गुरुवार, जनवरी 24, 2013

दूरसंचार विशेष लेख

24-जनवरी-2013 15:57 IST
दूरसंचार क्षेत्र का असाधारण विकास                                                         
  भारत में टेलीफोन सेवा सर्वप्रथम कोलकाता में 1881-82 में शुरू की गई थी। इससे मात्र छह साल पहले टेलीफोन का आविष्‍कार हुआ था। स्‍वचालित टेलीफोन एक्‍सचेंज शिमला में 1913-14 में आरंभ की गई थी और उसकी क्षमता 700 लाइनें थी।
  दूरसंचार सेवओं में भी उल्‍लेखनीय सुधार हुआ है। इस क्षेत्र में सुधार के अनेक उपाय किये गए जिनमें 1994 में राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति की घोषणा शामिल है। इस नीति में कई महत्‍वपूर्ण लक्ष्‍यों को परिभाषित किया गया। इनके मांग पर टेलीफोन की उपलब्‍धता, उचित मूल्‍यों पर विश्‍वस्‍तरीय सेवा की व्‍यवस्‍था, दूरसंचार उपकरणों के प्रमुख निर्माता/निर्यातक आधार के रूप में भारत का उद्भव सुनिश्चित करना और सभी गांवों के लिए बुनियादी दूरसंचार सेवाओं की व्‍यापक उपलब्‍धता। स्‍वतंत्र नियामक के रूप में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की स्‍थापना 1997 में की गई और 1993 में नई दूरसंचार नीति की घोषणा की गई। इस नीति में इस क्षेत्र के विकास और देश में विश्‍वस्‍तरीय दूरसंचार ढांचे के विकास के लिए उचित ढांचे की उपलब्‍धता पर जोर दिया गया। तब से भारतीय दूरसंचार क्षेत्र ने देशवासियों को सस्‍ती और कारगर संचार सेवाएं उपलब्‍ध कराने के स्‍वप्‍न को पूरा करने का लम्‍बा सफर तय किया है।
  दूरसंचार विभाग की सार्थक नीतियों और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ शुरू किये गए सुधार के उपायों से दूरसंचार क्षेत्र का असाधारण विकास हुआ है। दूरसंचार क्षेत्र का गत कुछ वर्षों में, विशेष रूप से बेतार क्षेत्र में, असाधारण विकास हुआ है। भारतीय दूरसंचार नेटवर्क नवंबर 2012 के अंत में 921.47 मिलियन टेलीफोनों के साथ विश्‍व में चीन के बाद इस सुविधा को उपलब्‍ध कराने वाले दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में उभरा है। भारतीय बेतार टेलीफोन नेटवर्क भी नवंबर 2012 के अंत में 890.60 मिलियन टेलीफोन कनेक्‍शन वाला दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। देश में प्रति सौ की आबादी पर टेलीफोनों की संख्‍या के अनुसार टेली-सघनता नवंबर 2012 के अंत में 75.55 प्रतिशत थी।
  दूरसंचार भी बिजली, सड़कों और पानी आदि जैसी बुनियादी सेवाओं के रूप में उभरा है और देश के संपूर्ण सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्‍यक आर्थिक विकास का महत्‍वूपर्ण कारक बन गया है। हाल ही में किये गये एक अध्‍ययन से पता चलता है कि भारत में इंटरनेट उपभोक्‍ताओं की संख्‍या में औसतन दस प्रतिशत वृद्धि हुई है जो सकल घरेलू उत्‍पाद में 1.08 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। दस राज्‍यों में इंटरनेट की 10 प्रतिशत मांग को देखते हुए विकास में वृद्धि औसतन 2.36 प्रतिशत है। वर्ष 2009-10 में अपेक्षित रूप से विकसित इन 10 राज्‍यों में इंटरनेट की दर 2.76 प्रतिशत है जबकि विकासशील राज्‍यों के रूप में 9 राज्‍यों में इंटरनेट औसतन 0.61 प्रतिशत है। अध्‍ययन से यह भी पता चलता है कि मोबाइल की मांग में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि के कारण सकल घरेलू उत्‍पाद में 1.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति -2012 (एनटीपी-2012)
  सरकार ने 31 मई, 2012 को राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति-2012 (एनटीपी-2012) को मंजूरी दी। इसमें दूरदृष्टि, सामरिक निर्देश और दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित विभिन्‍न मझौले और दीर्घकालिक मामलों का वर्णन किया गया है। एनटीपी-2012 का मुख्‍य उद्देश्‍य समूचे देश में सस्‍ती, टिकाऊ और सुरक्षित दूरसंचार और ब्रॉडबैंड सेवाओं से लोगों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाना है। इस नीति का मुख्‍य जोर इन सेवाओं से अर्थव्‍यवस्‍था पर बहुआयामी और रूपांतरणीय प्रभाव डालना है। यह इक्विटी और समावेशिता को बढ़ाकर राष्‍ट्रीय विकास के एजेंडे को बढ़ाने में इन सेवाओं की भूमिका को स्‍वीकार करता है। नागरिकों के लिए संचार की सस्‍ती और कारगर सेवाएं उपलब्‍ध कराना एनटीपी-2012 का मुख्‍य लक्ष्‍य है। एनटीपी-2012 इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की मुख्‍य भूमिका और परिणामस्‍वरूप प्रतिस्‍पर्धात्‍मक वातावरण में सेवा प्रदाताओं की व्‍यावहारिकता सुनिश्चित करने को स्‍वीकार करती है। एनटीपी-2012 के अनुसार ये सिद्धांत उपभोक्‍ताओं, सेवाप्रदाताओं के हितों और सरकारी राजस्‍व के बीच संतुलन बनाये रखने में आवश्‍यक निर्णय लेने का पथ प्रदर्शन करेंगे।
एनटीपी-2012 के मुख्‍य लक्ष्‍य:-
*सभी नागरिकों को दूरसंचार की सुरक्षित, सस्ती और उच्‍च गुणवत्‍तापूर्ण सेवाएं उपलब्‍ध कराना।
*सेवाओं और सेवा क्षेत्रों के लिए एक राष्‍ट्र-एक लाइसेंस तैयार करने का प्रयास करना।
* एक राष्‍ट्र- पूर्ण मोबाइल संख्‍या पोरटेब्लिटी प्राप्‍त करना और एक राष्‍ट्र- उन्‍मुक्‍त रोमिंग के लिए काम करना।
*ग्रामीण टेली-सघनता सन् 2017 तक को लगभग 39 के वर्तमान स्तर को बढ़ाकर 70 और सन्  2020 तक 100 तक बढ़ाना।
*ब्रॉडबैंड संपर्कता सहित दूरसंचार को शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य जैसी बुनियादी आवश्‍यकता के रूप में मान्‍यता देना और ब्रॉडबैंड का अधिकार प्राप्‍त करने की दिशा में कार्य करना। 
*वर्ष 2015 तक मांग पर सस्‍ता और टिकाऊ ब्रॉडबैंड उपलब्‍ध करना। वर्ष 2017 तक ब्रॉडबैंड के 175 मिलियन कनेक्‍शन तथा वर्ष 2020 तक 600 मिलियन कनेक्‍शन डाउनलोड स्‍पीड कम से कम 2एमबीपी पर तथा मांग पर ही कम से कम 100एमबीपी की उच्‍चतर स्‍पीड पर उपलब्‍ध करना।
*प्रौद्योगिकियों के संयोजन से उच्‍च स्‍पीड और उच्‍च गुणवत्‍ता के ब्रॉडबैंड सभी ग्राम पंचायतों की वर्ष 2014 तक पहुंच और सभी गांवों तथा निवासियों तक सन् 2020 तक उतरोत्‍तर पहुंच बनाना।
*विकास के लिए आईसीटी की वास्‍तविक क्षमता प्राप्‍त करने के लिए दूरसंचार को अवसंरचना क्षेत्र के रूप में स्‍वीकार करना।
*दूरसंचार अवसंरचना गठित करने में अधिकृत रास्‍ते (राइट ऑफ वे) को संबोधित करना।
*सामान्‍य और भेदभाव रहित पहुंच बनाने के वास्‍ते विभिन्‍न नेटवर्कों की अंतर-संपर्कता के लिए सामान्‍य मंच निर्धारित  करने के लिए पर्यावरणीय व्‍यवस्‍था तैयार करना।
*दूरसंचार नीति की संवर्धित और सतत स्‍वीकृति तथा टिकाऊपन के लिए अक्षय स्रोतो के उपयोग को प्रोत्‍साहित करना।
*देश में नवीन इंटरनेट प्रोटोकाँल (आईपी) का विभिन्‍न चरणों और समयबद्ध तरीके से सन् 2020 तक पर्याप्‍त परिवर्तन प्राप्‍त करना और आईपी मंच पर विविध सेवाओं का प्रावधान करने के लिए वातावरणीय प्रणाली को प्रोत्‍साहित करना।  
दूरसंचार उपकरणों का विनिर्माण
  पिछले दशक के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में विशाल प्रगति ने दूरसंचार उपकरणों के विनिर्माण और अऩ्य समर्थित उद्योगों के देश में विकास को दिशा दी है। अगली पीढी की तकनीक और ऑपरेटरों द्वारा 3जी तथा ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस सेवा की शुरुआत से दूरसंचार उपकरणओं की मांग में वृद्धि हुई है। इस अऴसर का लाभ उठाने के लिए सरकार और नीतिनिर्माता घरेलू विनिर्माण उद्योग के विकास पर बल दे रहे हैं। पिछले दशक के दौरान दूरसंचार नेटवर्क और इसके उपभोक्ताओं में तीव्र वृद्धि के बावजूद दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में वैसी वृद्धि नहीं हुई है।
टेलीफोन उपकरण विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एनटीपी-2012 के अन्य चीजों के अलावा निम्नलिखित उद्देश्य हैं-
*घरेलू अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, आईपीआर सृजन, उद्यमिता, विनिर्माण, व्यवसायीकरण और आधुनिक दूरसंचार उत्पादों औऱ सेवाओं को 12वीं परियोजना अवधि के दौरान स्थापित करना।

* डिजायन, अनुसंधान विकास, आईपीआर सृजन, परीक्षण और मानकीकरण यानि दूरसंचार उपकरणों के घरेलू उत्पादन की मूल्य श्रृंखला को पूरा करना ताकि क्रमशः 45 प्रतिशत और 65 प्रतिशत (वर्ष 2017 के अंत और 2020 के अंत तक) के न्यूनतम मूल्य संवर्धन को भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की मांग को क्रमशः 60 प्रतिशत और 80 प्रतिशत करना।

*देश की सुरक्षा के संदर्भ में दूरसंचार उत्पादों की खरीद में घरेलू विनिर्मित दूरसंचार उत्पादों को वरीयता देना।
राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन)
  ऑप्टिकल फाइबर वर्तमान में राज्यों की राजधानियों, जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच गया है। सरकार ने 2,50,000 ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से संपर्क के लिए  20,000 करोड़ रुपए की लागत के साथ परियोजना को मंजूरी दी है। सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को बिना भेदभाव के नेटवर्क प्रदान किया जाएगा। ये सेवा प्रदाता गांवों में ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षण, ई-सासन आदि जैसे विभिन्न अनुप्रयोगों की सुरुआत कर सकते हैं। इस परियोजना कायूएसओएफ द्वारा निधियन किया जाएगा और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड के स्पेशल पर्पज व्हेकिल द्वारा इसे दिशा दी जाएगी।
नवीन इंटरनेट प्रोटोकॉल में रुपांतरण (आईपीवी6)
  आईपीवी अगली पीढ़ी का इंटरनेट प्रोटोकॉल है। आईपीवी4 की समाप्ति के साथ ही भविषअय की ज़रुरतों को पूरा करने के लिए आईपीवी6 में रुपांतरण आवश्यक हो गया है जो विशाल एड्रेस स्पेस और अन्य विशिष्टताओं को मुहैया कराते हैं। देश भर के देशों ने आईपीवी6 में रुपांतरण शुरु कर दिया है। भारत पहला ऐसा देश है जहां किसी सरकार ने नीति निर्णयों के साथ ही आईपीवी6  की स्थापना के लिए रोडमैप जारी किया है।
वैश्विक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ)
  संसद के अधिनियम द्वारा गठित वैश्विक सेवा दायित्व  कोष की अध्यक्षता केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक के द्वारा की जाती है। वह यूसएसओ फंड योजनाओं और राशि के वितरण के लिए प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन का अधिकार रखता है।
  जिन गांवों में कोई मोबाइल कवरेज नहीं था उन निर्दिष्ट ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में मोबाइल सेवाओं के प्रावधानों क लए 27 राज्यों के 500 जिलों में 7353 अवसरंचना साइटों/ टावरों  के प्रबंधन के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान करने के ले सरकार द्वारा यूएसओ फंड के जरिए योजना की शुरुआत की गई। इसके लिए 2000 या इससे अधिक आबादी वाले गांवों अथवा संकुलों का चयन किया गया। इस प्रकार तैयार की गई अवसंचरना को तीन सेवा प्रदाताओं द्वारा साझा किया गया।
वर्ष 2012 के लिए उपलब्धियां
  जनवरी से जून 2012 की अवधि के दौरान टेलीफोन कनेक्शनों की कुल संख्या 926.55 मिलियन से बढ़कर 965.52 मिलियन होगई जिससे दूरसंचार घनत्व 76.86 प्रतिशत से बढ़कर 79.58 प्रतिशत होगया। इसके बाद नवंबर 2012 के अंत तक टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या 921.47 मिलियन तक घट गई जिससे दूरसंचार घनत्व घटकर 75.55 प्रतिशत हो गया। जनवरी से नवंबर 2012 तक टेलीफोन कनेक्शनों में 5.08 मिलियन की शुद्ध कमी आई। जनवरी से जून 2012 के दौरान ग्रामीण टेलीपोन कनेक्शन में 315.39 मिलियन से 343.88 मिलियन की वृद्धि हुई जिससे दूरसंचार घनत्व 37.52 प्रतिशत से बढ़कर 40.71 प्रतिशत हो गया। इसके बाद नवंबर 2012 के अंत तक ग्रामीण टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या 343.74 मिलियन तक घट गई जिससे ग्रामीण दूरसंचार घनत्वघटकर 40.54 प्रतिशत हो गया। शहरी टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या में जनवरी से जून 2012 के दौरान 611.16 मिलियन से बढ़कर 621.64 मिलियन हो गयी जिससे शहरी दूरसंचार घनत्व 167.46 प्रतिशत से 168.62 प्रतिशत हो गया। इसके बाद नवंबर 2012 के अंत तक शहरी टेलीफोन कनेक्शन में 577.73 मिलियन की कमी हुई जिससे शहरी दूरसंचार घनत्व घटकर 155.40 प्रतिशत हो गया। जून 2012 के बाद दूरसंचार उपयोगकर्ता आधार में गिरावट की मुख्य वजह सेवा प्रदाताओं द्वारा बंद मोबाइल टेलीफोन कनेक्शन को हटाना था।
  जनवरी से सितंबर 2012 के दौरान इंटरनेट उभोक्ताओं की संख्या 22.39 मिलियन (13.35 मिलियन ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं सहित) से बढ़कर 24.01 मिलियन (14.68 मिलियन ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं सहित) हो गई। नवंबर 2012 के अंत तक देश में 14.88 मिलियन ब्रॉडबैंड उपभोक्ता थे।
स्पेक्ट्रम की नीलामी
12 नवंबर 2012 को शुरु की गई 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस नीलामी में पांच कंपनियों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) परियोजना
*एनओएफएन परियोजना की शुरुआत केन्द्र-राज्य के संयुक्त प्रयासों के साथ हुई। राज्य सरकारों द्वारा कोई आरओडब्ल्यू शुल्क न लगाकर इसमें योगदान की आशा है। इसके लिए भारत सरकार, राज्य सरकारों और बीबीएनएल के बीच त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना आवश्यक है।
*13 राज्यों आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, मिजोरम, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों दादर और नगर हवेली, दमन और दीव तथा पुड्डुचेरी के साथ 26 अक्टूबर 2012 को त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इन राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल 1,40,727 ग्राम पंचायत समाविष्ट होंगे।
*अजमेर जिले (राजस्थान) में अरेन ब्लॉक, उत्तरी त्रिपुरा जिले (त्रिपुरा) में पनीसगर ब्लॉक, विशाखापत्तनम जिले (आंध्र प्रदेश) के परावदा ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों को समाविष्ट करने के लिए तीन पायलट परियोतजनाओं को पूरा कियता गया है। 15 अक्टूबर 2012 को इन तीन पायलट परियोजना ब्लॉकों में प्रत्येक 58 ग्राम पंचायतों को 100 एमबीपीएस बैंडविड्थ उपलब्ध कराया गया है।
*एनआईसी द्वारा उपलब्ध आंकडों के आधार पर ओएफसी बिछाने के लिए सर्वे कार्य शुरु कर दिया गया है।
*बीबीएनएल ने इसके लिए तीन केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों यानि बीएसएनएल, रेलटेल और विद्युत ग्रिड को काम आवंटित किया है।
वैश्विक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ)
यूएसओ कोष की मदद से देश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों को शामिल करने के लिए दूरसंचार विभाग ने बहुत सी पहल की है। विभिन्न ओएसओएफ योजनाओं के संदर्भ में उपलब्धियों का ब्यौरा इस प्रकार है
*अक्टूबर 2012 तक वर्ष के दौरान 424 ग्राम सार्वजनिक टेलीफोन (वीपीटी) मुहैया कराए गए। अक्टूबर 2012 के अंत तक इसके तहत 5.80 लाख गांवों (97.76) गांवों को समाविष्ट किया गया।
*31 अक्टूबर 2012 तक 62443 में से 53452 वपीटी यानि 85.60 प्रतिशत वीपीटी नए चुनिंदा ऐसे  गांवों को प्रदान किए गए जो 2001 की जनगणना के अनुसार इससे दूर थे।
*अवसंचरना प्रदाताओं और वैश्विक सेवा प्रदाताओं द्वारा 14 मोबाइल टावर और 209 बेस ट्रांससीवर स्टेशनों को साझा मोबाइल अवसरंचना योजना के तहत वर्ष 2012 के दौरान अक्टूहर 2012 तक शुरु किया गया। इस योजना के तहत अक्टूबर 2012 के अंत तक 7310 (99.42 प्रतिशत) टावरों को लगाया गया।
*वर्ष 2012 के दौरान अक्टूबर 2012 तक ग्रामीण ब्रॉडबैंड योजना के तहत 52,628 वायर लाइन ब्रॉडबैंड कनेक्शन और 3,347 कियोसोक की स्थापना ग्रामीण और सूदूर क्षेत्रों में की गई।
*वर्ष 2012 के दौरान 31 अक्टूबर 2012 तक यूएसओएफ के जरिए 330.13 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित की गई। इस अवधि तक यूएसओएफ के तहत कुल 47035.33 करोड़ रुपए एकत्रित किए गए और उपलब्ध संभावित बकाया 24597 करोड़ रुपए है।
नवीन इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपीवी6) में परिवर्तनदूरसंचार विभाग के एनटी प्रकोष्ठ के प्रयत्नों से सभी केन्द्रीय विबाग और राज्य सरकारों ने आईपीवी6 में परिवर्तन के लिए केन्द्रीय अधिकारियों को नामांकित किया है। आईपीवी6 में परिवर्तन के लिए सभी हितधारकों को सजग किया गया है। वर्ष 2012 के दौरान इस बारे में सभी हितधारकों को जागरुक करने के लिए अनेक कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन किया गया है।
एनटीपी-12 में आईपीवी6 केन्द्र के नवाचार केन्द्र की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। एक स्थान पर आईपीवी6 सेवेँ उपलब्ध कराने के लिए माहौल प्रदान करने की योजना इस केन्द्र ने तैयार की है जिसमें  प्रशिक्षण, परामर्श, क्रियान्वयन, अनुसंधान, मानक और परीक्षण सब शामिल होगा। इसके अलावा प्रमाणीकृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी प्रक्रिया में है। एक चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से आईपीवी6 में रुपांतर के लिए दूसरा रोड़ मैप अपने अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही जारी किया जाएगा।
(पसूका फीचर)* संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दूरसंचार विभाग से साभार


मीणा/विजयलक्ष्मी/सुमन-25पूरी सूची-24-01-2013

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