शुक्रवार, अप्रैल 10, 2020

जो परिवार चटनी के साथ चावल मिलाकर खाता है

अब सोचिये वो सेनिटाइजर कहाँ से खरीदेगा !
लॉक डाउन आवश्यक था। लॉक डाउन आवश्यक है। इसी से लड़ा जा सकेगा कोरोना के साथ। इस लड़ाई में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इसके साथ ही आवश्यक है उन सवालों की चर्चा जिनकी चिंता न किसी राजनीतिक दल ने की और न ही किसी समाजिक संगठन ने। इन सवालों को उठाया है डा. अनुराग आर्य ने। आप भी देखिये ज़रा एक नज़र:
सोशल मीडिया//फेसबुक: शुक्रवार:10 अप्रैल 2020: 10:45 AM:: (इर्द गिर्द डेस्क की प्रस्तुति)
जो परिवार चटनी के साथ चावल मिलाकर इसलिए खाता है क्योंकि इस समय मसालों के लिये उसके पास पैसे नही है। अब सोचिये वो सेनिटाइजर कहाँ से खरीदेगा।
सेनिटाइजर उसके लिए लक्ज़री है। एक बड़ी आबादी के पास पीने और इस्तेमाल करने के लिये साफ पानी नही है उनसे हम कैसे कहेगे के साबुन से हाथ 20 सेकंड तक धोते रहिये। दूर गांव कस्बो के दिहाड़ी मजदूरो के आंकड़े देखने की जरूरत नही है।
अपनी कालोनी के बाहर बैठे चौकीदार को देखिए ,फल सब्जी बेचते लोगो को देखिए इस पेंडेमिक ने इनके जीवन पर कितना असर डाला होगा । रिक्शा ,ऑटोरिक्शा ना जाने कितने लोग।
ऑस्ट्रेलिया से मेरा दोस्त जब पेंडेमिक में वहां की टेस्टिंग की गाइडलाइन की बात करता है ,मैं कालोनी की गली में टहलते टहलते मुंह पर मास्क बंधे चौकीदार को देखता हूँ उससे कहता हूं यहां दूसरी बड़ी चुनोतियाँ है जिसका भारत जैसे और कई देशों को सामना करना है।
असंगठित क्षेत्रो में दिहाड़ी मजदूर की संख्या आप इमेजिन नही कर सकते ,ऐसे समय मे जब निजी उद्योग वाला भी लगातार दूसरे महीने अपने उधोग और कर्मचारियों की तनख्वाह को लेकर थोड़ा चिंतित हुआ हैं। मजदूरो की क्या हालत होगी आप सोचिये।

हम कहते है ये बीमारी सिर्फ बुजुर्गो को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है ।हमारे यहां के कुपोषित बच्चों और टी बी ग्रस्त आबादी के बारे में सोचिये ,एक कमरे में बसर करते 6 लोगो के बारे में के उन्हें कैसे बतायेगे सोशल डिस्टेंसिंग क्या है ?
तो क्या केवल पैसे वाले लोग सर्वाइवल ऑफ फिटेस्ट की लड़ाई देर तक लड़ेंगे गर पेंडेमिक उसी इंफेक्टिविटी से इस देश मे आया तो ।
लेखक:डा. अनुराग आर्य 
मैं आंकड़ो और ग्राफ से बहुत सी डिटेल आपके सामने बात को अधिक प्रभावी बनाने के लिए रख देता पर वो महत्वपूर्ण नही है ,महत्वपूर्ण था ये बात आपको बताना।
P.S -ब्रिटेन की 32 साल की एक डॉक्टर कहती है उसने रेड कलर के शूज़ अपने आप को" चीयर" करने के लिये पहने है क्योंकी उस पर हस्पताल ने ये जिम्मेदारी दी है के वो लोगो को बताये के कहाँ म्रत्यु का सामना करना पसंद करेंगे घर पर या अस्पताल में। वो बाथरूम में जाकर रो रो कर थक गई है।

मेरे पास मरीज़ों की, डॉक्टर की कई नई कहानियां है पर मैं उन्हें आज दोहराना नही चाहता इसलिए कुछ उम्मीदों की तस्वीरें लगा रहा हूँ। कुछ के नीचे उनकी डिटेल है। 
डा. अनुराग आर्य की फेसबुक Wall से साभार 
(लॉक डाउन की तस्वीर पत्रकार संतोष पाठक ने 10 अप्रैल 2020 को बाद दोपहर खींची)

मंगलवार, अप्रैल 07, 2020

सीरिया:अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन करने में विफल रहे युद्धरत पक्ष

लड़ाई के दौरान अस्पतालों और नागरिक प्रतिष्ठानों को नहीं बख़्शा गय
कोरोना के दौर में भी मानवाधिकारों के उलंघन पर नज़र//6 अप्रैल 2020//मानवाधिकार
सीरिया में दसवें साल में प्रवेश कर चुके बर्बर गृहयुद्ध में शामिल पक्ष अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत तय दायित्वों को पूरा कर पाने में विफल रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को सीरिया में बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी की रिपोर्ट के सारांश की जानकारी देते हुए बताया कि लड़ाई के दौरान अस्पतालों और नागरिक प्रतिष्ठानों को नहीं बख़्शा गया है। महासचिव ने बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी द्वारा तैयार 185 पन्नों की एक रिपोर्ट का सारांश सुरक्षा परिषद को भेजा है।
यह बोर्ड 1 अगस्त 2019 को पश्चिमोत्तर सीरिया में संयुक्त राष्ट्र की मदद प्राप्त राहत केंद्रों और अन्य नागरिक प्रतिष्ठानों के हमले में निशाना बनाए जाने के बाद स्थापित किया गया था। 
ये हमले उन स्थानों पर किए गए जो उस सूची में शामिल हैं जिनमें उल्लेखित स्थानों को सैन्य ठिकानों के रूप में निशाना नहीं बनाया जा सकता क्योंकि वे या तो स्वास्थ्य केंद्र हैं या फिर पूरी तरह से नागरिक प्रतिष्ठान हैं, या फिर संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित हैं।
महासचिव गुटेरेश ने सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में कहा है कि पश्चिमोत्तर सीरिया में असैनिक व मानवीय राहत स्थलों पर लड़ाई के प्रभाव स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय मानवीय राहत क़ानूनों का पालन करने का ध्यान दिलाते हैं। 
युद्ध के दौरान आम नागरिकों व लड़ाकों, नागरिक प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों के बीच भेद करना अनिवार्य है और सैनिक ठिकानों व लड़ाकों पर ही हमले किए जा सकते हैं।
लेकिन महासचिव ने बताया है कि अनेक रिपोर्टों के मुताबिक संबंधित पक्ष इसका पालन करने में विफल रहे।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद का मुक़ाबला करने के लिए सदस्य देशों द्वारा उठाए जाने वाले क़दम अंतरराष्ट्रीय मानवीय राहत क़ानूनों, मानवाधिकार क़ानूनों और शरणार्थी क़ानूनों के अनुरूप होने चाहिए। 
बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी में तीन सदस्य शामिल थे और इसकी अध्यक्षता नाइजीरिया के रिटायर्ड लैफ़्टिनेंट चिकिबिदिया ओबियाकोर ने की थी। 
17 सितंबर 2018 को रूस और तुर्की ने इदलिब में हालात को स्थिर बनाने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। 
पश्चिमोत्तर सीरिया के इदलिब प्रांत में विद्रोही गुट सक्रिय हैं। 
इस सहमति पत्र के बाद भी अनेक घटनाएं सामने आई थीं जिनके बाद जॉंच के लिए बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी का गठन किया गया। 
अपनी रिपोर्ट और उसमें उल्लेखित सिफ़ारिशें यूएन महासचिव को एक ऐसा आधार प्रदान करती है जिसकी मदद से संगठन के मानवीय राहत संसाधनों की बेहतर सुरक्षा व प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए उपायों की शिनाख़्त की जा सकती है।  
रिपोर्ट तैयार करते समय बोर्ड ऑफ़ इन्क्वयारी ने कोई क़ानूनी निष्कर्ष नहीं पेश किए हैं और ना ही क़ानूनी दायित्वों से संबंधित सवालों पर विचार किया है। 
लेकिन रिपोर्ट के सारांश के मुताबिक जिन स्थलों का जायज़ा लेने के लिए कहा गया था उनमें से किसी भी स्थान पर जाने में बोर्ड असमर्थ साबित हुआ क्योंकि इसके लिए सीरिया सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी। 
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों व संस्थाओं, ग़ैर-सरकारी संगठनों, प्रत्यक्षदर्शियों और सैटेलाइट तस्वीरों सहित अन्य स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर छह अलग-अलग स्थानों पर हुए हमलों को विस्तार से समझने का प्रयास किया गया है।  
बोर्ड ने बताया कि अब मिली सूचना की पृष्ठभूमि में कहा जा सकता है कि 3 मई 2019 को इदलिब गवर्नरेट के रकाया प्राथमिक चिकित्सा देखभाल केंद्र पर हमले के पीछे सीरियाई सरकारी सुरक्षा बलों का हाथ होने की प्रबल संभावना है।  
उन्होंने कहा कि यह संभव है कि हमा गवर्नरेट के कफ़्र नबूथा में एक स्वास्थ्य केंद्र पर 7 मई 2019 को हुए हमले में क्षतिग्रस्त होने के पीछे सरकार और उसके साझीदारों का हाथ है।   
14 मई 2019 को एलेप्पो एयरपोर्ट के पास नायराब फ़लस्तीनी शरणार्थी कैंप पर हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी और 29 लोग घायल हुए थे। 
बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी ने संभावना जताई है कि ये हमले या तो हथियारबंद विरोधी गुटों द्वारा किए गए थे या फिर इन्हें चरमपंथी गुट हयात तहरीर अल-शाम ने अंजाम दिया था जिसे सुरक्षा परिषद ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है।   
बोर्ड के मुताबिक इदलिब गवर्नरेट के कफ़्र नोबोल सर्जिकल अस्पताल के 4 जुलाई 2019 को क्षतिग्रस्त होने की वजह सरकार और उसके साथियों द्वारा कार्रवाई हो सकती है। 
इसकी ‘प्रबल संभावना’ जताई गई है लेकिन इस संबंध में पुख़्ता सबूत उपलब्ध नहीं हैं।    
बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी बताती है कि इसकी संभावना प्रबल है कि इदलिब गर्वनरेट में एक बाल संरक्षण केंद्र पर 28 जुलाई 2019 को हमला सरकार या उसके समर्थकों द्वारा किया गया था। 
बोर्ड ने ज़ोर देकर कहा है कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। 
बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी ने हमा गर्वनरेट में अस-सुक़िलाबियाह में राष्ट्रीय अस्पताल पर 26 मई 2019 को हुई सातवीं घटना का निरीक्षण नहीं किया है। 
ना तो यह संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल है और ना ही उसे संगठन से समर्थन प्राप्त है।  

मंगलवार, मार्च 03, 2020

कोई फरिश्ता मिल गया था सरे राह चलते चलते......

 पहली मार्च 2020 को सुबह 9:21 पर पोस्ट किया
विजय जी जैसे लोग मिसाल है कि इंसानियत अभी मरी नही
कल रात एक बहुत अच्छी घटना हुई मेरे साथ। 
प्रतीकत्मक तस्वीर स्काईपॉवर से साभार 
रात को 1:15 पर मैं दिल्ली से गुड़गांव अपने घर लौट रहा था कि कापसहेड़ा बॉर्डर से गुड़गांव में घुसने के 5 मिनट बाद अचानक बाइक खराब हो गई। सुनसान सड़क, सोचा कि बाइक कहि पार्क करके कैब से घर जाया जाए। लेकिन बाइक खड़ी करने की कोई सेफ जगह नही मिल पाई तो मैंने बस स्टैंड पेड पार्किंग तक 4 किलोमीटर पैदल चलने का फैंसला लिया। मैं परेशान होकर मन मे विचार कर रहा था क्या मैं ऐसे सुबह तक भी अपने घर सेक्टर-103 में पहुच पाउगा जो कि 12 किलोमीटर दूर है। अभी कुछ दूर ही चला था कि एक मारुति कंपनी में 8 वर्ष से कार्यरत 30 वर्षीय अलवर राजस्थान के विजय बोहरिया जी नाम के बाइक सवार फरिश्ते ने जॉब से लौटते वक्त खुद बाइक रोक कर पूछा कि कोई मदद चाहये क्या। मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने कहा कि धन्यवाद आप रात के डेड बजे बिना डर खोंफ के एक अनजान की मदद को आए। आपका मैं किन शब्दो मे धन्यवाद करू.... विजय जी से बात करके पता चला कि विजय जी सेक्टर 105 की तरफ ही जा रहे है जो कि मेरे घर से केवल 2 किलोमीटर दूर है। विजय जी और मैंने फैंसला लिया कि क्योकि बाइक पार्क करने की कोई सेफ जगह नही है तो विजय जी मेरी बाइक को अपनी बाइक से पैर से धक्का लगाएगे और हम बस स्टैंड पेड पार्किंग में बाइक खड़ी करके उनकी बाइक पर सेक्टर 105 की तरफ निकल पड़ेगे। ऐसा हुआ भी और मैं रात के 2 बजे तक अपने घर विजय जी द्वारा सुरक्षित पहुचा दिया गया। विजय जी से बात करके पता चला कि विजय जी आप बहुत शरीफ इज्जतदार इंसान है। 
विजय जी जैसे लोग मिसाल है कि इंसानियत अभी मरी नही। कुछ लोग अपनी जान की बाजी लगाकर रिस्क लेकर दूसरों की मदद करने को आज भी ततपर है। विजय जी आपको मैं वचन देता हूं कि जीवन मे कभी कोई कष्ट आए तो मुझ नाचीज इंसान को एक बार आज़मा कर देख लेना। 
विजय जी आपकी हर जायज मदद को सदैव तत्पर---🙏🏼
विनीत लूथरा
बाइक को पीछे अपनी बाइक से पैर से धक्का लगाना 
विनीत लूथरा जी के फेसबुक प्रोफाईल से साभार 

 कुछ अन्य दिलचस्प लिंक:
छत्तीसगढ़ मेल में पढ़िए:
आराधना टाईम्ज़ में पढ़िए:
मोहाली स्क्रीन में पढ़िए:


रविवार, जनवरी 26, 2020

लाल किले में आज भारत पर्व 2020 का रंगारंग उद्घाटन

प्रविष्टि तिथि: 26 JAN 2020 8:38PM by PIB Delhi
कार्यक्रम 31 जनवरी तक चलेगा-प्रवेश निशुल्क होगा 
भारत पर्व 2020 का मुख्य विषय ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और ‘महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह’
भारत की छवि को पेश करने के लिए वार्षिक कार्यक्रम भारत पर्व का आयोजन दिल्ली में किया गया है। पर्यटन मंत्रालय के विशेष सचिव और वित्त सलाहकार श्री राजीव कुमार चतुर्वेदी ने आज नई दिल्ली के लाल किले के मैदान में नगाड़ा बजाकर और तिरंगे गुब्बारों को उड़ाकर भारत पर्व का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह के दौरान पर्यटन महानिदेशक श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, पर्यटन उपमहानिदेशक श्रीमती रूपिन्दर ब्रार और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 
उद्घाटन समारोह के बाद सशस्त्र बलों के बैंड ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया।
भारत पर्व 2020 लाल किले के सामने ज्ञान पथ और लाल किले के मैदान में 26 से 31 जनवरी, 2020 तक मनाया जा रहा है। भारत पर्व का उद्देश्य भारतीयों को प्रोत्साहित करना है कि वे भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करें और भारतवासियों में ‘देखो अपना देश’ की भावना पैदा हो सके। भारत पर्व के दौरान 50 से अधिक फूड-स्टॉल, 27 दस्तकारी/हथकरघा स्टॉल और 27 विषय आधारित मंडपों को स्थापित किया गया है।
भारत पर्व 2020 का मुख्य विषय ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और ‘महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह’ है। भारत पर्व जनता के लिए 26 जनवरी, 2020 को 5 बजे सांय से लेकर 10 बजे रात तक खुला रहेगा। शेष दिनों में 27 से 31 जनवरी, 2020 को दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक यह कार्यक्रम खुला रहेगा।
भारत पर्व में गणतंत्र दिवस परेड की झांकियां, सशस्त्र बलों के बैंड प्रदर्शन, राज्य सरकारों/ केंद्रशासित प्रदेशों और मंत्रालयों के पर्यटन मंडप, राज्य सरकारों/ केंद्रशासित प्रदेशों के दस्तकारी और हथकरघा स्टॉल, ट्राइफेड/ दस्तकारी/हथकरघा आयोग के स्टॉल, राज्य सरकारों, होटल प्रबंधन संस्थानों और अन्य संगठनों के फूटकोर्ट, उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा राज्य सरकारों/ केंद्रशासित प्रदेशों/ होटल प्रबंधन संस्थानों द्वारा खान-पान प्रदर्शन मुख्य आकर्षण हैं।
भारत पर्व में प्रवेश निशुल्क है और आगंतुकों को प्रवेश करने के लिए अपना पहचान पत्र दिखाना होगा। (PIB)
***
आर.के.मीणा/आरएनएम/एकेपी/सीएस-5486

शुक्रवार, जनवरी 10, 2020

कलम वाले कलम की साधना को मज़बूत बनाएं

भाषा को सियासत की साज़िशों का शिकार न होने दें 
लुधियाना: 10 जनवरी 2020: (कार्तिका सिंह//इर्द गिर्द डेस्क):: 
भाषा को सम्मान देने की बजाये उसे हथियार बना लिया गया है। सियासत एक बार फिर अपनी नापाक चाल चल रही है। कभी पंजाबी के खिलाफ, कभी अंग्रेजी के खिलाफ और कभी हिंदी के खिलाफ। कुल मिला कर इन खतरनाक साज़िशों का खतरनाक प्रभाव मानवता पर ही पड़ता है। समाज के टुकड़े करने वाले इसका फायदा उठाते हैं। सियासत वाले लोग तो गुंडागर्दी भी कर सकते हैं। किसी न किसी भाषा पर कालख भी पोत सकते हैं, किसी भाषा प्रेमी की हत्या भी कर सकते हैं। लेकिन कलम वाले तो इनकी तरह नहीं सोच सकते। इसके बावजूद उन्हें और दृढ़ बनना होगा। कलम की साधना को और और मज़बूत बनाना होगा। भाषा को समाज के फायदे का ज़रिया बनाना होगा न कि विघटन का। भाषा समाज की एकता के काम आये न कि सियासत का हथियार बने। आज विश्व हिंदी दिवस पर हम इस बात  संकल्प कर सकें तो सचमुच बहुत ही अच्छा होगा। इस विशेष दिवस पर प्रस्तुत है मेरी एक काव्य रचा जिसे शब्द भास्कर ने पुरस्कृत भी किया था। 
हर ह्रदय में प्रेम का जिसने दीप जलाया; हिंदी है!  
दिल को दिल से जोड़ के जिसने देश बनाया; हिंदी है।
कदम से कदम मिला के जिसने साथ निभाया; हिंदी है।

कई धर्म थे, कई वर्ग थे, रोज़ ये झगड़े आम हुए,
हर ह्रदय में प्रेम का जिसने दीप जलाया; हिंदी है।

उर्दू फारसी कठिन बहुत थे, इंग्लिश भी आसान न थी,
 झट से आ कर इक जादू जिसने सिखलाया; हिंदी है।

पढ़ने लिखने की हर दिल में ललक उठे; आसान न था,
हर ह्रदय को जोड़ के जिसने जोश जगाया; हिंदी है।

हर इक हाथ में इक पुस्तक और लोग दीवाने पुस्तक के,
हर पुस्तक को हर इक तक जिसने पहुंचाया;हिंदी है।

दुनिया का उत्कृष्ठ साहित्य; पढ़ा है मैंने हिंदी में;
मुझको हर लेखक से जिसने आ मिलवाया; हिंदी है।

हिंदी देश की बिंदी है; यह सच है; इसको मान भी लो,
आज यहां भी हम सबको जिसने मिलवाया; हिंदी है।
                                                    ---कार्तिका सिंह 

शनिवार, जनवरी 04, 2020

नहीं रहे भगीरथ नाथ चोपड़ा

शोकाकुल परिवार के पास पहुंचे परवीन बांसल और अन्य 
लुधियाना: 4 जनवरी 2020: (रेक्टर कथूरिया और इर्द गिर्द डेस्क)::
ज़िंदगी इतनी भागदौड़ करवाती है कि सांस तक ले पाना कठिन सा लगने लगता है। इतने झमेलों में से एक छोटी सी उम्र को चुरा पाना भी कभी कभी नामुमकिन सा लगने लगता है। ऐसे में अगर कोई अच्छा दोस्त मिल जाये तो नामुमकिन भी मुमकिन जैसा लगने लगता है। कुछ इसी तरह मिले थे मित्र प्रदीप चोपड़ा जी। टीवी चैनल की नौकरी। हमारे रात्रि शिफ्ट वाले ग्रुप को खबरों के बुलेटिन तैयार करते करते आधी रात हो जाती। टीवी चैनल से घर लौटना आधी रात के समय बहुत मुश्किल सा था। हालांकि चैनल की अपनी वैन भी थी जो मुझे घर छोड़ कर आती थी लेकिन कभी कभी उसका ड्राइवर रात की रोटी खाने चला जाता तो उसकी इंतज़ार के बिना कोई चारा न होता। एक रात इसी तरह ड्राईवर की इंतज़ार में चाय की चुस्कियां ले रहा था कि अचानक प्रदीप चोपड़ा जी सामने से आते नज़र आए। शायद उनके हाथ कोई देर शाम या रात को कोई बड़ी खबर लग गई थी। आते ही बोले मैं ज़रा फुटेज जमा करवा लून फिर मेरे साथ ही घर चलना। हम दोनों का घर एक दुसरे के काफी नज़दीक है इसका पता मुझे उसी दिन चला। ऊन बाज़ार जिसे पहले पहल मोच पुरा कहा जाता था और आजकल उसे ट्रंकों का बाजार भी कहा जाता है। उस बाजार के एक तरफ चोपड़ा जी का घर और एक तरफ हमारा घर। रास्ते की गलियों में अब छोटे छोटे बाजार खुल गए थे। उन्हीं दुकानों  में आती थी प्रदीप चोपड़ा जी के भाई की दुकान। हौज़री का काम था। प्रदीप जी के पिता जी भी अक्सर उसी दूकान पर बैठते।  कभी दुकान पर और कभी घर पर उनसे मिलना होता। बहुत ही प्यार और अपनत्व से सब का हालचाल पूछते। आशीर्वाद देते। साथ ही उनके चेहरे पर मुस्कराहट और चमक बढ़ जाती। बहुत मुश्किल था उनके सामने कोई झूठ बोल पाना। प्रदीप जी को कहीं ले जाना होता तो कोई न कोई बहाना सोचना पड़ता था। इस तरह उनके साथ एक स्नेह भी था और बड़ों की शख्सियत वाला डर भी था। उनके पास बैठ कर ज़िंदगी की चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत आती। अब वह नहीं रहे ,हिम्मत कौन देगा यह सवाल गंभीर बन कर खड़ा हो गया है।
मुझे याद है प्रदीप जी बताया करते थे। जब सभी भाईयों को उनका हिस्सा मिल गया तो बाकी बचे प्रदीप जी। अब इतनी दुकानें भी कहाँ से आतीं? परदीप जी ने पिता से पूछना मेरा क्या बनेगा? जवाब मिलता सबसे अच्छा। एक दिन प्रदीप जी ने पूछ लिया वह कैसे? मेरे हिस्से में तो दुकान ही नहीं बची। पिता जी बोले मैं तुझे एक नहीं कई दुकानें दूंगा। वास्तव में उन्होंने प्रदीप जी को अकाऊंट्स का काम सिखा दिया। बोले जहां जा कर भी काम करेगा समझना वह तेरी दुकान ही है। उसे बेगाना न समझना। अपना समझ कर ही काम करना।  सारा  इसी हिसाब किताब पर निर्भर होता है। आज प्रदीप चोपड़ा जी के पास बहुत सी फर्में अर्थात बहुत सी दुकानें हैं। उनके पिता मान्यवर भगीरथ नाथ चोपड़ा की की क्रिया बाजवा नगर के वेद मंदिर में थी। गरुड़ पुराण के पाठ का भोग और रस्म पगड़ी भी थी। मंदिर के हाल में आज कितने लोग आये--कितनी भीड़ थी--कैसे पूरा हाल भरा हुआ था--काश वह देख पाते। लग भी रहा था जैसे अभी कहीं से आ जायेंगे और उसी मनमोहक  मुस्कान से हम सब को हौंसला देंगें।  
प्रदीप चोपड़ा जी और परिवार के अन्य सदस्यों का दुःख बांटने के लिए हम सभी लोग भी पहुंचे। मेरे साथ डाक्टर भारत (एफ आई बी मीडिया), पत्रकार-सतपाल सोनी, पत्रकार एम एस भाटिया और कुछ अन्य लोग भी थे। हाल में बहुत से समाजिक और राजनीतिक लोग भी पहुंचे हुए थे। राजनीतिक और समाजिक चेतना को जगाने में अतिसक्रिय राजीव मल्होत्रा भी विशेष तौर पर पहुंचे हुए थे। टीवी चैनलों में कैमरामैन की ज़िम्मेदारी निभाने वाले मुकेश डोगरा भी आए। मानवता के दर्द को महसूस करने वाले पत्रकार जय कुमार भी अपनी टीम के साथ आये हुए थे। -रेक्टर कथूरिया 

गुरुवार, दिसंबर 19, 2019

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक

19 DEC 2019 6:05 PM by PIB Delhi 
 कहा ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने 
ग्रामीण विकास मंत्रालय का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार समारोह 2019 आयोजित
नई दिल्ली: 19 दिसंबर 2019: (पीआईबी//इर्द गिर्द ब्यूरो)::
भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनाने का बड़ा सपना गांवो के विकास के बगैर संभव नहीं है। ग्रामीण विकास ,कृषि और किसान कल्‍याण तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर  ने मंत्रालय के राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गांवों का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। ग्रामीण और शहरी विकास के बीच के अतंर को पाटने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि गांवों को आत्‍मनिर्भर बनाने के साथ ही कृषि को आर्थिक रूप से ज्‍यादा मुनाफे वाला बनाना जरूरी है।श

श्री तोमर ने इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी  योजना, प्रधानमंत्री  आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, दीनदयाल अंत्‍योदय योजना, दीनदयाल उपाध्‍याय ग्रामीण कौशल योजना, श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी  रूअरबन मिशन और सभी एसआईआरडीस का परिचालन करने वाले प्रशिक्षण विभाग में के 266 लोगों को उनकी उत्‍कृष्‍ट सेवाओं के लिए पुरस्‍कार प्रदान किए।  

ये पुरस्‍कार विभिन्‍न श्रेणियों में बेहतरीन प्रदर्शन्‍ करने वाले राज्‍यों, जिलों,ब्‍लॉकों, ग्राम पंचायतों और कर्मचारियों को प्रदान किये गए।

ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री साध्‍वी निरंजन ज्‍योति ने पुरस्‍कार पाने वालों को बधाई दी और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर वर्गों को ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से चलाए जाने वाले विभिन्‍न कार्यक्रमों का काफी लाभ मिला है, उन्‍हें रहने के लिए पक्‍के पकान, पास के बाजारों तक पहुंचने के लिए हर मौसम में इस्‍तेमाल की जा सकने वाली सड़कें और रोजगार के अवसर मिले हैं। वृद्धों, विधवाओं और निशक्‍तजनों को पेंशन की सुविधा तथा कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण की सुविधा भी मिली है।