधानीपूर्वक नजर रखने की जरूरत है। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि पानी, स्‍वच्‍छता और स्‍वास्‍थ्‍य के बीच सीधा संबंध है। सुरक्षित पेयजल का इस्‍तेमाल, खुले में शौच, स्‍वच्‍छ भोजन के अभाव से उच्‍च शिशु मृत्‍यु दर और अनेक बीमारियों को जन्‍म देती है। उन्‍होंने कहा कि हमें ग्रामीण और शहरी भारत में उपलब्‍ध जल संसाधनों का इस्‍तेमाल तरीके से करना चाहिए, बेकार पानी को फिर से इस्‍तेमाल योग्‍य बनाना चाहिए और पानी को बर्बाद होने से बचाना चाहिए, भूमिगत जल को रिचार्ज करने और स्‍वच्‍छता की सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। राष्‍ट्रपति ने सभी राज्‍यपालों से आग्रह किया कि वे निर्मल भारत अभियान पर विशेष ध्‍यान दें, जिसे सरकार ने पीने के पानी की सुविधा देने के साथ सभी ग्राम पंचायतों को निर्मल बनाने के लिए शुरू किया है, ताकि गांव वालों को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य और अच्‍छा जीवन मिल सके। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि 2005 से लागू जेएनएनयूआरएम शहरी बुनियादी सुविधाएं सृजित करने के लिए एक प्रमुख निवेश कार्यक्रम है। उन्‍होंने कहा कि शहर और शहरी इलाके जीडीपी का 60 प्रतिशत से ज्‍यादा योगदान देते हैं और देश में रोजगार सृजन का 80 प्रतिशत है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और हम इन्‍हें उचित शिक्षा और हुनर देकर बेहतर भविष्‍य की आशा कर सकते हैं। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि चूंकि राज्‍य विश्‍वविद्यालयों के पास वित्‍तीय संसाधनों की कमी है, 12वीं योजना में एक नए कार्यक्रम राष्‍ट्रीय उच्‍चतर शिक्षा अभियान के माध्‍यम से उच्‍च शिक्षा के लिए केन्‍द्रीय धनराशि को स्‍थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। उन्‍होंने कहा कि 14वें वित्‍त आयोग की स्‍थापना जनवरी 2013 में की गई। उन्‍होंने राज्‍यपालों से कहा कि वे राज्‍य वित्‍त आयोगों के गठन पर ध्‍यान दें, जिसमें पर्याप्‍त कर्मचारी हों, राज्‍य वित्‍त आयोग की रिपोर्ट समय पर राज्‍यपाल को मिले और उस रिपोर्ट पर सरकार समय पर कार्रवाई करे। 

इस दो दिवसीय सम्‍मेलन की कार्यसूची में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था को मजबूत करने, पूर्वी क्षेत्र में दूसरी हरित क्रांति के विस्‍तार, जल प्रबंध और स्‍वच्‍छता, जवाहरलाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) और उच्‍च शिक्षा में गुणवत्‍ता और सुशासन के संदर्भ में राज्‍यपालों की भूमिका शामिल है। 

सम्‍मेलन में उपराष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, नौ केन्‍द्रीय मंत्री, योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष और युआईडीएआई के अध्‍यक्ष भाग ले रहे हैं। 

सम्‍मेलन को सुबह मंत्री और दोपहर में प्रधानमंत्री और उपराष्‍ट्रपति सम्‍बोधित करेंगे। (PIB)
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राष्‍ट्रपति ने किया राज्‍यपालों के 44वें सम्‍मेलन का उद्धाटन वि.कसोटिया/कविता/राजेश-524

गुरुवार, फ़रवरी 07, 2013

21 फरवरी से संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत

07-फरवरी-2013 12:37 IST
पंद्रहवीं लोकसभा के तेरहवें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत और अवधि 
                                                                                                                         Courtesy Photo
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

पंद्रहवीं लोक सभा के 13वें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और सरकारी कामकाज की अनिवार्यताओं के अध्याधीन 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

राष्ट्रपति 21 फरवरी 2013, गुरुवार को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रुप से नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सुबह 11 बजे संबोधित करेंगे। 

मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों पर स्थायी समिति द्वारा विचार और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 मार्च 2013 को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा और 22 अप्रैल 2013 को सदन का सत्र पुनः आरंभ होगा। (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर पी. /विजयलक्ष्मी – 469

संसद के बजट सत्र 

संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत

संसद:बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी से 

21 फरवरी से संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत