..बस कुछ रास्तों की चर्चा--कुछ मंज़िलों की-- Contact:medialink32@gmail.com WhatsApp Number +919915322407
मंगलवार, अगस्त 03, 2010
संयुक्त पत्रकार सम्मेलन
विकीलीक्स के मुद्दे पर चर्चा जारी है. इसे लेकर 29 जुलाई 2010 को पेंटागन में भी एक संयुक्त पत्रकार सम्मेलन हुआ जिसमें अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम. गेटस और Chairman of the Joint Chiefs of Staff Navy Adm. Mike Mullen मौजूद थे. इन दोनों उच्च सैनिक अधिकारियों ने कहा कि इन हजारों वर्गीकृत दस्तावेजों की लीकेज सुरक्षा मामलों में एक गंभीर कोताही है. प्त्त्रकर सम्मेलन के इन पलों को अमेरिकी रक्षा विभाग के आर.डी वार्ड ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. अगर आपके पास भी इस मुद्दे पर कुछ कहने को है तो उसे अवश्य भेजिए....! ----प्रस्तुति :रेक्टर कथूरिया
रविवार, अगस्त 01, 2010
जल्द आपके सामने आ रहा है रजनीकांत का एक नया कमाल
190 करोड़ रुपये के बजट की भव्य फिल्म एन्थीरान अब रलीज़ होने की तैयार है. तीन सितम्बर 2010 को यह फिल्म आप सभी के लिए आम होगी. निर्माता कलानिधि और हंसराज सक्सेना की इस फिल्म को निर्देशित किया है एस शंकर ने. ऐ.आर. रहमान के संगीत से सजी इस तमिल फिल्म में रजनीकांत के साथ एश्वर्या राये और साथ ही एक और यादगारी भूमिका में होंगें डैनी डेन्जोगप्पा. वैज्ञानिक कथा वस्तु को आधार बना कर तैयार की गयी इस अदभुत फिल्म से बहुत सी आशाएं हैं और माना जा रहा है कि यह फिल्म इंडस्ट्री में नए रिकार्ड कायम करेगी.
सबसे महंगी मानी जा रही इस फिल्म का आडियो लांच हुआ तो रजनी भी खुश नज़र आये और ऐशवर्या राये भी. गौरतलब है की इस फिल्म के लिए बहुत सी स्थापित नाम वाली नायकायों से भी बात चली थी पर आखिर यह फिल्म हाथ आयी ऐश्वर्या राये के. जनवरी 2008 में ऐश ने इस फिल्म के मिलने की घोषणा बाकायदा एक न्यूज़ चैनल पर की. इस फिल्म से छह करोड़ रुपये मिलने से ऐश भारत की सबसे महंगी अदाकारा बन गयी थी. पर जैसा कि आम तौर पर सभी प्रोजेक्टों में होता है. इस फिल्म के मामले में भी यही हुआ.
डायलाग लिखने के लिए अनुबंधित जानेमाने लेखक सुजाता रंगराजन की फिल्म प्रोजेक्ट के दरमियाँ ही मौत हो गयी. 100 से अधिक नावल, 250 से अधिक कहानियां, दस नाटक, विज्ञान पर दस किताबें और बहुत सी यादगारी कवितायों के रचेयता की मौत से पूरे प्रोजेक्ट को बहुत झटका लगा. सभी सदमे में थे. सुजाता रंग राजन एक लेखक होने के साथ साथ पेशे से एक इंजीनियर भी थे.इस लिए उनकी वैज्ञानिक रचनायों में कल्पना भी एक सच की तरह प्रस्तुत होती थी. इस फिल्म की शुरूयात हुई 15 फरवरी 2008 को और 27 फरवरी 2008 को सुजाता का देहांत हो गया. उस समय उनकी उम्र थी 72 वर्ष. इस कमी को पूरा तो नहीं किया जा सकता था पर सारा प्रोजेक्ट अभी सामने था. उसे पूरा करना अवश्यक था. आखिर इस काम के लिए खोज निकाला गया वी बालाकुमारन को जो बहुत ही प्रख्यात लेखक हैं. 150 से अधिक नावल, 100 से अधिक कहानियां और 14 से अधिक फिल्मों के लिए डायलाग लिख कर ख्याति अर्जित करने वाले इस लेखक का कमाल भी आप देख पायेंगे इस फिल्म में.आपको यह प्रस्तुती कैसी लगी अवश्य बताएं. --रेक्टर कथूरिया
सबसे महंगी मानी जा रही इस फिल्म का आडियो लांच हुआ तो रजनी भी खुश नज़र आये और ऐशवर्या राये भी. गौरतलब है की इस फिल्म के लिए बहुत सी स्थापित नाम वाली नायकायों से भी बात चली थी पर आखिर यह फिल्म हाथ आयी ऐश्वर्या राये के. जनवरी 2008 में ऐश ने इस फिल्म के मिलने की घोषणा बाकायदा एक न्यूज़ चैनल पर की. इस फिल्म से छह करोड़ रुपये मिलने से ऐश भारत की सबसे महंगी अदाकारा बन गयी थी. पर जैसा कि आम तौर पर सभी प्रोजेक्टों में होता है. इस फिल्म के मामले में भी यही हुआ.
डायलाग लिखने के लिए अनुबंधित जानेमाने लेखक सुजाता रंगराजन की फिल्म प्रोजेक्ट के दरमियाँ ही मौत हो गयी. 100 से अधिक नावल, 250 से अधिक कहानियां, दस नाटक, विज्ञान पर दस किताबें और बहुत सी यादगारी कवितायों के रचेयता की मौत से पूरे प्रोजेक्ट को बहुत झटका लगा. सभी सदमे में थे. सुजाता रंग राजन एक लेखक होने के साथ साथ पेशे से एक इंजीनियर भी थे.इस लिए उनकी वैज्ञानिक रचनायों में कल्पना भी एक सच की तरह प्रस्तुत होती थी. इस फिल्म की शुरूयात हुई 15 फरवरी 2008 को और 27 फरवरी 2008 को सुजाता का देहांत हो गया. उस समय उनकी उम्र थी 72 वर्ष. इस कमी को पूरा तो नहीं किया जा सकता था पर सारा प्रोजेक्ट अभी सामने था. उसे पूरा करना अवश्यक था. आखिर इस काम के लिए खोज निकाला गया वी बालाकुमारन को जो बहुत ही प्रख्यात लेखक हैं. 150 से अधिक नावल, 100 से अधिक कहानियां और 14 से अधिक फिल्मों के लिए डायलाग लिख कर ख्याति अर्जित करने वाले इस लेखक का कमाल भी आप देख पायेंगे इस फिल्म में.आपको यह प्रस्तुती कैसी लगी अवश्य बताएं. --रेक्टर कथूरिया
गुरुवार, जुलाई 29, 2010
ऐ मेरे वतन के लोगो ज़रा आँख में भर लो पानी....!
सेना के जवान जब देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाने के लिए किसी मिशन पर जाते हैं तो उनके घरों में भी होती है उनकी बूढी मां, उनके बुज़ुर्ग पिता, प्यारे से बच्चे और उनकी जीवन की सुंदर सी संगिनी. उन सभी को भी आती हैं बहुत सी मुश्किलें. जब उन सभी को याद आती है अपने उस सेनिक जवान की तो उनका दिल भी रो उठता है. पर वे उसे छुपा लेते हैं मुस्कराहट के पर्दे में अपने सारे गम. इन गमों को बांटने के लिए उप राष्ट्रपति Joe Biden की पत्नी Dr. Jill Biden 28 जुलाई 2010 को विशेष तौर पर सैनिकों की पत्नियों के पास फोर्ट ड्रम, न्यूयार्क में पहुँचीं और उनके दुःख दर्द सुने. उनसे कई मुद्दों पर सुझाव मांगे.गौरतलब है की डाक्टर जिल सैनिक परिवारों की भलाई के मामले में फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा के साथ भी उल्लेखनीय काम कर चुकी हैं. इन पलों की अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए कैमरे में उतारा John D. Banusiewicz ने. आपके मन में अगर इस मामले को लेकर कुछ उठे तो अपने विचार अवश्य भेजिए हमें इंतज़ार रहेगी आपकी राये और सुझावों की. --रेक्टर कथूरिया.
बुधवार, जुलाई 28, 2010
शहीद सप्ताह शुरू, मीडिया खबर को धमकी और विमान दुर्घटना
दिन था 28 जुलाई 1972 का. उस दिन नक्सलवादी आन्दोलन के संस्थापक चारू मजूमदार की पुलिस हिरासत में मौत ही गयी थी. दार्जिलिंग के पास ही एक छोटे से रेलवे स्टेशन नक्सलबाड़ी से उठी वह चिनगार चारू मजूमदार की मौत से भी मंद नहीं पड़ी.वह लाल आंधी आज एक बहत ही व्यापक आतंक का रूप ले चुकी है.इस आन्दोलन की चर्चा होती है तो कानू सान्याल और चारू मजूमदार की बातें भी होती हैं.कभी उनके समर्थन में तो कभी उनके विरोध में. उन विचारों की बात आज भी हो रही है. पर फिलहाल हम चर्चा कर रहे हैं शहीद सप्ताह की. 28 जुलाई के दिन को याद करते हुए.इस सप्ताह को मनाने की घोषणा की है भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने. अगर हमारे खिलाफ या फिर हमारे किसी भी आदमी के खिलाफ कुछ भी बोलोगे तो फिर जान से जायोगे. इस तर्ज़ की धमकी दी है एक जाने माने न्यूज़ चैनल ने मीडिया खबर.कॉम को. इस न्यूज़ पोर्टल के सम्पादक पुष्कर पुष्प ने इस सारे मामले की जानकारी आवश्यक तथ्यों सहित दिल्ली के पांडव नगर थाना को दे दी है. गौरतलब है कि मीडिया खबर ने इस चैनल की कुछ ऐसी अंदर की खबरें जग ज़ाहिर की थीं जिनका सम्बन्ध श्रम कानूनों के उलंघन से भी था. इन ख़बरों को रुकवाने के लिए बहुत से प्रयास पहले भी किये गए थे जो सफल नहीं हुए. अब देखना यह है कि वैकल्पिक मीडिया के तौर पर उभर रहे वैब मीडिया पर इस तरह के दबावों के खिलाफ कौन सामने आता है और कौन विरोधी पाले में जाता है. आप पूरी खबर पढ़ सकते हैं केवल यहां क्लिक करके.
इसी बीच एक दुखद खबर आई है पाकिस्तान से. इस्लामाबाद के निकट ही एक विमान दुर्घटना में 152 लोगों की मौत हो गयी है. कराची से आ रहा यह जहाज़ लैंडिंग के वक्त मरगला की पहाड़ियों में हादसे का शिकार हो गया. इस जहाज़ में 146 यात्री थे जबकि अन्य छह चालाक दल के सदस्य थे.कराची से सुबह 07:45 पर उड़ान भरने वाले इस जहाज़ का सम्पर्क 09 :45 बजे टूट गया था. घने जंगल वाली इन पहाड़ियों में बारिश के कारण राहत के कार्यों में काफी परेशानी आयीं.पाकिस्तान ने एक दिन के राष्ट्रिय शोक का एलान किया है. --रेक्टर कथूरिया
बुधवार, जून 09, 2010
गेटस ने की ब्रिटिश प्रधान मन्त्री से भेंट
अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस ने ब्रिटिश प्रधान मन्त्री डेविड कैमेरोन से 7 जून 2010 को लन्दन में भेंट की. ब्रिटिश प्रधान मन्त्री की रिहायश 10 डायूनिंग स्ट्रीट लन्दन यू के में हुई इस भेंट के इन अन्तरंग पलों को कैमरे में कैद किया अमेरिकी रक्षा विभाग के Master Sgt. Jerry Morrison ने.
शनिवार, मार्च 20, 2010
अब अखंड कश्मीर संगठन उत्तर भारत में भी सरगरम
अखंड कश्मीर की चर्चा फिर ज़ोरों पर है. इस मुद्दे पर काफी कुछ कहा जा चुका है. हालांकि कश्मीर हिन्दू फाऊंडेशन भी इस मामले को लेकर अपनी सरगर्मियां चला रही है पर अब नया मोर्चा सम्भाला है अखंड कश्मीर नामक संगठन ने. उत्तर भारत में अपनी सरगर्मियों में तेज़ी लाते हुए अब इस संगठन ने दिल्ली और चण्डीगढ़ में भी विशेष कार्यक्रमों कि घोषणा कि है. इस बार इस इस सम्बन्ध में चर्च हो रही है चंडीगढ़ में 22 मार्च को. प्रमुख वक्ता होंगें इस मिशन के संचालक स्वामी आत्म योगी जो कि काफी लम्बे समय से वैदिक एस्ट्रोलोजी में भी सरगरम हैं और देश के ज्वलंत मुद्दों पर कई विचार गोष्ठियां करवा चुके हैं तां कि एक नयी मज़बूत और अखंड चेतना पैदा की जा सके. ब्लॉग जगत में भी इस की चर्चा हुई और अब कश्मीर की अखंडता के मुद्दे पर एक विशेष गोष्ठी कोलकाता में रखी गयी है. कार्यक्रम के मुताबिक सर्वप्रथम सुबह 11 बजे से 11.30 बजे तक पूजा होगी, फिर 11.30 से 12 :00 बजे तक राम राज्य फाऊंडेशन पशिचमी बंगाल इकाई की एक विशेष बैठक, उसके बाद आयोजित होगी वर्ल्ड सिन्धी फॉर्म की एक मीटिंग जिसमें सिन्धी होमलैंड के लिए प्लाट देने की चर्चा होगी. बाद दोपहर 2 से तीन बजे तक किसी भी अन्य विषय पर विचार विमर्श हो सकेगा. स्वामी आत्म योगी की देख रेख में ही 18 फरवरी 2010 को पुणे में एक विशेष सभा आयोजित करके उन सभी लोगों को श्रध सुमन अर्पित किये गए थे जो लोग बम धमाकों में मारे गए थे. इस संबंध में चण्डीगढ़ में सम्पर्क किया जा सकता है मोबाइल फोन नम्बर 09878787887 पर जहां मिलेंगे रतनाजीत जाखड. अपने चण्डीगढ़ टूर से पूर्व स्वामी जी नयी दिल्ली में भी 21 मार्च को विशेष तौर पर आ रहे हैं.जहां मिलने के लिए मनीष सभरवाल से मोबाइल फोन नम्बर 9560906901 पर सम्पर्क किया जा सकता है. --रैक्टर कथूरिया मंगलवार, अप्रैल 21, 2009
वक्त वक्त की बात
इस समय जो भी आप के सामने है वो जिंदगी के अलग अलग रंग हैं वक्त वक्त की बात.......................!
एक और बुलंद आवाज़
घर में जितनी भी किताबें थी वे मैं सब पढ़ चुका था। न ही समीक्षा के लिए कोई नयी किताब मेरे पास आई थी और न ही भेंट में. चैनल की नौकरी छोड़ने के बाद वितीय संकट भी एक बार फिर गहरा गया था। किसी बुक स्टाल पर भी अब पहले की तरह एक दम सीधे सीधे जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। एक दिन लुधियाना के पंजाबी भवन में एक मीटिंग का बुलावा था सो वहां चला गया। मीटिंग शुरू होने में अभी आधा घंटा लगता नज़र आ रहा था. वक़्त का फायदा उठाने के लिए वहीँ पर स्थित लोक गीत प्रकाशन के कार्यालय में जाना कुछ ज्यादा ठीक लगा। मन में आया के चलो नयी किताबों का भी पता चल जायेगा और कीमत का भी कुछ अंदाजा हो जायेगा. वहां विनय कुमार जी थे शायद वहां के इंचार्ज। बहुत ही सनेह से मिले और सूचि मांगने पर उन्होंने मुझे अमृतसर से निकलती एक पंजाबी पत्रिका "अक्खर" का अप्रैल अंक पकड़ा दिया जिसमें पुस्तक सूची भी थी और बहुत कुछ और भी था जिसने मुझे काफी सुखद अहसास दिया।इस पत्रिका में काफी कुछ था। गुलज़ार की नज़म, वान गाग का उदासी का पोर्ट्रेट, डॉक्टर रविंदर से मुलाकात, नोबल पुरस्कार को आलुओं की बोरी कह कर ठुकरा देने वाले जान पाल सार्तेर के साथ उसकी महबूबा का संवाद और बहुत कुछ और भी। साथ ही मोहनजीत की ओर से लिखित इमरोज़ उर्फ जैक लन्दन के बारे में एक काव्य चित्र जो की एक कमाल की रचना है। न जाने कितने सागरों की गहरायीओं और कितने ही आसमानों की उडानों को पकड़ा है, उन्हें महसूस किया और उनका एहसास पाठकों को भी कराया....कुल मिलकर यह सब कुछ पढ़ कर ही महसूस किया जा सकता है। यह पत्रिका नागमणि की याद दिलाने के साथ साथ हेम ज्योति, रोहले बाण, किन्तु, प्रेरणा और नागमणि की याद दिलाने और उन सब की कमी को पूरा करने की ज़िम्मेदारी निभाने का पर्यास करती हुयी भी लगती है.हाँ एक बात और.........इस में विनय दुब्बे की एक नज़म भी है जो सिरजन के साभार पर्काशित की गयी है. आओ देखें इस नज़म के दो अंश:मैं जब भी कविता लिखता हूँ तो भूख को भूख लिखता हूँ विचार या विचारधारा नहीं लिखता..............--------विचार या विचारधारा के सम्बन्ध मुख्य सचिव प्रगतिशील लेखक mukhya सचिव जनवादी लेखक संघ से बात करो मैं तो कविता लिखता हूँ...........------------------विचारों से सव्तंत्र रहने का विचार भी अपने आप में बुरा नहीं पर शोषितों और शोषकों का अंतर अब किस विचार की ऐनक से देखा जाये यह भी विनय दुब्बे ही बता सकते हैं..............बार बार पढ़ने लायक इस पंजाबी पत्रिका के संपादक हैं परमिंदर जीत औरउनका दूरभाष फैक्स नंबर है : ०१८३-२५८६१०७ (अमृतसर)
पंजाब के सपूत डॉक्टर मान की कवितायेँ
"तुम वसंत हम पतझड़" डॉ ज्ञान सिंह मान रचित यह काव्य संग्रह जब मैंने पहली बार देखा तो मुझे लगा कि शायद ये शानिकाएं हैं छोटी छोटी कवितायेँ ; पर डॉक्टर मान कहते हैं कि नहीं ये सूत्र कवितायेँ हैं बिल्कुल ही नई विधा में ; कहीं से भी शुरू करो, कहीं से भी पढ़ लो :* मजबून इस ख़त का कुछ यूँ तो न था,कि आप पढ़ते और फाड़ देते । * मेरे फ़िर से जी उठने की हैरानी न होती;भूल से अगर इक बार ; तुमने छू लिया होता ! * रास्ते में बन गए कितने ही साथी ,मंजिल तक सिर्फ़ चार ने ही साथ निभाया है । * मेरी जिंदगी कोई प्लेटफोर्म तो न थीकि तुम आतीऔर रेल सी चली जाती। * लायूं कहाँ से इतने कृष्ण ,यहाँ तो हर शहर ही महांभारत है।
पंजाब और पंजाब
पंजाब............पाँच दरियाओं की धरती ! जहाँ दरिया झनां ने किताबे-इश्क में कई नए अफ़साने जोड़ कर एक नया इतिहास लिखा.............. सोहनी महीवाल का, हीर-राँझा का और बहुत कुछ जो दर्द से सराबोर है पर फ़िर bhi शाह हुसैन को अगर ज़्यादा मकबूलियत मिली तो उस किस्से से जिस में वोह लिखता है :
जंग हिंद पंजाब दा होण लगा , दोवें पातशाही फौजां भारीयाँ ने , अज होवे सरकार ता मुळ पावे , जेहडिआं खालसे तेगां मारियाँ ने ! पर इसी पंजाब को पंजाब ke ही एक और शायर प्रोफ़ेसर मोहन सिंह ने लिखा है :भारत है वांग मुंदरी! विच नग् पंजाब दा ..................इन दो महान शायरों का ये ख्याल किस हालात में कविता बन कर निकला होगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है..........!
खुदा के रंग
मेरे एक मित्र हैं तुषार भारतीय मेरे साथ ही एक टीवी चैनल में काम करते हैं । इसी सितम्बर महीने की 9 तारीख को रात २३:३५ पर उनका एस एम एस आया :मंजिल भी उनकी थी, रास्ता भी उनका था !एक हम अकेले थे ; बाकी सारा काफिला भी उनका था !साथ साथ चलने की सोच भी उनकी थी, फ़िर रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उनका था ! आज क्यूँ अकेले हैं हम...? दिल सवाल करता है , लोग तो उनके थे, क्या खुदा भी उनका था...........?ये उन्हों ने मुझे क्यूँ भेजा मैं समझ नहीं पाया सो आपकी नज़र कर रहा हूँ कि शायद आप भी उन्हें कुछ समझाएं ।वैसे मुझे लगता है कि शायद किसी से परेशान हैं ; अगर ऐसा है तो उन्हें बताना चाहता हूँ कि मुन्नी बेगम को ज़रूर सुने खास तौर पर ये ग़ज़ल उन्हों ने बहुत ही तर्रनुम और दर्द से गाई है ।: जालिमों अपनी किस्मत पे नाजां न हों ,दौर बदलेगा ये वक्त की बात है ; वो यकीनन सुनेगा सदाएं मेरी ;क्या तुम्हारा खुदा है ! हमारा नहीं ?
जिम्मेदार कौन ?
कभी एक गीत बहुत ही लोकप्रिया था :
सोहणे देशां विचों देश पंजाब नी सयियो ;
जिवें फुल्लां विचों फुल गुलाब नी सयियो !
पर अब पंजाब की हालत देख कर पूछा जा सकता है उन लोगों से जो रहनुमा होने का दावा करते हैं कि आख़िर हँसता बसता पंजाब टुकड़े टुकड़े और लहू लुहान कैसे हो गया ? सरबत्त का भला मांगने वाली इस धरती पर भाई भाई का दुश्मनी कैसे बन गया ? कहीं शरारत सियासत की तो नहीं ? कहीं ऐसा तो नहीं के मामला यहीं पर ही गड़बड़ हो....!
लगा कर आए हो जब पेड़ तुम बबूलों के ;
तुम्ही बतायो कहाँ से गुलाब निकलेगा ?
अधूरे पंजाब के नाम.....
मेरे एक मित्र कंवर सुखदेव ने कई दशक पहले लिखा था :एह मेरे नेत्रां दे दोआबे ; मैथों रो रो पंजाब मंगदे ने !ओह जेहड़े आप ने सिफर वर्गे ; मैथों सो सो हिसाब मंगदे ने !
एक सच जिंदगी के बारे में......
ओशो कहते हैं : जिंदगी क्या है इक पहेली है !कभी दुश्मन कभी सहेली है !छू के देखा तो महफिले यारां ;अपनी अपनी जगह अकेली हैं !
एक और बुलंद आवाज़
घर में जितनी भी किताबें थी वे मैं सब पढ़ चुका था। न ही समीक्षा के लिए कोई नयी किताब मेरे पास आई थी और न ही भेंट में. चैनल की नौकरी छोड़ने के बाद वितीय संकट भी एक बार फिर गहरा गया था। किसी बुक स्टाल पर भी अब पहले की तरह एक दम सीधे सीधे जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। एक दिन लुधियाना के पंजाबी भवन में एक मीटिंग का बुलावा था सो वहां चला गया। मीटिंग शुरू होने में अभी आधा घंटा लगता नज़र आ रहा था. वक़्त का फायदा उठाने के लिए वहीँ पर स्थित लोक गीत प्रकाशन के कार्यालय में जाना कुछ ज्यादा ठीक लगा। मन में आया के चलो नयी किताबों का भी पता चल जायेगा और कीमत का भी कुछ अंदाजा हो जायेगा. वहां विनय कुमार जी थे शायद वहां के इंचार्ज। बहुत ही सनेह से मिले और सूचि मांगने पर उन्होंने मुझे अमृतसर से निकलती एक पंजाबी पत्रिका "अक्खर" का अप्रैल अंक पकड़ा दिया जिसमें पुस्तक सूची भी थी और बहुत कुछ और भी था जिसने मुझे काफी सुखद अहसास दिया।इस पत्रिका में काफी कुछ था। गुलज़ार की नज़म, वान गाग का उदासी का पोर्ट्रेट, डॉक्टर रविंदर से मुलाकात, नोबल पुरस्कार को आलुओं की बोरी कह कर ठुकरा देने वाले जान पाल सार्तेर के साथ उसकी महबूबा का संवाद और बहुत कुछ और भी। साथ ही मोहनजीत की ओर से लिखित इमरोज़ उर्फ जैक लन्दन के बारे में एक काव्य चित्र जो की एक कमाल की रचना है। न जाने कितने सागरों की गहरायीओं और कितने ही आसमानों की उडानों को पकड़ा है, उन्हें महसूस किया और उनका एहसास पाठकों को भी कराया....कुल मिलकर यह सब कुछ पढ़ कर ही महसूस किया जा सकता है। यह पत्रिका नागमणि की याद दिलाने के साथ साथ हेम ज्योति, रोहले बाण, किन्तु, प्रेरणा और नागमणि की याद दिलाने और उन सब की कमी को पूरा करने की ज़िम्मेदारी निभाने का पर्यास करती हुयी भी लगती है.हाँ एक बात और.........इस में विनय दुब्बे की एक नज़म भी है जो सिरजन के साभार पर्काशित की गयी है. आओ देखें इस नज़म के दो अंश:मैं जब भी कविता लिखता हूँ तो भूख को भूख लिखता हूँ विचार या विचारधारा नहीं लिखता..............--------विचार या विचारधारा के सम्बन्ध मुख्य सचिव प्रगतिशील लेखक mukhya सचिव जनवादी लेखक संघ से बात करो मैं तो कविता लिखता हूँ...........------------------विचारों से सव्तंत्र रहने का विचार भी अपने आप में बुरा नहीं पर शोषितों और शोषकों का अंतर अब किस विचार की ऐनक से देखा जाये यह भी विनय दुब्बे ही बता सकते हैं..............बार बार पढ़ने लायक इस पंजाबी पत्रिका के संपादक हैं परमिंदर जीत औरउनका दूरभाष फैक्स नंबर है : ०१८३-२५८६१०७ (अमृतसर)
पंजाब के सपूत डॉक्टर मान की कवितायेँ
"तुम वसंत हम पतझड़" डॉ ज्ञान सिंह मान रचित यह काव्य संग्रह जब मैंने पहली बार देखा तो मुझे लगा कि शायद ये शानिकाएं हैं छोटी छोटी कवितायेँ ; पर डॉक्टर मान कहते हैं कि नहीं ये सूत्र कवितायेँ हैं बिल्कुल ही नई विधा में ; कहीं से भी शुरू करो, कहीं से भी पढ़ लो :* मजबून इस ख़त का कुछ यूँ तो न था,कि आप पढ़ते और फाड़ देते । * मेरे फ़िर से जी उठने की हैरानी न होती;भूल से अगर इक बार ; तुमने छू लिया होता ! * रास्ते में बन गए कितने ही साथी ,मंजिल तक सिर्फ़ चार ने ही साथ निभाया है । * मेरी जिंदगी कोई प्लेटफोर्म तो न थीकि तुम आतीऔर रेल सी चली जाती। * लायूं कहाँ से इतने कृष्ण ,यहाँ तो हर शहर ही महांभारत है।
पंजाब और पंजाब
पंजाब............पाँच दरियाओं की धरती ! जहाँ दरिया झनां ने किताबे-इश्क में कई नए अफ़साने जोड़ कर एक नया इतिहास लिखा.............. सोहनी महीवाल का, हीर-राँझा का और बहुत कुछ जो दर्द से सराबोर है पर फ़िर bhi शाह हुसैन को अगर ज़्यादा मकबूलियत मिली तो उस किस्से से जिस में वोह लिखता है :
जंग हिंद पंजाब दा होण लगा , दोवें पातशाही फौजां भारीयाँ ने , अज होवे सरकार ता मुळ पावे , जेहडिआं खालसे तेगां मारियाँ ने ! पर इसी पंजाब को पंजाब ke ही एक और शायर प्रोफ़ेसर मोहन सिंह ने लिखा है :भारत है वांग मुंदरी! विच नग् पंजाब दा ..................इन दो महान शायरों का ये ख्याल किस हालात में कविता बन कर निकला होगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है..........!
खुदा के रंग
मेरे एक मित्र हैं तुषार भारतीय मेरे साथ ही एक टीवी चैनल में काम करते हैं । इसी सितम्बर महीने की 9 तारीख को रात २३:३५ पर उनका एस एम एस आया :मंजिल भी उनकी थी, रास्ता भी उनका था !एक हम अकेले थे ; बाकी सारा काफिला भी उनका था !साथ साथ चलने की सोच भी उनकी थी, फ़िर रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उनका था ! आज क्यूँ अकेले हैं हम...? दिल सवाल करता है , लोग तो उनके थे, क्या खुदा भी उनका था...........?ये उन्हों ने मुझे क्यूँ भेजा मैं समझ नहीं पाया सो आपकी नज़र कर रहा हूँ कि शायद आप भी उन्हें कुछ समझाएं ।वैसे मुझे लगता है कि शायद किसी से परेशान हैं ; अगर ऐसा है तो उन्हें बताना चाहता हूँ कि मुन्नी बेगम को ज़रूर सुने खास तौर पर ये ग़ज़ल उन्हों ने बहुत ही तर्रनुम और दर्द से गाई है ।: जालिमों अपनी किस्मत पे नाजां न हों ,दौर बदलेगा ये वक्त की बात है ; वो यकीनन सुनेगा सदाएं मेरी ;क्या तुम्हारा खुदा है ! हमारा नहीं ?
जिम्मेदार कौन ?
कभी एक गीत बहुत ही लोकप्रिया था :
सोहणे देशां विचों देश पंजाब नी सयियो ;
जिवें फुल्लां विचों फुल गुलाब नी सयियो !
पर अब पंजाब की हालत देख कर पूछा जा सकता है उन लोगों से जो रहनुमा होने का दावा करते हैं कि आख़िर हँसता बसता पंजाब टुकड़े टुकड़े और लहू लुहान कैसे हो गया ? सरबत्त का भला मांगने वाली इस धरती पर भाई भाई का दुश्मनी कैसे बन गया ? कहीं शरारत सियासत की तो नहीं ? कहीं ऐसा तो नहीं के मामला यहीं पर ही गड़बड़ हो....!
लगा कर आए हो जब पेड़ तुम बबूलों के ;
तुम्ही बतायो कहाँ से गुलाब निकलेगा ?
अधूरे पंजाब के नाम.....
मेरे एक मित्र कंवर सुखदेव ने कई दशक पहले लिखा था :एह मेरे नेत्रां दे दोआबे ; मैथों रो रो पंजाब मंगदे ने !ओह जेहड़े आप ने सिफर वर्गे ; मैथों सो सो हिसाब मंगदे ने !
एक सच जिंदगी के बारे में......
ओशो कहते हैं : जिंदगी क्या है इक पहेली है !कभी दुश्मन कभी सहेली है !छू के देखा तो महफिले यारां ;अपनी अपनी जगह अकेली हैं !
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