बुधवार, जनवरी 25, 2012

लुधियाना में भी चुनाव अभियान ज़ोरों पर

स्वपन सुंदरी हेमा मालिनी नें भी की सतपाल गोंसाई के लिये वोट की अपील
लुधियाना 25 जनवरी (गुलशन) 30 जनवरी को होंने जा रहे पंजाब विधान सभा चुनावों के चलते लुधियाना के विधान सभा क्षेत्र सेंट्रल के भाजपा-अकाली गठबंधन के प्रत्याशी सतपाल गोंसाई की चुनाव मुहिंम को गति देने के लिये किदवाई नगर स्थित मैंबर पार्लीयामैंट व  लुधियाना की बहु और प्रख्यात बालीवुड़ अभिनेत्री स्वपन सुन्दरी हेमा मालिनी ने एक प्रभावशाली चुनाव रैली में पहुंच कर बोले सो निहाल के जैकारे के साथ शुरूआत करते हुऐ लोगों को संबोधित करते कहा  कि पंजाब में दूसरी बार आई है और इस से पहले भी वह गोंसाई जी के चुनाव प्रचार के लिये लुधियाना आई थी।  उन्होंने कहा कि पंजाब से मुझे प्यार है क्योंकि यहां का खाना, पानी और पंजाब के लोगों की (बल्ले बल्ले). उन्होंने कहा कि  अब में एक बार फिर सतपाल जी के लिये आप लोगों से वोट देकर जीत दिलाने की अपील करने आई हूँ उन्होंने गोंसाई दी को शेरे पंजाब सतपाल कहते हुऐ कहा कि इन्होंने पंजाब के अस्पतालों में ऐम्बोलैंस बस सेवा चालु करवाई है और रोज गार्डन, चिल्डऱ्न पार्क, गन्दा नाला को कवर करने का काम, गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में शगुन देने और न्रून हत्या पर रोक लगाने आदि अच्छे कार्य करवाये हैं जो जनता के हित में हैं। उन्होंने जोदार अपील में कहा कि पंजाब में सरदार बादल को फिर मुख्यमन्त्री बनाने के लिये, विकास के बल पर एक बार फिर अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार कों सत्ता में लाने के लिए अपना वोट अकाली भाजपा को दें। इस अवसर पर जिला भाजपा प्रधान राजीव कतना, ओम प्रकाश रतड़ा, संजय कपूर, नरेश धीगान, पार्षद गुरदीप सिंह नीटू,बजुर्ग अकाली नेता कुलवंत सिंह दुखिया, ज्ञान चंद गुप्ता, सुभाष वर्मा, प्राण नाथ भाटिया आदि सैकड़े अकाली व भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित हुए। 

बहादुरी दिखाने पर किया देश और दुनिया ने फखर

राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार से सम्‍मानित बच्‍चों ने की उप राष्‍ट्रपति से मुलाकात
वीरता पुरस्‍कार-2011 से सम्‍मानित बच्‍चों ने आज यहां एक समारोह में भारत के उपराष्‍ट्रपति श्री हामिद अंसारी से मुलाकात की। उपराष्‍ट्रपति ने बहादुर बच्‍चों तथा उनके परिवार के सदस्‍यों से बातचीत की। बहादुर बच्‍चों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्‍होंने कहा कि इन बच्‍चों में अपार क्षमता और सामर्थ्य है तथा वह निश्‍चित रूप से अपने जीवन में उच्‍च लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करेंगे। बच्‍चों ने अपने साहस और बहादुरी के कारनामें उपराष्‍ट्रपति से बांटे। 

इस वर्ष 24 बच्‍चों को राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार प्राप्‍त हुए हैं। इनमें से पाँच बच्‍चों को यह पुरस्‍कार मरणोपरांत दिया गया है। विजेता बच्‍चों को एक पदक, प्रमाणपत्र और नकद राशि ईनाम के रूप में दी गई। प्रतिष्ठित भारत पुरस्‍कार रूद्रप्रयाग (उत्‍तराखंड) के स्‍वर्गीय मास्‍टर कपिल सिंह (15 वर्ष) को दिया गया जिसने अदम्‍य साहस का प्रदर्शन करते हुए अपने स्‍कूल के बच्‍चों की जान बचाई। गीता चोपड़ा पुरस्‍कार अहमदाबाद की कुमारी मित्‍तल महेंद्रभाई (12 वर्ष 2 महीने) को दिया गया। संजय चोपड़ा पुरस्‍कार आज़मगढ़ (उत्‍तर प्रदेश) के मास्‍टर ओम प्रकाश यादव (11 वर्ष 5 महीने) को दिया गया।

इस योजना की शुरूआत के बाद से भारतीय बाल कल्‍याण परिषद द्वारा 584 लड़कों तथा 240 लड़कियों सहित 824 बच्‍चों को पुरस्‍कार दिए गए हैं। विजेताओं को परिषद की छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत उनकी स्‍कूली शिक्षा पूरी होने तक वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाएगी। 

मंगलवार, जनवरी 24, 2012

धूमधाम से हुआ पूर्वोत्‍तर संस्‍कृति केंद्र का उद्घाटन

संस्‍कृति मंत्रालय कला संस्‍कृति को बढ़ावा संरक्षण देने को प्रतिबद्ध
कुमारी सैलजा ने किया पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के साथ वायदा
केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री ने यह बताया कि उनका मंत्रालय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की सम्‍पन्‍न, विविध तथा अनोखी कला एवं संस्‍कृति को बढ़ावा तथा संरक्षण देने को अत्‍यंत महत्‍व देता है। उन्‍होंने यह बात पूर्वोत्‍तर संस्‍कृति केंद्र के उद्घाटन अवसर के दौरान कही। क्षेत्र की सांस्‍कृतिक परंपराओं की सुरक्षा के भाग के रूप में संगीत नाटक अकादमी ने पूर्वोत्‍तर केंद्र शिलांग में गठित किया है। इसने गुवाहाटी में सत्रिया केंद्र गठित किया है, जो असम की सत्रिया परंपरा के बारे में देखभाल करता है। 

उन्‍होंने यह भी बताया कि दीमापुर में पूर्वोत्‍तर आंचलिक सांस्‍कृतिक केंद्र थियेटर रूपांतरित योजना को लागू कर रहा है। इसके अंतर्गत पूर्वोत्‍तर क्षेत्रों में थियेटरों की सुरक्षा और इनके लिए सहायता दी जाती है। मंत्री महोदया ने यह भी बताया कि नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा पूर्वोत्‍तर नाट्य समारोह अलग से आयोजित करता है, जिसमें प्रतिष्ठित निर्देशकों के नाटक तथा पूर्वोत्‍तर की प्रमुख परंपराओं को दर्शाया जाता है। (तस्वीर व विवरण: पत्र सूचना कार्यालय)

सोमवार, जनवरी 23, 2012

भारत निर्माण स्‍वयंसेवी-ग्रामीण जागरूकता के संवाहक

परिवारों तथा विभिन्‍न विभागों के बीच सहज कड़ी
पत्र सूचना कार्यालय अगरतला की ओर से कराई गई.एक संगोष्ठी में बेबाक होकरसवाल पूछती एक महिला. इस संगोष्ठी का आयोजन भारत निर्माण जन सूचना अभियान के अंतर्गत २० जनवरी को राज नगर दक्षिणी त्रिपुरा में किया गया था. (फोटो: पी.आई.बी.) 
भारत निर्माण स्‍वयंसेवी एक ऐसा व्‍यक्‍ति है जो ग्रामीण परिवेश से जुड़ा है वह अपनी मर्जी से परिवारों तथा विभिन्‍न विभागों के मेजबानों के बीच सहज कड़ी के रूप में कार्य करता है। वह सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्‍न कार्यक्रमों के लाभ बिना पहुंच वाले ग्रामीणों को दिलवाना सुनिश्‍चित करता है। दूसरे शब्‍दों में, वे कार्यक्रमों तथा इन कार्यक्रमों की पहंच से दूर बिना के लोगों के बीच मील का आखिरी मानवीय संपर्क है। अब तक देश में 31,000 स्‍वयंसेवी को भारत निर्माण स्‍वयंसेवी के रूप में नामांकित कर लिया गया है। इस वर्ष मार्च तक 1,60,000 को नामांकित करने का लक्ष्‍य है।
भारत निर्माण स्‍वयंसेवी क्‍यों?
     सरकार तथा संबंधित राज्‍य सरकारें कई दशकों से विभिन्‍न कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों को संचालित कर रही हैं। तथापि, कई मूल्‍यांकन अध्‍ययनों में यह दर्शाया गया है कि कार्यक्रमों के कार्यान्‍वयन में कमी रह गई और गरीबी से नीचे रहने वाले कई संबद्ध परिवारों को वांछित लाभ नहीं मिल पाया। विभिन्‍न स्‍तरों पर इन सुविधाओं का लाभ देने वालों का आकार सीमित रहने तथा पर्याप्‍त समय न देने पर लक्षित ग्रामीण घर परिवारों को इनका लाभ भी समय पर नहीं मिल पाया तथा कहीं पर ऐसे लोगों को भी लाभ मिल गया जिन्‍हें इसकी जरूरत नहीं थी।

     ग्रामीण घर परिवारों के साथ आखिरी जुड़ाव के रूप में मानवीय चेहरा प्रस्‍तुत करने के लिए यह सोचा गया कि क्षमतावान युवकों का उपयोग भारत निर्माण स्‍वयंसेवी के नाम से किया जाए जो ग्रामीण घर परिवारों के बीच कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाएंगे जिससे बेहतर योजना तथा कार्यक्रमों का सुचारू कार्यान्‍वयन हो और पारदर्शिता तथा जवाबदेही लाई जा सके।
वे क्‍यों स्‍वयंसेवी बने?
पिछले काफी समय से देखा जा रहा था कि ग्रामीण परिवेश में स्‍थानीय शक्‍ति के समूह बढ़ने, विभिन्‍न समुदायों के बीच एकता का अभाव, उनसे संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता का अभाव, कार्यक्रम की कार्यान्‍वयन प्रक्रिया के पहलुओं के बारे में जागरूकता का अभाव जैसे मुद्दे सामने आ रहे थे इससे विभिन्‍न सरकारी कार्यक्रमों का लाभ गरीब परिवारों को नहीं पहुंच पा रहा था। इसके साथ ही, विभिन्‍न कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों की योजना की प्रक्रिया में ग्रामीण परिवारों की सहभागिता पर्याप्‍त नहीं थी। इसलिए, ग्रामीणों की विशेष तौर पर युवाओं की स्‍वयंसेवी भागीदारी तथा ग्राम विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में भाग लेने का अवसर प्रदान करना आवश्‍यक समझा गया। भारत निर्माण स्‍वयंसेवकों ने अपने कार्यों से अपने व्‍यक्‍तित्‍व, व्‍यवहार में काफी परिवर्तन महसूस किया। उन्‍होंने सम्‍मान और पहचान प्राप्‍त की तथा जहां उन्‍होंने कोई विशिष्‍ट कार्य किया तो उनमें यह भाव पैदा हुआ कि ‘यह हमने किया’।

     प्रशिक्षण में मूल्‍यों तथा नैतिकता के साथ-साथ सरकार की सभी विकास योजनाओं के उद्देश्‍यों पर बल दिया गया है। इससे उनका ध्‍यान उनके समुदाय में व्‍याप्‍त विभिन्‍न बुराइयों जैसे कि शराबखोरी, जल्‍दी स्‍कूल छोड् देने के साथ ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था, सुशासन और योजना की ओर गया। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत तथा समितियों के अंतर्गत मुद्दों का निपटान, अनुशासन, सहजता तथा निर्धारित ढंग के होने से वे स्‍वयं अचंभित थे और ऐसा उन्‍होंने पहले सोचा भी नहीं था। वे शक्‍तिशाली स्‍तंभों से भी सामना करने लगे और उन्‍हें अपने विकास कार्यक्रम के अनुरूप ढालने में समर्थ रहे।

     अनेक गांवों में गलियों की सफाई की, कूड़े का निपटान किया, टैंकों को साफ किया, श्रमदान करके सड़क तैयार की, सूचना प्रदान की। कई बार उन्‍होंने अपनी कमाई भी लगाई। उनमें से कुछ ने बेसहारा परिवारों, जिनमें केवल महिलाएं घर चलाती थीं जिनके लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली से प्राप्‍त चावल पूरा नहीं पड़ता था, ऐसे परिवारों की पहचान की और कार्यकर्ताओं ने ऐसे परिवारों की मदद की और यह सुनिश्‍चित किया कि वे हर रोज अपने तीन समय का भोजन प्राप्‍त कर सकें। कई स्‍वयंसेवी अपने गांव में रोशनी लाने के लिए ऊर्जा के वैकल्‍पिक स्रोतों की योजना सरकार से धनराशि प्राप्‍त करने के लिए बना रहे हैं। कुछ अपनी गलियों में सौर ऊजा से रोशनी तथा कुछ सौर कुकर और बिजली के लिए योजना बना रहे हैं। गांव में विभिन्‍न समुदायों के बीच काफी समय से चल रहे झगड़ों का निपटारा कर लिया गया है और भाईचारा पनपा है। भारत निर्माण स्‍वयंसेवी ने मंडल स्‍तर पर सभी विभागों से संपर्क कर समुदायों के पूरे नहीं किए गए अनुरोधों के संबंध में उत्‍तर प्राप्‍त किए हैं। इनमें से अनेक ने दफनाने के लिए स्‍थान, खेल के मैदान तथा कुछ ने अपने गांव में बस चलाने के लिए प्रशासन से पहचान तथा अधिसूचना प्राप्‍त कर ली है। प्राय: सभी गांव वालों ने यह सूचित किया है कि उन्‍होंने ऐसी दुकानें (शराब की दुकान) बंद कराने के प्रयास किए और उनमें से कई ऐसी दुकाने बंद कराने में सफल रहे। कुछ ने गांव की दुकानों में पान और गुटकों की बिक्री बंद करा दी। कइयों ने सौ प्रतिशत आईएसएल कवरेज के बारे में अनेक लोगों को सूचित किया है।

     कइयों ने प्रशासन से नालियों की लाइन के निर्माण के लिए संपर्क किया है। एक गांव में प्रत्‍येक घर परिवार के लिए गड्ढ़ा भरना निश्‍चित किया गया है, यह उनका लक्ष्‍य है और उन्‍हें यह विश्‍वास कि वे इस कार्य को शीघ्र ही पूरा कर लेंगे। कुछ गांवों में खुली हवादार लाइब्रेरी शुरू की गयी हैं। अख़बार और पत्रिकाएं शाम तक छोटे कमरे में रख दी जाती हैं और शाम को इन्‍हें पेड़ के पास चौपाल में पढ़ने के लिए पहुंचा दिया जाता है। बाद में इन्‍हें फिर से स्‍वयंसेवी  प्रभारीद्वारा कमरे में वापस पहुंचा दिया जाता है।

     आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास अकादमी (अपार्ड) के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों को स्‍वयं सेवा की भावना का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रबुद्ध व्‍यक्‍तियों, उस्‍मालिया विश्‍वविद्यालय के साइक्‍लोजिस्‍ट, ब्रह्म कुमारियां, भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम द्वारा शुरू किया गया लीड इंडिया फाउंडेशन, अनुभवी पत्रकार तथा प्रोग्रेसिव सरपंच तथा अपार्ड से लोगों को शामिल किया गया।

इस प्रयोग की सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह रही कि यह सभी स्‍वयंसेवी किसी भी स्रोत से कोई वित्‍तीय सहायता या मानदेय प्राप्‍त नहीं करते। इसके विपरीत कई मामलों में वे जहां आवश्‍यकता पड़ती है अपनी खुद की धनराशि खर्च करते हैं। उन्‍होंने यह सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण समुदाय निष्‍क्रिय नहीं हैं और वे अपनी समस्‍याओं का समाधान करने में सक्षम हैं। उन्‍होंने यह भी सिद्ध कर दिया है कि वे अपने समुदाय के अधूरे सपनों को पूरा कर सकते हैं तथा वे ग्रामीण आंध्र प्रदेश के स्‍तर में गुणवत्‍ता परक सुधार लाएंगे। एक खास बात जो अपार्ड ने देखी कि भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच कार्य का बेहतर माहौल बना जबकि यह लगता था कि इनके बीच टकराव तथा तकरार न हो जाए। यात्रा जारी है और भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों से लम्‍बी सूची प्राप्‍त करने की अपेक्षा है।                                       {
पी.आई.बी.} 
***

*ग्रामीण विकास मंत्रालय से प्राप्‍त सामग्री के आधार पर

बाल श्रम पर नवगठित केन्‍द्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक

बच्‍चों के भविष्‍य को सुरक्षित बनाने का आह्वान:खड़गे ने की अध्यक्षता
केन्‍द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में बच्‍चों के भविष्‍य को सुरक्षित बनाने के लिए और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया है। श्री खड़गे आज बाल श्रम पर नवगठित केन्‍द्रीय सलाहकार बोर्ड की पहली बैठक की अध्‍यक्षता कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि उनके मंत्रालय को बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) कानून 1986 के कार्यान्‍वयन का महत्‍वपूर्ण अधिकार मिला हुआ है, जिसके तहत 14 वर्ष की आयु से कम के बच्‍चों को 16 व्यवसायों एवं 65 प्रक्रियाओं में लगाए जाने की मनाही है। ये व्‍यवसाय हैं कसाई घर/पशु वध स्‍थल, मोटर व्यवसाय, हानिकारक अथवा ज्‍वलनशील सामग्री को संभालना, कपड़ा उद्योग, खान उद्योग, घरेलू नौकरों के तौर पर, ढाबों में, तैराकी, सर्कस और हाथियों की देख-रेख। अपने मंत्रालय की उपलब्धियों का ब्‍यौरा देते हुए श्री खड़गे ने कहा कि राष्‍ट्रीय बाल श्रम नीति के अनुपालन में वर्ष 1988 में बाल श्रमिकों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत 271 जिलों की पहचान की गई और वर्तमान में यह योजना 20 राज्‍यों के 266 जिलों में लागू है, जिसमें लगभग 3.39 लाख बच्‍चों को 7300 विशेष विद्यालयों में पढ़ाया जाता है। इस योजना के अंतर्गत बच्‍चों को काम से हटाकर विशेष स्‍कूल में भर्ती कराया जाता है और उन्‍हें ब्रिज शिक्षा, व्‍यावसायिक शिक्षा, 150 रुपये का मानदेय, मध्‍यान भोजन तथा स्‍वास्‍थ्‍य देख-रेख की जाती है। इसके अलावा मंत्रालय बाल श्रम के लिए अनुदान सहायता योजना भी चला रहा है, जिसमें परियोजना लागत की 75 प्रतिशत धनराशि स्वयंसेवी संगठनों को सीधे दी जाती है, जो उन जिलों में बाल श्रम उन्‍मूलन के काम कर रहे है, जहां एनसीएलपी विद्यालय बनाना संभव नहीं है। 

श्री खड़गे ने कहा कि सरकार बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) कानून 1986 में संशोधन करने का विचार भी कर रही है, जिसके तहत 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चों को काम पर लगाने की मनाही का प्रस्‍ताव है। ऐसा शिक्षा के अधिकार कानून-2009 के लागू होने के कारण किया जा रहा है, जिसमें 06 से 14 वर्ष के बच्‍चों को नि:शुल्‍क एवं अनिवार्य शिक्षा दिये जाने का प्रावधान है। यह विषय हाल में ही आयोजित एक बैठक में उठाया गया, जिसमे सभी राज्‍यों के सचिव और केन्‍द्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल थे, जो लगभग 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चों को रोजगार में लगाने पर प्रतिबंध के लिए एकमत थे। आज की बैठक इस कानून में संशोधन पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी। इस अवसर पर श्रम मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव श्री अनुप पांडेय द्वारा बाल श्रम कानून के विभिन्‍न पहलूओं तथा अंतर्राष्‍ट्रीय राय से सम्‍बद्ध एक प्रस्‍तुती भी दी गई। (
20-जनवरी, 2012 20:45) {पत्र सूचना कार्यालय} 

बुधवार, जनवरी 18, 2012

आचार सहिता के दौरान 4 लाख 30 हज़ार की और राशि बरामद

   आरोपी ने कहा:यह तो प्रोपर्टी के पैसे थे
      गजिंदर सिंह किग//अमृतसर//18 जनवरी, 2012
पंजाब में होने वाले चुनाव में लगे आचार सहिता के दौरान चुनाव कमिशन द्वारा बनाई गई जांच टीम ने पुलिस के साथ मिल कर अमृतसर में आज पुलिस को उस समय बड़ी कामयाबी मिली जब उस ने 4 लाख 30 हज़ार की नकदी  बरामद की , दरअसल यह व्यक्ति मौके से इस राशि के बारे में कोई बी कागज़ नहीं दिखा सका जिस के चलते पुलिस ने इस राशि  को जब्त किया है  
        पंजाब में चुनाव के दौरान नकदी पकड़ने का सिलसिला ज़ारी है, जिस के चलते अमृतसर में आज इलाका लोहगढ़ में चेकिंग के दौरान एक गाडी से 4 लाख 30 हज़ार की राशि बरामद की गई, मनी सिंह नामक का यह व्यक्ति आपनी कार में यह राशि ले कर जा रहा था और कार के चेकिंग के दौरान यह राशि बरामद हुई और यह व्यक्ति इस राशि बारे कोई भी ऐसा प्रमाण पेश नहीं कर सका, जिस से कि इस बात की तस्दीक हो सके, कि यह राशि किस मकसद के लिए है और इस का इस्तेमाल कहाँ होना था, वहीँ पुलिस ऑफिसर रछपाल सिंह ने इस नकदी को आपने कब्ज़े में ले कर इस राशि बारे जानकारी देते हुए बताया, कि इस की सूचना इलेक्शन विभाग और इनकम टैक्स विभाग को दे दी है, वहीँ इस मौके पर पहुंचे मुख्य एस.डी.ओ. जसबीर सिंह का कहना है कि यह विशेष अभियान यहाँ पर चुनाव के मद्देनजर लगाया गया था और चेकिंग के दौरान यह राशि व्यक्ति की कार से बरामद हुई है और इस की जांच चल रही है, वहीँ इस मामले में जिस आरोपी मनी सिंह ने कहा, कि वह यहाँ पर किसी प्रोपर्टी के पैसे देने के लिए आया था और जो इस के काग-जात है, वह जल्द ही यहाँ पर मंगवा कर पेश कर देगा. 

सोमवार, जनवरी 16, 2012

भारत मौसम विज्ञान विभाग का 137 वां स्थापना दिवस

आईएमडी में स्मरणीय योगदान के लिए पुरस्कार भी प्रदान किए गए
इस अवसर पर एक शानदार प्रदर्शनी का आयोजन भी हुआ जिसमें योजना, विज्ञानं, तकनोलोजी औत भू विज्ञानं के मंत्री डा. अश्वनी कुमार,  भूमि विज्ञान मन्त्रालय के सचिव डा. शैलेश नायक और आई.एम.डी. के महानिदेशक डा. अजीत त्यागी सहित बहुत से अन्य प्रमुख log भी शामिल हुए. फोटो व विवरण: पत्र सूचना कार्यालय  

नयी दिल्ली//पी.आई.बी.//16 जनवरी,2012 : विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के भूतपूर्व सचिव प्रो. यशपाल ने कहा कि “विसंगतियां जीवन का अहम पहलू है। अगर कोई व्यक्ति विसंगतियों को नहीं समझता तो वह जिंदगी को भी नहीं समझ सकता।” कल यहां भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के 137वें स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में डॉ. यशपाल ने बताया कि विज्ञान के क्षेत्र में काम करना कितना मुश्किल और कितना आश्चर्यजनक है। अंततः इससे समाज को लाभ होता है। यह आगे काम करने की प्रेरणा देता है। डॉ. यशपाल ने कहा कि, “वह बीते जमाने की बात है जब मौसम पूर्वानुमानी खिड़की से बाहर देखकर मौसम को महसूस कर मौसम पूर्वानुमान बताया करता था। अब बहुत से उपकरणों का प्रयोग किया जाता है और गणितीय विश्लेषण द्वारा स्पष्ट जानकारी दी जाती है। कॉस्मिक किरणों, मौसम विज्ञान से संबंधित दवाब को नापने, संचार, प्रसारण, विमानन आदि के संदर्भ में विज्ञान के क्षेत्र में यह योगदान काफी महत्वपूर्ण है।” डॉ. यशपाल ने डॉ. सतीश धवन को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित की गई समन्वय समितियों के बगैर यह संभव नहीं था। प्रो. यशपाल ने सभी को यह सलाह दी कि वे अपने मनपसंद कार्यक्षेत्र में काम करे।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार ने कहा कि आईएमडी ने उत्कृष्टता के साथ आधुनिक विज्ञान के एक समूचे नए दौर में प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि, “अवलोकन प्रणाली का आधुनिकीकरण, मौसम पूर्वानुमान के लिए अंकीय तरीकों के इस्तेमाल के लिए उच्च प्रदर्शन करने वाली कंप्यूटिंग प्रणाली की शुरुआत (भारत के प्रथम सुपर कंप्यूटर से सौ गुणा अधिक शक्तिशाली) और नवीन सूचना प्रौद्योगिकी आधारित डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली हाल के वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां रही हैं। डोपलर मौसम रडार पर आधारित तत्काल मौसम की जानकारी देने की प्रणाली भी काफी नवीन है और एक सेवा क्षेत्र के रुप में इसे अभी स्थापित होना है। प्रसार प्रणाली के सीधे जनता और उपयोगकर्ता समूहों तक पहुंचने से समय की बचत होगी। इस प्रणाली का लक्ष्य बेहद विशिष्ट क्षेत्रों में मौसम से संबंधित गंभीर चेतावनी की सूचना प्रदान करना है।”
इससे पहले मंत्री महोदय ने दिल्ली में देश के प्रथम सी- बैंड डोपलर रडार का उद्घाटन किया। यह रडार मेट्रो शहर में मौसम पूर्वानुमान से संबंधित गंभीर चेतावनी प्रदान करने में सहायक होगा। आने वाले तूफान से प्रभावित होने वाले शहर के भागों की जानकारी से आम इंसान के साथ ही नागरिक प्राधिकरणों को भी इससे मदद मिलेगी।
संवाददाताओं से बात करते हुए डॉ. अश्विनी कुमार ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए आईएमडी और मंत्रालय के नवीन कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, “इन योजनाएं की फिलहाल वैज्ञानिक जांच चल रही है और कुछ महीनों में इन्हें अंतिम रुप दे दिया जाएगा। इन योजनाओं में पर्वतीय मौसम विज्ञान शामिल है जो हिमालय को समाविष्ट करेगा, कृषि मौसम विज्ञान देश के सभी भागों में विस्तृत होगा। विमानन मौसम विज्ञान के तहत निरंतर अवलोकन सेंसरों के जरिए सभी हवाईअड्डों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त महानगरों में मौसम सेवा की योजना भी है।”
राज्य मंत्री ने बताया कि, “आईएमडी का अगला लक्ष्य जलवायु सेवा है जिससे मौसम और वर्ष के 10-15 दिन पूर्व इसके दीर्घावधि व्यवहार की जानकारी प्राप्त हो सके। दशकीय और शताब्दी पैमाने में बदलाव भी समाज के लिए महत्वपूर्ण है। जलवायु आंकडे और कृषि, जल संसाधन, मानव, पशु और पौधों की सेहत आदि पर जलवायु परिवर्तन के असर का अध्ययन करना भी ज़रुरी है। इसके अलावा जनता से जुड़ाव में भी मूलभूत परिवर्तन कर इसे जनता द्वारा प्राप्त जानकारी से जनता को प्रदान की गई जानकारी में तबदील करना होगा।”
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 137वें स्थापना दिवस के अवसर पर पृथ्वी-विज्ञान मंत्रालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दो पुस्तकों का भी अनावरण किया गया। “क्लाईमेटोलॉजिकल टेबल्स” नामक पुस्तक जलवायु विज्ञान के तीस वर्षों का संकलन है। डॉ. एम. मोहपात्रा, एच.आर बिस्वास और जी.के सवाईसर्जे को 25वां द्विवार्षिक मौसम पुरस्कार प्रदान किया गया।
सर्वोत्कृष्ट आंकडों की प्राप्ति, उपकरणों के रखरखाव और नौवहन पूर्वानुमान सत्यापन के आधार पर मुंबई के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र को सम्मानित किया गया। प्रदर्शन के आधार पर रायपुर को वर्ष 2010-11 के लिए सर्वोत्कृष्ट पूर्वानुमान क्षमता के लिए चयनित किया गया और कोलकाता वेधशाला को आरएस/आरडब्ल्यू अवलोकन के लिए सर्वोत्कृष्ट बेस चुना गया। आईएमडी के 15 कर्मचारियों को विभिन्न सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया जिसमें सर्वश्रेष्ठ हिन्दी अनुवाद, आवंटित कार्य के अलावा उत्कृष्ट और समर्पित कार्य शामिल है। ***