गुरुवार, जनवरी 24, 2013

दूरसंचार विशेष लेख

24-जनवरी-2013 15:57 IST
दूरसंचार क्षेत्र का असाधारण विकास                                                         
  भारत में टेलीफोन सेवा सर्वप्रथम कोलकाता में 1881-82 में शुरू की गई थी। इससे मात्र छह साल पहले टेलीफोन का आविष्‍कार हुआ था। स्‍वचालित टेलीफोन एक्‍सचेंज शिमला में 1913-14 में आरंभ की गई थी और उसकी क्षमता 700 लाइनें थी।
  दूरसंचार सेवओं में भी उल्‍लेखनीय सुधार हुआ है। इस क्षेत्र में सुधार के अनेक उपाय किये गए जिनमें 1994 में राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति की घोषणा शामिल है। इस नीति में कई महत्‍वपूर्ण लक्ष्‍यों को परिभाषित किया गया। इनके मांग पर टेलीफोन की उपलब्‍धता, उचित मूल्‍यों पर विश्‍वस्‍तरीय सेवा की व्‍यवस्‍था, दूरसंचार उपकरणों के प्रमुख निर्माता/निर्यातक आधार के रूप में भारत का उद्भव सुनिश्चित करना और सभी गांवों के लिए बुनियादी दूरसंचार सेवाओं की व्‍यापक उपलब्‍धता। स्‍वतंत्र नियामक के रूप में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की स्‍थापना 1997 में की गई और 1993 में नई दूरसंचार नीति की घोषणा की गई। इस नीति में इस क्षेत्र के विकास और देश में विश्‍वस्‍तरीय दूरसंचार ढांचे के विकास के लिए उचित ढांचे की उपलब्‍धता पर जोर दिया गया। तब से भारतीय दूरसंचार क्षेत्र ने देशवासियों को सस्‍ती और कारगर संचार सेवाएं उपलब्‍ध कराने के स्‍वप्‍न को पूरा करने का लम्‍बा सफर तय किया है।
  दूरसंचार विभाग की सार्थक नीतियों और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ शुरू किये गए सुधार के उपायों से दूरसंचार क्षेत्र का असाधारण विकास हुआ है। दूरसंचार क्षेत्र का गत कुछ वर्षों में, विशेष रूप से बेतार क्षेत्र में, असाधारण विकास हुआ है। भारतीय दूरसंचार नेटवर्क नवंबर 2012 के अंत में 921.47 मिलियन टेलीफोनों के साथ विश्‍व में चीन के बाद इस सुविधा को उपलब्‍ध कराने वाले दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में उभरा है। भारतीय बेतार टेलीफोन नेटवर्क भी नवंबर 2012 के अंत में 890.60 मिलियन टेलीफोन कनेक्‍शन वाला दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। देश में प्रति सौ की आबादी पर टेलीफोनों की संख्‍या के अनुसार टेली-सघनता नवंबर 2012 के अंत में 75.55 प्रतिशत थी।
  दूरसंचार भी बिजली, सड़कों और पानी आदि जैसी बुनियादी सेवाओं के रूप में उभरा है और देश के संपूर्ण सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्‍यक आर्थिक विकास का महत्‍वूपर्ण कारक बन गया है। हाल ही में किये गये एक अध्‍ययन से पता चलता है कि भारत में इंटरनेट उपभोक्‍ताओं की संख्‍या में औसतन दस प्रतिशत वृद्धि हुई है जो सकल घरेलू उत्‍पाद में 1.08 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। दस राज्‍यों में इंटरनेट की 10 प्रतिशत मांग को देखते हुए विकास में वृद्धि औसतन 2.36 प्रतिशत है। वर्ष 2009-10 में अपेक्षित रूप से विकसित इन 10 राज्‍यों में इंटरनेट की दर 2.76 प्रतिशत है जबकि विकासशील राज्‍यों के रूप में 9 राज्‍यों में इंटरनेट औसतन 0.61 प्रतिशत है। अध्‍ययन से यह भी पता चलता है कि मोबाइल की मांग में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि के कारण सकल घरेलू उत्‍पाद में 1.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति -2012 (एनटीपी-2012)
  सरकार ने 31 मई, 2012 को राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति-2012 (एनटीपी-2012) को मंजूरी दी। इसमें दूरदृष्टि, सामरिक निर्देश और दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित विभिन्‍न मझौले और दीर्घकालिक मामलों का वर्णन किया गया है। एनटीपी-2012 का मुख्‍य उद्देश्‍य समूचे देश में सस्‍ती, टिकाऊ और सुरक्षित दूरसंचार और ब्रॉडबैंड सेवाओं से लोगों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाना है। इस नीति का मुख्‍य जोर इन सेवाओं से अर्थव्‍यवस्‍था पर बहुआयामी और रूपांतरणीय प्रभाव डालना है। यह इक्विटी और समावेशिता को बढ़ाकर राष्‍ट्रीय विकास के एजेंडे को बढ़ाने में इन सेवाओं की भूमिका को स्‍वीकार करता है। नागरिकों के लिए संचार की सस्‍ती और कारगर सेवाएं उपलब्‍ध कराना एनटीपी-2012 का मुख्‍य लक्ष्‍य है। एनटीपी-2012 इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की मुख्‍य भूमिका और परिणामस्‍वरूप प्रतिस्‍पर्धात्‍मक वातावरण में सेवा प्रदाताओं की व्‍यावहारिकता सुनिश्चित करने को स्‍वीकार करती है। एनटीपी-2012 के अनुसार ये सिद्धांत उपभोक्‍ताओं, सेवाप्रदाताओं के हितों और सरकारी राजस्‍व के बीच संतुलन बनाये रखने में आवश्‍यक निर्णय लेने का पथ प्रदर्शन करेंगे।
एनटीपी-2012 के मुख्‍य लक्ष्‍य:-
*सभी नागरिकों को दूरसंचार की सुरक्षित, सस्ती और उच्‍च गुणवत्‍तापूर्ण सेवाएं उपलब्‍ध कराना।
*सेवाओं और सेवा क्षेत्रों के लिए एक राष्‍ट्र-एक लाइसेंस तैयार करने का प्रयास करना।
* एक राष्‍ट्र- पूर्ण मोबाइल संख्‍या पोरटेब्लिटी प्राप्‍त करना और एक राष्‍ट्र- उन्‍मुक्‍त रोमिंग के लिए काम करना।
*ग्रामीण टेली-सघनता सन् 2017 तक को लगभग 39 के वर्तमान स्तर को बढ़ाकर 70 और सन्  2020 तक 100 तक बढ़ाना।
*ब्रॉडबैंड संपर्कता सहित दूरसंचार को शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य जैसी बुनियादी आवश्‍यकता के रूप में मान्‍यता देना और ब्रॉडबैंड का अधिकार प्राप्‍त करने की दिशा में कार्य करना। 
*वर्ष 2015 तक मांग पर सस्‍ता और टिकाऊ ब्रॉडबैंड उपलब्‍ध करना। वर्ष 2017 तक ब्रॉडबैंड के 175 मिलियन कनेक्‍शन तथा वर्ष 2020 तक 600 मिलियन कनेक्‍शन डाउनलोड स्‍पीड कम से कम 2एमबीपी पर तथा मांग पर ही कम से कम 100एमबीपी की उच्‍चतर स्‍पीड पर उपलब्‍ध करना।
*प्रौद्योगिकियों के संयोजन से उच्‍च स्‍पीड और उच्‍च गुणवत्‍ता के ब्रॉडबैंड सभी ग्राम पंचायतों की वर्ष 2014 तक पहुंच और सभी गांवों तथा निवासियों तक सन् 2020 तक उतरोत्‍तर पहुंच बनाना।
*विकास के लिए आईसीटी की वास्‍तविक क्षमता प्राप्‍त करने के लिए दूरसंचार को अवसंरचना क्षेत्र के रूप में स्‍वीकार करना।
*दूरसंचार अवसंरचना गठित करने में अधिकृत रास्‍ते (राइट ऑफ वे) को संबोधित करना।
*सामान्‍य और भेदभाव रहित पहुंच बनाने के वास्‍ते विभिन्‍न नेटवर्कों की अंतर-संपर्कता के लिए सामान्‍य मंच निर्धारित  करने के लिए पर्यावरणीय व्‍यवस्‍था तैयार करना।
*दूरसंचार नीति की संवर्धित और सतत स्‍वीकृति तथा टिकाऊपन के लिए अक्षय स्रोतो के उपयोग को प्रोत्‍साहित करना।
*देश में नवीन इंटरनेट प्रोटोकाँल (आईपी) का विभिन्‍न चरणों और समयबद्ध तरीके से सन् 2020 तक पर्याप्‍त परिवर्तन प्राप्‍त करना और आईपी मंच पर विविध सेवाओं का प्रावधान करने के लिए वातावरणीय प्रणाली को प्रोत्‍साहित करना।  
दूरसंचार उपकरणों का विनिर्माण
  पिछले दशक के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में विशाल प्रगति ने दूरसंचार उपकरणों के विनिर्माण और अऩ्य समर्थित उद्योगों के देश में विकास को दिशा दी है। अगली पीढी की तकनीक और ऑपरेटरों द्वारा 3जी तथा ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस सेवा की शुरुआत से दूरसंचार उपकरणओं की मांग में वृद्धि हुई है। इस अऴसर का लाभ उठाने के लिए सरकार और नीतिनिर्माता घरेलू विनिर्माण उद्योग के विकास पर बल दे रहे हैं। पिछले दशक के दौरान दूरसंचार नेटवर्क और इसके उपभोक्ताओं में तीव्र वृद्धि के बावजूद दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में वैसी वृद्धि नहीं हुई है।
टेलीफोन उपकरण विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एनटीपी-2012 के अन्य चीजों के अलावा निम्नलिखित उद्देश्य हैं-
*घरेलू अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, आईपीआर सृजन, उद्यमिता, विनिर्माण, व्यवसायीकरण और आधुनिक दूरसंचार उत्पादों औऱ सेवाओं को 12वीं परियोजना अवधि के दौरान स्थापित करना।

* डिजायन, अनुसंधान विकास, आईपीआर सृजन, परीक्षण और मानकीकरण यानि दूरसंचार उपकरणों के घरेलू उत्पादन की मूल्य श्रृंखला को पूरा करना ताकि क्रमशः 45 प्रतिशत और 65 प्रतिशत (वर्ष 2017 के अंत और 2020 के अंत तक) के न्यूनतम मूल्य संवर्धन को भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की मांग को क्रमशः 60 प्रतिशत और 80 प्रतिशत करना।

*देश की सुरक्षा के संदर्भ में दूरसंचार उत्पादों की खरीद में घरेलू विनिर्मित दूरसंचार उत्पादों को वरीयता देना।
राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन)
  ऑप्टिकल फाइबर वर्तमान में राज्यों की राजधानियों, जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच गया है। सरकार ने 2,50,000 ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से संपर्क के लिए  20,000 करोड़ रुपए की लागत के साथ परियोजना को मंजूरी दी है। सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को बिना भेदभाव के नेटवर्क प्रदान किया जाएगा। ये सेवा प्रदाता गांवों में ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षण, ई-सासन आदि जैसे विभिन्न अनुप्रयोगों की सुरुआत कर सकते हैं। इस परियोजना कायूएसओएफ द्वारा निधियन किया जाएगा और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड के स्पेशल पर्पज व्हेकिल द्वारा इसे दिशा दी जाएगी।
नवीन इंटरनेट प्रोटोकॉल में रुपांतरण (आईपीवी6)
  आईपीवी अगली पीढ़ी का इंटरनेट प्रोटोकॉल है। आईपीवी4 की समाप्ति के साथ ही भविषअय की ज़रुरतों को पूरा करने के लिए आईपीवी6 में रुपांतरण आवश्यक हो गया है जो विशाल एड्रेस स्पेस और अन्य विशिष्टताओं को मुहैया कराते हैं। देश भर के देशों ने आईपीवी6 में रुपांतरण शुरु कर दिया है। भारत पहला ऐसा देश है जहां किसी सरकार ने नीति निर्णयों के साथ ही आईपीवी6  की स्थापना के लिए रोडमैप जारी किया है।
वैश्विक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ)
  संसद के अधिनियम द्वारा गठित वैश्विक सेवा दायित्व  कोष की अध्यक्षता केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक के द्वारा की जाती है। वह यूसएसओ फंड योजनाओं और राशि के वितरण के लिए प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन का अधिकार रखता है।
  जिन गांवों में कोई मोबाइल कवरेज नहीं था उन निर्दिष्ट ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में मोबाइल सेवाओं के प्रावधानों क लए 27 राज्यों के 500 जिलों में 7353 अवसरंचना साइटों/ टावरों  के प्रबंधन के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान करने के ले सरकार द्वारा यूएसओ फंड के जरिए योजना की शुरुआत की गई। इसके लिए 2000 या इससे अधिक आबादी वाले गांवों अथवा संकुलों का चयन किया गया। इस प्रकार तैयार की गई अवसंचरना को तीन सेवा प्रदाताओं द्वारा साझा किया गया।
वर्ष 2012 के लिए उपलब्धियां
  जनवरी से जून 2012 की अवधि के दौरान टेलीफोन कनेक्शनों की कुल संख्या 926.55 मिलियन से बढ़कर 965.52 मिलियन होगई जिससे दूरसंचार घनत्व 76.86 प्रतिशत से बढ़कर 79.58 प्रतिशत होगया। इसके बाद नवंबर 2012 के अंत तक टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या 921.47 मिलियन तक घट गई जिससे दूरसंचार घनत्व घटकर 75.55 प्रतिशत हो गया। जनवरी से नवंबर 2012 तक टेलीफोन कनेक्शनों में 5.08 मिलियन की शुद्ध कमी आई। जनवरी से जून 2012 के दौरान ग्रामीण टेलीपोन कनेक्शन में 315.39 मिलियन से 343.88 मिलियन की वृद्धि हुई जिससे दूरसंचार घनत्व 37.52 प्रतिशत से बढ़कर 40.71 प्रतिशत हो गया। इसके बाद नवंबर 2012 के अंत तक ग्रामीण टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या 343.74 मिलियन तक घट गई जिससे ग्रामीण दूरसंचार घनत्वघटकर 40.54 प्रतिशत हो गया। शहरी टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या में जनवरी से जून 2012 के दौरान 611.16 मिलियन से बढ़कर 621.64 मिलियन हो गयी जिससे शहरी दूरसंचार घनत्व 167.46 प्रतिशत से 168.62 प्रतिशत हो गया। इसके बाद नवंबर 2012 के अंत तक शहरी टेलीफोन कनेक्शन में 577.73 मिलियन की कमी हुई जिससे शहरी दूरसंचार घनत्व घटकर 155.40 प्रतिशत हो गया। जून 2012 के बाद दूरसंचार उपयोगकर्ता आधार में गिरावट की मुख्य वजह सेवा प्रदाताओं द्वारा बंद मोबाइल टेलीफोन कनेक्शन को हटाना था।
  जनवरी से सितंबर 2012 के दौरान इंटरनेट उभोक्ताओं की संख्या 22.39 मिलियन (13.35 मिलियन ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं सहित) से बढ़कर 24.01 मिलियन (14.68 मिलियन ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं सहित) हो गई। नवंबर 2012 के अंत तक देश में 14.88 मिलियन ब्रॉडबैंड उपभोक्ता थे।
स्पेक्ट्रम की नीलामी
12 नवंबर 2012 को शुरु की गई 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस नीलामी में पांच कंपनियों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) परियोजना
*एनओएफएन परियोजना की शुरुआत केन्द्र-राज्य के संयुक्त प्रयासों के साथ हुई। राज्य सरकारों द्वारा कोई आरओडब्ल्यू शुल्क न लगाकर इसमें योगदान की आशा है। इसके लिए भारत सरकार, राज्य सरकारों और बीबीएनएल के बीच त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना आवश्यक है।
*13 राज्यों आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, मिजोरम, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों दादर और नगर हवेली, दमन और दीव तथा पुड्डुचेरी के साथ 26 अक्टूबर 2012 को त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इन राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल 1,40,727 ग्राम पंचायत समाविष्ट होंगे।
*अजमेर जिले (राजस्थान) में अरेन ब्लॉक, उत्तरी त्रिपुरा जिले (त्रिपुरा) में पनीसगर ब्लॉक, विशाखापत्तनम जिले (आंध्र प्रदेश) के परावदा ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों को समाविष्ट करने के लिए तीन पायलट परियोतजनाओं को पूरा कियता गया है। 15 अक्टूबर 2012 को इन तीन पायलट परियोजना ब्लॉकों में प्रत्येक 58 ग्राम पंचायतों को 100 एमबीपीएस बैंडविड्थ उपलब्ध कराया गया है।
*एनआईसी द्वारा उपलब्ध आंकडों के आधार पर ओएफसी बिछाने के लिए सर्वे कार्य शुरु कर दिया गया है।
*बीबीएनएल ने इसके लिए तीन केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों यानि बीएसएनएल, रेलटेल और विद्युत ग्रिड को काम आवंटित किया है।
वैश्विक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ)
यूएसओ कोष की मदद से देश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों को शामिल करने के लिए दूरसंचार विभाग ने बहुत सी पहल की है। विभिन्न ओएसओएफ योजनाओं के संदर्भ में उपलब्धियों का ब्यौरा इस प्रकार है
*अक्टूबर 2012 तक वर्ष के दौरान 424 ग्राम सार्वजनिक टेलीफोन (वीपीटी) मुहैया कराए गए। अक्टूबर 2012 के अंत तक इसके तहत 5.80 लाख गांवों (97.76) गांवों को समाविष्ट किया गया।
*31 अक्टूबर 2012 तक 62443 में से 53452 वपीटी यानि 85.60 प्रतिशत वीपीटी नए चुनिंदा ऐसे  गांवों को प्रदान किए गए जो 2001 की जनगणना के अनुसार इससे दूर थे।
*अवसंचरना प्रदाताओं और वैश्विक सेवा प्रदाताओं द्वारा 14 मोबाइल टावर और 209 बेस ट्रांससीवर स्टेशनों को साझा मोबाइल अवसरंचना योजना के तहत वर्ष 2012 के दौरान अक्टूहर 2012 तक शुरु किया गया। इस योजना के तहत अक्टूबर 2012 के अंत तक 7310 (99.42 प्रतिशत) टावरों को लगाया गया।
*वर्ष 2012 के दौरान अक्टूबर 2012 तक ग्रामीण ब्रॉडबैंड योजना के तहत 52,628 वायर लाइन ब्रॉडबैंड कनेक्शन और 3,347 कियोसोक की स्थापना ग्रामीण और सूदूर क्षेत्रों में की गई।
*वर्ष 2012 के दौरान 31 अक्टूबर 2012 तक यूएसओएफ के जरिए 330.13 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित की गई। इस अवधि तक यूएसओएफ के तहत कुल 47035.33 करोड़ रुपए एकत्रित किए गए और उपलब्ध संभावित बकाया 24597 करोड़ रुपए है।
नवीन इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपीवी6) में परिवर्तनदूरसंचार विभाग के एनटी प्रकोष्ठ के प्रयत्नों से सभी केन्द्रीय विबाग और राज्य सरकारों ने आईपीवी6 में परिवर्तन के लिए केन्द्रीय अधिकारियों को नामांकित किया है। आईपीवी6 में परिवर्तन के लिए सभी हितधारकों को सजग किया गया है। वर्ष 2012 के दौरान इस बारे में सभी हितधारकों को जागरुक करने के लिए अनेक कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन किया गया है।
एनटीपी-12 में आईपीवी6 केन्द्र के नवाचार केन्द्र की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। एक स्थान पर आईपीवी6 सेवेँ उपलब्ध कराने के लिए माहौल प्रदान करने की योजना इस केन्द्र ने तैयार की है जिसमें  प्रशिक्षण, परामर्श, क्रियान्वयन, अनुसंधान, मानक और परीक्षण सब शामिल होगा। इसके अलावा प्रमाणीकृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी प्रक्रिया में है। एक चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से आईपीवी6 में रुपांतर के लिए दूसरा रोड़ मैप अपने अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही जारी किया जाएगा।
(पसूका फीचर)* संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दूरसंचार विभाग से साभार


मीणा/विजयलक्ष्मी/सुमन-25पूरी सूची-24-01-2013

सोमवार, जनवरी 21, 2013

हवाना पुस्तक मेले में 200 से अधिक लेखक भाग लेंगे

14 से 24 फरवरी तक होगा 22वां हवाना अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला
                                                                                                                                                           Photo: EPA
जहाँ एक तरफ दुनिया के कई भागों में कत्लोगारत, खून खराबे और रेप जैसी घटनायों के निंदनीय और चिंताजनक सिलसिले जारी हैं वहीँ दुनिया में ज्ञान की रौशनी फ़ैलाने वाली किताबों के प्रेमी भी  किताबों के प्रेम में जुटे हुए हैं। रेडिओ रूस ने बताया है कि क्यूबा की राजधानी में 14 से 24 फरवरी तक आयोजित 22वें हवाना अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में 32 देशों से 200 से अधिक लेखक भाग लेंगे। इस पुस्तक मेले की स्माप्ति पर ये लेखक 10 मार्च तक क्यूबा के प्रांतों का दौरा करेंगे।

इस अवधि में दर्जनों देशों के संस्कृति मंत्री और प्रसिद्ध लेखक तथा कवि हवाना की यात्रा करेंगे। मेक्सिको, चिली, अर्जेंटीना, स्पेन, इक्वाडोर, संयुक्त राज्य अमरीका और रूस से सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडलों के पहुँचने की उम्मीद है।

वर्तमान पुस्तक मेला क्यूबाई क्रांति के मसीहा होसे मार्ती की 160-वीं जयंती के अलावा क्यूबाई लेखकों, डैनियल चवार्रिया और पेद्रो पाब्लो की समृति को समर्पित है।
 
(रेडियो रूस से साभार)
हवाना पुस्तक मेले में 200 से अधिक लेखक भाग लेंगे

हवाना पुस्तक मेले में 200 से अधिक लेखक भाग लेंगे


शुक्रवार, जनवरी 18, 2013

महाभियान मे सहयोग करों--भावना त्यागी भारतीय

भारत को ब्रह्माण्ड़ गुरु की गरिमा वापस दिलाने का प्रयास 
दामिनी की जान हम नहीं बचा पाए उसके बाद इस तरह की घटनायों की मुक्कमल रोकथाम भी नहीं कर पाए लेकिन इस के बावजूद महिला सम्मान को लेकर एक आन्दोलन अवश्य खड़ा हुआ जो लगातार मजबूत हो रहा है। जहाँ एक और महिलायों और उनकी पौशाक को लेकर बहुत ज़िम्मेदार समझे जाने वाले लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं वहीँ इस नाज़ुक समय में महिलायों के समान को लेकर एक विशेष आयोजन भी हो रहा है। महिला रत्नों के सम्मान में आप अपने क्षेत्र की महिलायों के नामांकन भी भेज सकते हैं साथ ही आलेख, सुझाव, सहयोग और विज्ञापन भी। इस विशेष आयोजन में कर्मठसत्यानिष्ठ,  कर्तव्यनिष्ठ,  संघर्षशीलप्रतिभाशालीसमाजसेवीराष्ट्रहित  में कार्य करने वाली सभी कार्यक्षेत्रों की महिलाओ का सम्मान किया जायेगा। आयोजकों का कहना है कि विश्व सभ्यता की रक्षासुरक्षा एवं वसुधैव कुटुम्बकम् की संस्कृति के विकास व विस्तार हेतु संकल्प के साथ इस हाभियान मे सहयोग करों सफलता आपके कदम चूमेंगी। आपका छोटा सा प्रयास भारत को विश्वगुरु ही नही वरन्
ब्रह्माण्ड़ गुरु की प्राचीन गरिमा वापस दिलाएगा। सम्पर्क   : भावना त्यागी भारतीय (011 22528272, 9013666652) और भू त्यागी भारतीय (विश्व चिंतक) (09999466822, 9013666651) आप अपने सुझाव यहाँ भी भेज सकते हैं जिन्हें आयोजकों तक पहुंचा दिया जायेगा।-- रेक्टर कथूरिया 
*महिला रत्नों का सम्मान                                         *सभी कार्यक्षेत्रों की महिलाओ का सम्मान


*महाभियान मे सहयोग करों--भावना त्यागी भारतीय



नामांकन आमन्त्रण महिला और मीडिया 2013 FFF.pdf
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सोमवार, जनवरी 14, 2013

बुनियादी ढांचों पर साइबर हमले अक्सर होने की सम्भावना

साइबर युद्ध का ख़तरा-अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से
वर्ष 2013 में दुनिया भर में साइबर हमलों की संख्या में बड़ी तेज़गति से वृद्धि होगी। कुछ ख़ास ठिकानों पर ऐसे हमले किए जाएंगे और सरकारी एजेंसियों पर विशाल पैमाने के हमले भी होंगे। यह निष्कर्ष एंटीवायरस निगम "कैसपेर्स्की लैब" के विशेषज्ञों ने निकाला है। अमरीकी खुफिया सेवाओं ने भविष्यवाणी की है कि आनेवाले 20 वर्षों में वैश्विक साइबर युद्ध शुरू हो जाएगा।

"कैसपेर्स्की लैब" के विश्लेषकों के मुताबिक, अगले साल कई सरकारी संस्थानों और व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों की निजी कंपनियों की गोपनीय जानकारी की चोरी बड़े पैमाने पर होने लगेगी। सामाजिक सेवाओं और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर साइबर हमले अक्सर होने की सम्भावना है।

गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी बड़ी नेटवर्क कंपनियों के पास भारी मात्रा में ऑनलाइन जानकारी हासल करने की क्षमता होगी। इसके अलावा, संचार प्रौद्योगिकी के विकास की तेज़गति की बदौलत देशों की सरकारों का अपने नागरिकों पर असीम नियंत्रण हो जाएगा। लेकिन इन देशों के नागरिकों के पास भी अपनी सरकारों को चुनौतियाँ देने के कई अवसर मौजूद होंगे।

वर्तमान में, सूचना प्रौद्योगिकी हमारे समाज के सूचना क्षेत्र के विकास के संदर्भ में एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही है। इस संबंध में रूस के सूचना सुरक्षा संघ के अध्यक्ष गेन्नादी येमेलियानोव ने रेडियो रूस को बताया –

ऐसा ख़तरा इसलिए बढ़ता जाएगा क्योंकि इस ख़तरे का एक टाइमबम फिट कर दिया जा चुका है। यदि हम समय पर पर्याप्त सुरक्षा उपाये नहीं करेंगे तो यह बम ज़रूर फटेगा और बड़े विनाश का कारण बनेगा। जब हम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के इतने ज्यादा आदी हो जाएंगे कि इसके बिना जीवन ही असंभव हो जाएगा तब पूरी दुनिया के लिए बहुत-सी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ज़रा सोचिए, इस सूचना प्रौद्योगिकी ने अचानक ही काम करना बंद कर दिया है। अब आप क्या करेंगे? पूरा जीवन ठप्प। आप ज़रा कल्पना कीजिए कि सभी स्थानों पर बिजली गुल हो गई है। सारा काम ठप्प। वित्तीय और आर्थिक कारणों से भी ऐसा ख़तरा पैदा हो सकता है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी को अच्छी तरह से समझने वाले एक बहुत अच्छे दिमाग़ की ही ज़रूरत होगी।

अमरीकी खुफिया सेवाओं ने अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें अमरीका के लिए मौजूदा साइबर हमलों के ख़तरों की समीक्षा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से ही पैदा होगा। लॉस एंजिल्स टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस, फ्रांस, इज़राइल और दुनिया के कुछ अन्य देश भी साइबर जासूसी करते हैं लेकिन वे उतना विश्वासघात नहीं करेंगे जितना कि चीन कर सकता है। कम से कम रूस ऐसा नहीं कर रहा है। वह अपने व्यापारियों के लाभ के लिए अमरीकी कंपनियों की जानकारियां चुराने की कोशिशें नहीं कर रहा है।

इस बीच, दिसंबर माह की शुरूआत में साइबर रक्षा पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मंच साइबर सुरक्षा एशिया- 2012 के भागीदार इस बात पर सहमत हुए थे कि सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया की मुख्य समस्या यह है कि दुनिया की सरकारें अभी तक यह तय नहीं कर पाई हैः साइबर-आतंकवाद क्या चीज़ है? कुछ देशों की सरकारें साइबर युद्ध के लिए सबसे प्रभावकारी मालवेयर का विकास कर रही हैं। लेकिन कोई भी सरकार यह गारंटी नहीं दे सकती हैं कि ये मालवेयर और वायरस आतंकवादियों के लिए भी उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। यदि ऐसा हुआ तो आतंकवादी गिरोह इन मालवेयरों और वायरसों का खूब इस्तेमाल करेंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि आज भी दुनिया के कई देशों के लिए अपने ही साइबर संजाल में फंसने का बड़ा भारी ख़तरा बना हुआ है। माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश हो सकता है। (
रेडियो रूस से साभार)
13.12.2012, 16:32         
साइबर युद्ध का ख़तरा

गुरुवार, जनवरी 10, 2013

माओवादियों के गढ़ों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए-शिंदे

10-जनवरी-2013 19:11 IST
लड़ाई बहुत कठिन होने की संभावना:गृह मन्त्रालय का रिपोर्ट कार्ड
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे ने दिसम्बर-2012 के लिए गृह मन्त्रालय का रिपोर्ट कार्ड एक पत्रकार सम्मेलन में 10 जनवरी-2013 को नई दिल्ली में प्रस्तुत किया। उनके साथ नजर आ रही हैं पत्र सूचना कार्यालय की प्रिसिपल डायरेक्टर जनरल (एम एंड सी) सुश्री नीलम कपूर (फोटो:पी आई बी )
सेना और सुरक्षा बलों ने दिसम्‍बर, 2012 में संयुक्‍त अभियानों में जम्‍मू एवं कश्‍मीर में सक्रिय 14 आतंकवादियों (8 विदेशी आतंकवादियों सहित) का खात्‍मा किया जिससे आतंकवादियों को काफी नुकसान हुआ। इसमें सुरक्षा बलों के विरुद्ध विभिन्‍न हमलों में शामिल नौ उग्रवादी (2 स्‍थानीय उग्रवादी तथा 7 विदेशी उग्रवादी) शामिल थे जो श्रीनगर सिटी में हमले की योजना बना रहे थे। मारे गए दो उग्रवादी (पम्‍पोरी में सेना के काफिले पर हमले में शामिल एक विदेशी आतंकवादी सहित) होटल सिल्‍वर स्‍टार गोलीबारी में शामिल थे। मारे गए उग्रवादियों में दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय विस्‍फोट मामले में वांछित हिजबुल मुजाहिद्दीन का एक स्‍थानीय कमांडर भी शामिल था।

2.   दिसम्‍बर 2012 माह के दौरान राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी ने वर्ष 2006 में मालेगांव में, फरवरी, 2007 में समझौता एक्‍सप्रेस में और मई 2007 में मक्‍का मस्जिद, हैदराबाद में तथा सितम्‍बर 2008 में मालेगांव में बम विस्‍फोट की घटनाओं में शामिल चार अभियुक्‍तों को गिरफ्तार किया। इन चार अभियुक्‍तों में से राजेन्‍द्र चौधरी, धन सिंह और मनोहर मालेगांव में बम रखने में शामिल थे; राजेन्‍द्र चौधरी और तेजराम ने हैदराबाद में मक्‍का मस्जिद में बम रखे थे तथा धन सिंह मालेगांव में बम विस्‍फोट में शामिल था।

    पूछताछ के दौरान इन अभियुक्‍तों ने पता न लगे तीन सनसनीखेज पुराने अपराधों अर्थात् (i) उज्‍जैन के नरवर पुलिस थाने में एक महिला नन (लीना) पर गोली चलाकर उसे घायल करने,  (ii) 9 जनवरी, 2004 को जम्‍मू में एक मस्जिद पर ग्रेनेड फेंकने, जिसमें दो व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हो गई तथा 15 अन्‍य घायल हो गए,  (iii) फरवरी 2005 में नई दिल्‍ली में ‘’एस. ए. आर गिलानी’’ (संसद हमला मामले में वरी अभियुक्‍त) पर गोली चलाने, (iv) उज्‍जैन (मध्‍य प्रदेश) में एक पठान मुजीव लाला की हत्‍या करने तथा  (v) रमेश निनामा (इंदौर के पियर सिंह निनामा की हत्‍या के मामले में एक प्रमुख गवाह) की हत्‍या करने में अपनी भूमिकाएं स्‍वीकार कर लीं।

3.   केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग, भोपाल द्वारा केन्‍द्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, भोपाल का निर्माण किए जाने के लिए 7 दिसम्‍बर, 2012 को 281 करोड़ रुपये की राशि की स्‍वीकृति जारी की गई है। यह अकादमी सीधी भर्ती से नियुक्‍त होने वाले राज्‍यों के पुलिस उपाधीक्षकों तथा अपर पुलिस अधीक्षकों को बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान करेगी तथा हमारे मित्र देशों की प्रशिक्षण आवश्‍यकताओं का निराकरण करेगी।
4.   दिनांक 4 दिसम्‍बर, 2012 को बंगलादेश सरकार के गृह मंत्री डॉ. मुहीउद्दीन खान आलमगीर ने मुझसे मुलाकात की तथा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद के खतरे का निवारण करने के लिए पार‍स्‍परिक सहयोग आदि से संबंधित द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। सीमा पार से चलने वाली अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने के लिए दोनों देशों के बीच हस्‍ताक्षरित समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (सी बी एम पी) पर सहयोग बढ़ाने पर हमारी सहमति हुई, हमने सुरक्षा संबंधी मामलों पर सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए नोडल पॉइंट्स के कार्य संचालन की समीक्षा की तथा हमने जीरो लाइन के 150 गज के भीतर विकास कार्य की अनुमति देने पर सहमति व्‍यक्‍त की। हम संशोधित यात्रा करार और प्रत्‍यर्पण संधि को अंतिम रूप देने तथा उस पर जनवरी 2013 में हस्‍ताक्षर करने के लिए सहमत हो गए। गृह मंत्री स्‍तर की अगली वार्ता 28 से 30 जनवरी, 2013 के दौरान ढाका में आयोजित की जाएगी।

5.   12 दिसम्‍बर, 2012 को नाईजीरिया के माननीय मिनिस्‍टर ऑफ इंटीरियर श्री अब्‍बा मोरो ने मुझसे मुलाकात की और आप्रवासन तथा वीजा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की।
6.   दिनांक 14 दिसम्‍बर, 2012 से 16 दिसम्‍बर, 2012 तक पाकिस्‍तान के इंटीरियर मिनिस्‍टर श्री रहमान मलिक द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत दौरे पर आए। आतंकवाद को पाकिस्‍तान के निरंतर सहयोग और पाक अधिकृत कश्‍मीर में आतंकवादी शिविरों के संचालन, मुंबई आतंकवादी हमले के प्रमुख मास्‍टर माइंड व्‍यक्तियों के अभियोजन तथा विचारण, मुंबई आतंकी हमले के षड़यंत्रकारियों तथा 1993 के मुंबई बम विस्‍फोटों के भगोड़ों को कानून के अंतर्गत सजा दिलाने, नियंत्रण रेखा तथा अंतर्राष्‍ट्रीय सीमाओं के पार से गोलीबारी, आतंकवाद के वित्तपोषण, जाली भारतीय करेंसी नोट, पाकिस्‍तान में मछुआरों तथा सिविलियन कैदियों और भारत के युद्ध बंदियों की रिहाई, वीजा और कंसूलर मुद्दों, स्‍वापक तथा मादक द्रव्‍यों की तस्‍करी तथा भारत और पाकिस्‍तान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर करने और उसका अनुसमर्थन करने तथा एम एल ए टी एवं प्रत्‍यर्पण संधि आदि मुद्दों पर चर्चा की गई।

7.   8 सितम्‍बर, 2012 को भारत तथा पाकिस्‍तान सरकारों के बीच हस्‍ताक्षरित नए वीजा करार को भारत के माननीय गृह मंत्री तथा पाकिस्‍तान के माननीय इंटीरियर मिनिस्‍टर द्वारा 14 दिसम्‍बर, 2012 को नई दिल्‍ली में क्रियाशील बनाया गया।

8.   19 दिसम्‍बर, 2012 को संयुक्‍त राष्‍ट्र शरणार्थी उच्‍चायुक्‍त श्री एन्‍टोनिओ गुटरेस ने मुझसे मुलाकात की और शरणार्थियों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

आंतरिक सुरक्षा
9.   26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले में पाकिस्‍तान में गिरफ्तार अभियुक्‍त के विचारण के संबंध में पाकिस्‍तान के न्‍यायिक आयोग के दूसरे प्रस्‍तावित दौरे के संशोधित विचारार्थ विषयों को अंतिम रूप देने के लिए चार सदस्‍यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 20 से 26 दिसम्‍बर, 2012 तक पाकिस्‍तान का दौरा किया।
10.  20 दिसम्‍बर, 2012 को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन विधेयक, 2011 राज्‍य सभा द्वारा पारित किया गया। यह विधेयक लोक सभा द्वारा 30/11/2012 को पहले ही पारित कर दिया गया था।

11.   राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच के दौरान इकट्ठे किए गए साक्ष्‍यों की स्‍वतंत्र रूप से समीक्षा करने तथा इन मामलों में निर्धारित समय के भीतर आरोप पत्र दायर करने की सिफारिश करने के प्रयोजन से विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के अंतर्गत गठित ‘’प्राधिकरण’’ का 31 दिसम्‍बर, 2013 तक विस्‍तार किया गया है।

कश्‍मीर संबंधी मामले
12.  परियोजना मूल्‍यांकन समिति की 13वीं बैठक 19 दिसम्‍बर, 2012 को आयोजित हुई जिसमें विशेष उद्योग पहल योजना के अंतर्गत 25 उम्‍मीदवारों को प्रशिक्षित करने के लिए बजाज अलियांज तथा 50 उम्‍मीदवारों को प्रशिक्षित करने के लिए आइकॉन सेंट्रल लेबोरेट्रीज के प्रस्‍तावों को अनुमोदित किया गया।

पूर्वोत्‍तर
13.  कार्रवाई स्‍थगन के बारे में कुकी नेशनल आर्गेनाइजेशन (के एन ओ), यूनाइटेड पीपल्‍स फ्रंट (यू पी एफ) तथा मणिपुर के अम्‍ब्रेला संगठनों के साथ नई दिल्‍ली में 5 दिसम्‍बर, 2012 को त्रिपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं। यू पी एफ के साथ कार्रवाई स्‍थगन करार को नौ माह तक बढ़ा दिया गया है किंतु कुकी नेशनल आर्गेनाइजेशन (के एन ओ) के साथ कार्रवाई स्‍थगन का और विस्‍तार किए जाने के बारे में कोई समझौता नहीं हो सका।

14.  उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण के भाग के रूप में पूर्वोत्‍तर में भूमिगत संगठनों की गतिविधियों की समीक्षा की गई तथा हिन्‍नीवट्रेप नेशनल काउंसिल (एच एन एल सी), यूनाटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्‍फा) तथा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एन डी एफ बी) को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के अंतर्गत विधिविरुद्ध संगम (2 वर्ष तक) घोषित करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की गईं।

केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल
15.  भूमि के अधिग्रहण के लिए केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों को 25 करोड़ रु. की राशि स्‍वीकृत की गई है तथा कार्यालय/रिहायशी भवनों के निर्माण के लिए भी उनको 357 करोड़ रु. की राशि स्‍वीकृत की गई है।

आपदा प्रबंधन
16.  देश के विभिन्‍न भागों में कार्रवाई करने तथा राहत गतिविधियां चलाने के लिए नौकाओं, वाहनों तथा अपेक्षित उपकरणों सहित राष्‍ट्रीय आपदा कार्रवाई बल के 614 कार्मिक तैनात किए गए। राष्‍ट्रीय आपदा कार्रवाई बल के कार्मिकों ने राज्‍य सरकारों के प्राधिकारियों के समन्‍वय से कार्य किए तथा 16 लोगों की जान बचाई और 18 शव निकाले।

नक्‍सल प्रबंधन
17.  विशेष रैली आयोजित करके वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में रिक्तियों को भरने के लिए केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों में कांस्‍टेबलों की भर्ती के मुद्दे पर
चर्चा करने के लिए गृह सचिव ने 4 दिसम्‍बर, 2012 को केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों के महानिदेशकों के साथ एक बैठक की अध्‍यक्षता की।

18.  10 अक्‍तूबर, 2012 को केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक सेवानिवृत्त महानिदेशक श्री के. विजय कुमार को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास संबंधी मामलों पर सलाह देने के लिए वरिष्‍ठ सुरक्षा सलाहकार नियुक्‍त किया गया है।

19.  सुरक्षा बलों ने झारखंड के लातेहर जिले में माओवादियों के गढ़ों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए हैं। यह लड़ाई बहुत कठिन होने की संभावना है क्‍योंकि माओवादी इस क्षेत्र में दशकों से जमे हुए हैं तथा इस भू-भाग से परिचित हैं। इस क्षेत्र में हाल ही में हुई गोलीबारी से दस सुरक्षा कार्मिक शहीद हो गए तथा कुछ घायल हो गए। आसूचना संबंधी जानकारी से यह पता चला है कि माओवादियों को भी बहुत क्षति पहुंची है। यह अभियान इस क्षेत्र से माओवादियों का सफाया होने तक जारी रहेंगे।

विदेशी विषयक
20.  माह के दौरान पैराग्‍वे (चैक रिपब्लिक); नैरोबी (कीनिया) तथा मपुतो (मोजाम्बिक) में स्थित भारतीय दूतावासों में आई वी एफ आर टी के अंतर्गत इंटीग्रेटिड ऑनलाइन वीजा एप्‍लीकेशन प्रणाली शुरू की गई है। यह सुविधा अब विदेशों में स्थित 101 भारतीय मिशनों में उपलब्‍ध है।

21.  विदेशी छात्रों के कल्‍याण के बारे में तथा उनकी गतिविधियों/निष्‍पादन और सामान्‍य आचरण पर नजर रखने के लिए आई वी एफ आर टी के अंतर्गत विदेशी छात्र सूचना प्रणाली (एफ एस आई एस) विकसित की गई है ताकि संबंधित शैक्षणिक संस्‍थानों द्वारा विदेशी छात्रों के विवरण को ऑनलाइन भरने में सुविधा हो सके। यह मॉड्यूल प्रयोग के तौर पर एफ आर आर ओ चैन्‍नई में शुरू किया गया है।

संघ राज्‍य क्षेत्र
22.  यौन उत्‍पीड़न मामलों में 30 दिन के भीतर त्‍वरित न्‍याय तथा निवारक दंड की व्‍यवस्‍था करने के लिए दंड कानूनों में संभावित संशोधनों की जांच करने के लिए सरकार ने 24 दिसम्‍बर, 2012 को न्‍यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जे. एस. वर्मा समिति का गठन किया।

23.  दिल्‍ली में हाल ही में घटित सामूहिक बलात्‍कार की दु:खद घटना के बारे में सरकार ने 26 दिसम्‍बर, 2012 को न्‍यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) उषा मेहरा जांच आयोग का भी गठन किया।

24.  कल मैंने दिल्‍ली में कानून एवं व्‍यवस्‍था की स्थिति की दिल्‍ली पुलिस के साथ समीक्षा की। हमने इस बारे में निम्‍नलिखित निर्णय लिए हैं :-
क) दिल्‍ली पुलिस के कार्मिकों द्वारा रात्रि में मोटरसाइकिल पर गश्‍त लगाना;

ख) प्रत्‍येक पुलिस थाने में महिला हेल्‍प डैस्‍क-पुलिस थाना क्षेत्र में सभी स्‍कूलों और कॉलेजों में महिला हेल्‍प डैस्‍क का सैल नंबर तथा टेलीफोन नंबर अधिसूचित किया जाना होगा; और

ग) सिविल रक्षा कार्मिकों, होमगार्ड, भूतपूर्व सैनिकों तथा महिला गैर सरकारी संगठनों को शामिल करके प्रत्‍येक पुलिस थाने में समितियों का गठन किया जाए ताकि जनता, विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित मुद्दों को बातचीत के दौरान पुलिस अधिकारियों के समक्ष लाया जा सके।

राज्‍य विधायन
25.  भारत के राष्‍ट्रपति ने दिसम्‍बर, 2012 में असम राज्‍य सतर्कता आयोग विधेयक, 2010; राजस्‍थान विशेष न्‍यायालय विधेयक, 2012;  उत्तर प्रदेश

राजस्‍व संहिता विधेयक, 2006 तथा भारतीय स्‍टाम्‍प (पश्चिम बंगाल संशोधन) विधेयक, 2012 को मंजूरी प्रदान की।

हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को विशेष दर्जा
26.  हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र, जिसमें गुलबर्गा, बिदर, रायचूर, कोपल और यादगीर जिले शामिल हैं तथा कर्नाटक राज्‍य में बेल्‍लारी जिला अतिरिक्‍त रूप से शामिल है, को विशेष दर्जा प्रदान करने के लिए एक नया अनुच्‍छेद 371 (ञ)
अंत:स्‍थापित करने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा संविधान (संशोधन) विधेयक, 2012 पारित कर दिया गया है।

सीमा प्रबंधन
27.  दिसम्‍बर, 2012 माह के दौरान भारत बंगलादेश सीमा के 40 किलोमीटर भाग पर तेज रोशनी करने का कार्य पूरा कर लिया गया।

28.  तटीय सुरक्षा के अंतर्गत 131 तटीय पुलिस थानों में से 116 के लिए भूमि के निर्धारण को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा दिसम्‍बर 2012 तक 74 मामलों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तटीय राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा 60 में से 27 घाटों के लिए भूमि का निर्धारण कर लिया गया है।

29.  सरकार ने भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्‍बत सीमा पुलिस की कुल 804 किलोमीटर लम्‍बी 27 प्राथमिकता सड़कें स्‍वीकृत की हैं जिनमें से दिसम्‍बर 2012 तक 562 किलोमीटर लम्‍बी सड़कों का फॉर्मेशन कार्य तथा 241 किलोमीटर लम्‍बी सड़कों के समतलीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है।  (PIB) पत्रकार सम्‍मेलन में गृह मंत्री का वक्‍तव्‍य
वि.कासोटिया / श्‍याम – 139

बुधवार, जनवरी 09, 2013

प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक

09-जनवरी-2013 12:52 IST
विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने लिया भाग
प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक कल कोच्चि में हुई। विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने इसमें भाग लिया। बैठक में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वायलार रवि, वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्री आनंद शर्मा, विदेश मंत्री श्री सलमान खुर्शीद, मानव संसाधन मंत्री श्री एम.एम. पल्‍लम राजू, योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉक्‍टर मोंटेक सिंह आहलुवालिया और केन्‍द्र सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। 

बैठक में जिन प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया, उनमें श्री करण एफ. बिलीमोरिया, श्री स्‍वदेश चटर्जी, सुश्री इला गांधी, लॉर्ड खालिद हमीद, डॉक्‍टर रेणु खाटोर, श्री किशोर मधुबनी, श्री एल.एन. मित्‍तल, लॉर्ड भीखु छोटालाल पारेख, श्री सैम‍पितरोदा, तान श्री दातो अजीत सिंह, श्री नेविले जोसफ रोस, प्रोफेसर श्रीनिवास एस.आर.वर्धन और श्री युसूफाली एम.ए. शामिल थे। 

बैठक में प्रतिभागियों ने महत्‍वपूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों और भारत पर होने वाले उनके प्रभावों के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। इनमें वैश्विक आर्थिक स्थिति, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाएं, ऊर्जा सुरक्षा और एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रवृत्तियां जैसे मुद्दे शामिल थे। सदस्‍यों ने भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच तथा भारत और विभिन्‍न देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के बारे में भी अपने विचार प्रस्‍तुत किये। 

प्रधानमंत्री ने उनके दृष्टिकोण और रचनात्‍मक सुझावों के लिए सदस्‍यों का धन्‍यवाद किया। 

प्रधानमंत्री की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद का गठन वर्ष 2009 में हुआ था और हर साल इसकी बैठक होती है। इसका उद्देश्‍य दुनिया भर में फैले विभिन्‍न क्षेत्रों के प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना है, ताकि भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच सम्‍पर्कों के लिए व्‍यापक एजेंडा तैयार किया जा सके। (PIB)        
कोच्चि में प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक
मीणा/राजगोपाल/गीता-97

गुरुवार, जनवरी 03, 2013

वि‍यतनाम के साथ संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर

03-जनवरी-2013 19:17 IST
भारत की 'पूरब की ओर देखो नीति‍' का एक स्‍तंभ है वि‍यतनाम
 हम अपनी रणनीति‍क साझेदारी को आगे बढ़ाने के लि‍ए तैयार-पर्यटन मंत्री के. चि‍रंजीवी 
केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री के. चि‍रंजीवी ने कहा कि‍ वि‍यतनाम भारत की 'पूरब की ओर देखो नीति‍' का एक स्‍तंभ है और भारत वि‍यतनाम के साथ द्वि‍पक्षीय और आसि‍यान कार्यक्रम- दोनों तरफ से संबंधों को मजबूत बनाने के काम को उच्‍च प्राथमि‍कता देता है। हनोई स्‍थि‍त भारतीय दूतावास की ओर से व्‍यापार और नि‍वेश वि‍षय पर आयोजि‍त एक वि‍चारगोष्‍ठी को संबोधि‍त करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि‍ हम अपनी रणनीति‍क साझेदारी को आगे बढ़ाने के लि‍ए तैयार है, जो वि‍शेषकर आर्थि‍क, वाणि‍ज्‍यि‍क, रक्षा और सुरक्षा, वैज्ञानि‍क और तकनीकी‍ तथा सांस्‍कृति‍क क्षेत्रों से जुड़ हैं। इस आयोजन में वि‍यतनाम का उद्योग और व्‍यापार मंत्रालय तथा वि‍यतनाम चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स एण्‍ड इंडस्‍ट्री सहयोगी था। मंत्री महोदय ने कहा कि‍ वर्ष 2015 तक आसि‍यान-भारत व्‍यापार के लि‍ए 100 अरब अमरि‍की डॉलर का लक्ष्‍य रखा गया है। 

इस वि‍चारगोष्‍ठी में पीपुल्‍स कमि‍टी ऑफ डानांग के वाइस चैयरमैन श्री फुंग टान वीएट, वि‍यतनाम चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स एण्‍ड इंडस्‍ट्री के वाइस चैयरमैन श्री हुवांग वॉन डुंग, वि‍यतनाम नेशनल टूरि‍ज्‍म के चैयरमैन श्री नगुऐन वॉन ट्वान और लगभग 150 वि‍यतनामी कंपनि‍यों के प्रति‍नि‍धि‍यों ने भाग लि‍या। (PIB) 
वि‍यतनाम के साथ संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर 
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वि‍.कासोटि‍या/सुधीर/सुजीत-37