Tourist Places लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Tourist Places लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, अगस्त 14, 2024

पर्यटन के साथ साथ मिलेगा ज्योतिष का ज्ञान भी

Monday 12th August 2024 at 5:00 PM

ज्योतिष से जुड़े पर्यटन में कैरियर भी है और रोज़गार भी 


मोहाली
: 12 अगस्त 2024: (इर्द गिर्द डेस्क):: 

ज्योतिष में कौन विश्वास करता है और कौन नहीं यह एक अलग मुद्दा है लेकिन जो लोग ज्योतिष को मानते हैं वे दूर दराज जा कर भी अपने भविष्य को जानने की जिज्ञासा को शांत करते हैं। पंजाब के जालंधर और होशियारपुर जिले कभी ज्योतिष के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। जानेमाने ज्योतिषी लोगों को देखते ही उनके मन की बात बता दिया करते थे। ज्योतिष ज्ञान की पिपासा के साथ पर्यटक एक मज़ेदार कैरियर भी 

अब वे महाज्ञानी लोग तो शरीरक तौर पर नहीं रहे लेकिन उनके परिवार अभी भी इसी विद्या को चलाते आ रहे हैं। उनकी पत्रिकाएं भी निकलती हैं जिनकी मांग अभी भी लगातार बढ़ रही है। इसी तरह बाद में पंजाब में ही सुल्तानपुर लोधी और कुछ अन्य  स्थान भी इस मकसद के लिए प्रसिद्ध हो गए। 

इन स्थानों पर जा कर जहां ज्योतिष या भविष्य जानने का मकसद पूरा हो जाता था वहीं इन स्थानों से जुड़े पर्यटन स्थल घूमने का भी फायदा हो जाता था। यही वना अब भी तेज़ी से लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही ज्योतिष एक कैरियर के तौर पर भी उभर कर सामने आने लगा है।

आज भी बहुत से स्थान हैं जहां ज्योतिष ज्ञान के विशेषज्ञ आसानी से मिल सकते हैं। उनका अच्छाखासा नाम है इस क्षेत्र में। इस तरह भारत और विदेशों में कई ऐसे स्थान हैं जो ज्योतिषीय अध्ययन और विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां हम कुछ प्रमुख स्थानों की संक्षिप्त सी चर्चा भी कर रहे हैं। 

भारत में ऐसे बहुत से स्थान हैं जहां के ज्योतिषी माने  हुए हैं।  उनकी ज्योतिष विद्या का लोहा बहुत से लोग मानते हैं। लोग दूर दराज से उनसे मिलने पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों का धार्मिक पर्यावरण और छवि भी इन स्थानों को और  महत्वपूर्ण बनाते हैं। 

इन स्थानों में वाराणसी भी प्रसिद्ध है जो कि उत्तर प्रदेश में है। वाराणसी (काशी) को ज्योतिष और वेदों का केंद्र भी  माना जाता है। यहां कई प्रतिष्ठित ज्योतिषी और गुरु भी मिलते हैं जो प्राचीन वेदों और ज्योतिष विद्या में विशेषज्ञ होते हैं। इस तरह वाराणसी में धर्मकर्म और ज्योतिष क्षेत्र से सबंधित लोगों की बहुत बड़ी संख्या आती जाती रहती है। 

वाराणसी की तरह ही उज्जैन भी इस मामले में बहुत ही विशेष है जो कि मध्य प्रदेश में है। गौरतलब है कि उज्जैन को ज्योतिष का गढ़ माना जाता है। यह शहर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए भी प्रसिद्ध है और यहां कई पुराने ज्योतिषी विद्वान भी मिलते हैं। उज्जैन में ज्योतिष के अध्ययन के लिए भी कई संस्थान हैं जो  और कैरियर के क्षेत्र में  निभाते हैं। 

 दक्षिण भारत में तिरुपति का तो विशेष स्थान है। यह आंध्र प्रदेश  है। तिरुपति का तिरुमला मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ज्योतिषी ज्ञान का भी प्रमुख केंद्र है। यहां कई ज्योतिषी हैं जो मंदिर के पुजारी भी होते हैं और ज्योतिष पर विशेष ज्ञान भी रखते हैं। दिलचस्प बात है कि यहां ज्योतिष विज्ञान कई तरह का है। 

पूणे यूं तो कई अन्य कारणों से भी प्रसिद्ध है लेकिन यहां ज्योतिष का भी विशेष है।  यह स्थान महाराष्ट्र में है। पूणे में ज्योतिष विद्या के कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं, जहां से कई नामी ज्योतिषी निकले हैं। यहां पर ज्योतिष का अध्ययन करने वाले छात्रों और विशेषज्ञों की बड़ी संख्या है। इस तरह यह स्थान भी ज्योतिष के मामले  नहीं है। 

जानेमाने धार्मिक केंद्र हरिद्वार और ऋषिकेश दोनों ही उत्तराखंड में हैं।  इन दोनों स्थानों को अध्यात्म और ज्योतिष का केंद्र माना जाता है। यहां पर कई ज्योतिषी और विद्वान हैं जो वेदांत, ज्योतिष और ध्यान के विशेषज्ञ होते हैं। यहां  से अंतर्राष्ट्रीय केंद्र भी कहे जा सकते हैं। 

देश के साथ साथ विदेश में भी ज्योतिष चर्चा के कई केंद्र हैं। इन विदेशी केंद्रों में ज्योतिष के विदेशी जिज्ञासुयों की संख्या ऍम तौर पर अधिक होती है। 

नेपाल का इस मामले में विशेष नाम है। नेपाल में भी ज्योतिष का पुराना इतिहास है। काठमांडू और अन्य प्रमुख शहरों में कई जाने-माने ज्योतिषी मिलते हैं जो वेदिक ज्योतिष में विशेषज्ञ होते हैं। यहां आस्था के कई केंद्र भी हैं और प्राचीन।  यहां की लाइब्रेरियां भी इस मामले में बहुत अमीर हैं।  नेपाल में पुस्तकों के प्रिंट एडिशन के साथ साथ डिजिटल एडिशन भी बहुत पहले आ गए थे।  

लंदन जो कि यूनाइटेड किंगडम का केंद्र है  पहुंच चुका है। लंदन में भारतीय समुदाय के कई ज्योतिषी मिल सकते हैं जो भारतीय वेदिक ज्योतिष में पारंगत होते हैं। यहां कई ज्योतिष संस्थान भी हैं।  जानने की इच्छा और प्यास भी बहुत से लोगों को है। 

न्यूयॉर्क अर्थात अमेरिका आधुनकिता का ही सर्वाधिक नया रूप है। न्यूयॉर्क में भी कई भारतीय ज्योतिषी मिलते हैं, जो विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। वहां  अंदाज़ भी बहुत उनसे हैं। कम्प्यूटर प्रणाली  बहुत पहले वाकिफ हो चुका था इसलिए ज्योतिष पर कम्प्यूटर का रंग इसे भी बहुत रहस्यमय  बनाता है। 

बाली जो कि इंडोनेशिया में है वहां भी ज्योतिष की बहुत मान्यता है। बाली में हिंदू धर्म और ज्योतिष का गहरा प्रभाव है। यहां कई ऐसे ज्योतिषी मिलते हैं जो स्थानीय संस्कृति और ज्योतिष ज्ञान को मिलाकर कार्य करते हैं।

ये स्थान ज्योतिष विद्या और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध हैं, और यहां आसानी से विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा सकती हैं। इन्हीं स्थानों से ज्योतिष का दायरा लगातार विशाल होता जा रहा है। 

अंग्रेज़ी में The Tours and Travels Screen भी देख सकते हैं 

रविवार, जुलाई 28, 2024

सुनिए उन आवाज़ों को--जो आपको बहुत सच्चे दिल से पुकार रही हैं!

इन आवाज़ों का पीछा ही कराएगा आपको पर्यटन में गहरे अनुभव 


चंडीगढ़
: 28 जुलाई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//इर्द गिर्द डेस्क)::

किसी  घूमने जाने की इच्छा वास्तव में हमारे गहरे अंतर्मन  है। प्रकृतिक जुड़ाव हमें एक दुसरे के नज़दीक लाने के प्रयास निरंतर है। कुछ लोग, कुछ स्थल हमें लगातार आवाज़ें देते रहते हैं। वे आवाज़ें निरथर्क नहीं होती। जो लोग उन आवाज़ों को सुनना शुरू कर देते हैं वे चल पड़ते हैं उन आवाज़ों के पीछे। क्या आपने  ऐसी कोई आवाज़?

धर्म और अध्यात्म की दुनिया में यह पंक्ति बहुत लोकप्रिय रही है कि जो ब्रहमंडे सोई पिंडे जो खोजै सो पावै। यह पंक्ति भक्त पीपा जी के लोकप्रिय शब्द में से ली गई है। संत पीपाजी एक प्रजाप्रिय शासक, महान संत व कवि थे। उनका जीवन सदैव प्रेरणादायी रहा भी और रहेगा भी। उनकी यह पंक्ति ब्रह्मण्ड और  एकता को भी बताती है और इसकी खोज का भी इशारा करती है।  किस्मत वाले लोग ही। 

वास्तव में हमारी इधर उधर की भटकना जाने जाने अनजाने अंतर्मन की बेचैनी का ही परिणाम होती है। उसी बेचैनी के चलते लोग शराब जैसे नशे में फंस जाते हैं और उसी के चलते इधर उधर किसी न किसी नै जगह जा कर फंस जाते हैं। मन की शांति फिर भी नहीं मिलती। लेकिन अगर  बैठे ही अपने  छिपे ब्रह्मंड को देखने की प्यास जाग उठे तो उस खोज का आनंद ही अलग होता है। यह खोज किसी एक सध लोकेशन या स्टेशन की ही नहीं बल्कि  सितारों से आगे की यात्रा भी करवा देती है। बस थोड़ी सी प्यास और थोड़ी सी नियमित मेडिटेशन और यूं लगने लगता है जैसे चले गए आसमानों के उस पार। जितनी देर आप आंखें मूँद कर बैठे रहेंगे आप को यह दूर ब्रह्मण्ड की सैर का अहसास होता। रहेगा दुनिया में रहने का बोध भी बना रहेगा। 

लेकिन सब को यह अनुभूतियां पहली बार में नहीं होतीं। अंदर की प्यास जागने लगती है। इसी प्यास के चलते फिर बहुत से कहीं दूर दराज के स्टेशन पर जाना चाहते हैं। इच्छा और प्यास का होना तो बहुत अच्छा है लेकिन आम पर्यटन के लिए क्या दूर दराज जाना ठीक और आवश्यक होता है? क्या अपने ही आस पास और नज़दीक रहते हुए इस प्यास को नहीं बुझाया जा सकता? आप नज़दीक के पर्यटन स्थल भी ढूंढ सकते हैं। आओ दोनों के फायदों और चुनौतियों पर डालते हैं एक नज़र।   

दूर दराज जाने का एक रोमांच भी होता है और रोमांस भी। आसमान छूते हुए पर्वतों के शिखर। किसी पर्वत के किसी ऊंचे गाँव में खड़े हो कर अगर नीचे की तरफ नज़र  नज़र डालें तो तैरते हुए बादल और उड़ाते हुए मोर बहुत मधुर सा दृश्य दिखते हैं। रात्रि को वहां तारे नीचे नज़र डाल कर भी देखे जा सकते हैं तब महसूस होता है अरे भई  तारे ज़मीन पर कैसे आ गए?

मैदानों में कल कल बहता पानी इतना निर्मल होता है कि पूरी तरह से पारदर्शी लगता है। उसकी ठंडक और उसका स्वाद भी अलौकिक सा ही होता है। पहाड़ी लोगों का जनजीवन, जगह जगह छोटे छोटे और बड़े स्थानों पर बने मंदिर एक अलग तरह की ही आस्था जगाते हैं। रेल और सड़क के ज़रिए आवाजाई के साधन, जगह जगह खुले हुए ढाबे और अन्य दुकानें इन सभी में एक अलग सा आकर्षण होता है।

दूर-दराज के स्थानों पर जाने में कुछ कठिनाईयां भी होती हैं और इनके कई फायदे भी होते हैं। दूर दराज जा कर आपको दूर के लोगों की संस्कृति देखने को मिलते हैं। उनके साथ बहुत सी समानताएं भी मिलेंगी। खानपान के मामले में बहुत से नए व्यंजन भी मिलेंगे। वहां लोग कैसे कपड़े पहनते हैं इसका भी कुछ अनुभव होगा। हालां कि  पौशाक घर की हो या बाहर पहनने की उस स्थानीय लाइफ स्टाईल को सामने रख कर व्यक्तिगत सुविधाओं के मुताबिक ही बनाया जाता है। 

 दूर दराज जा कर नई संस्कृति और परंपराओं का भी अनुभव होगा। इसके साथ ही अलग-अलग जगहों की संस्कृति, खान-पान, और रीति-रिवाज जानने को मिलते हैं। वहां के रीति रिवाज, दिन त्यौहार, शकुन-अपशकुन, साहित्य और कला के  नए नए लोग  मिलते हैं। 

इस तरह की यात्राओं में रोमांचक अनुभव भी बहुत से होते हैं। इस मामले में भी नए और अद्वितीय अनुभव मिलते हैं जैसे कि पहाड़ों की ट्रेकिंग, रेगिस्तान सफारी, समुद्र तटों का आनंद आदि। इन सभी क्षेत्रों में जो  चाहिए उन्हें कैरियर भी कई बार अच्छा मिल जाता है। साहसिक गतिविधियों का मज़ा भी अलग से मिलता है। स्कीइंग, स्कूबा डाइविंग, पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों का मौका भी खुल कर मिलता है। कुल मिलाकर ज़िन्दगी के इस सफर में गुज़ारा गया थोड़ा बहुत समय भी बहुत ही यादगारी बन जाता है। 

इसी तरह से आस-पास और नजदीक स्थानों का दौरा करने के भी कई फायदे होते हैं। एक तो आप अपने मूल रिहायशी केंद्र के नज़दीक रहते हैं। आज के ज़माने में घर बार पर नज़र रखना आसान रहता है। दूसरा नज़दीक के स्थानों की यात्रा कम खर्च में हो जाती है। एक परिवहन के मामले में यात्रा का खर्च कम होता है क्योंकि लंबी दूरी की यात्रा का खर्चा बचता है। इसके साथ ही समय भी काम लगता है। समय की बचत होती है। यात्रा का समय कम होने के कारण आप ज्यादा समय पर्यटन स्थल पर बिता सकते हैं।

नज़दीक के स्थानों पर जाने से आपको परिचितता का फायदा  है। पास के स्थानों की जानकारी पहले से होने के कारण यात्रा अधिक सहज और सुरक्षित होती है। दूर दराज के क्षेत्र में अज्ञानता से कई बार नुकसान भी हो जाते हैं। वहां न आपको रास्ते मालुम होते हैं और न ही परिवहन की पूरी जानकारी। ठहरने और खानेपीने के मामले में भी आपको हालात के साथ समझौता करना पड़ता है।   

स्वस्थ पर्यावरण प्रभाव भी  यात्रा से ही मिलता है। नज़दीक की यात्रा करने से पर्यावरण पर कम बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि यात्रा के लिए कम ईंधन की आवश्यकता होती है।

निर्णय लेने के लिए दुविधा हो तो सबसे पहले अपना उद्देश्य स्पष्ट करें। यात्रा का उद्देश्य तय करें कि आप आराम चाहते हैं, रोमांच, सांस्कृतिक अनुभव या कुछ और। इस तरह आपको स्वयं ही  जवाब मिलना शुरू हो जाएगा कि  आपके लिए कहां घूमने जाना उचित रहेगा। 

इसके साथ ही महत्वपूर्ण होता है समय और बजट का ध्यान रखना। नौकरी लोगों को भी इसका ध्यान रखना पड़ता है और  कारोबारी लोगों को भी। अपनी यात्रा के लिए उपलब्ध समय और बजट का ध्यान बहुत ज़रूरी। है इसकी चिंता शायद वही छोड़ सकते हैं जिनके पास बेशुमार धन भी हो और साथ ही उनके पीछे उनका काम काज संभालने वाला समझदार स्टाफ भी। 

घूमने जाना हो तो स्वास्थ्य और सुरक्षा बेहद ज़रूरी हो जाते हैं। अपनी स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता दें, खासकर तब जब आप दूर-दराज के स्थानों की यात्रा कर रहे हों। जहाँ जहाँ जाना है और जिस जिस रास्ते से जाना है वहां के मौसम और पर्यावरण का पूरा पता होना आवश्यक है। 

पर्यटन के लिए दूर-दराज स्थानों पर जाने का अपना एक अलग ही आनंद होता है, लेकिन आस-पास और नजदीक के स्थानों का दौरा करने के भी कई फायदे हैं। आइए, दोनों के फायदों पर एक नज़र डालते हैं।  इससे फायदा आपको भी होगा और समाज को भी। 

कहीं न कहीं अपने घूमने  पूरा करते हुए आप स्थानीय पर्यटन और स्थानीय लोगों की अर्थ व्यवस्था को को समर्थन: आस-पास के पर्यटन स्थलों की यात्रा करके स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन दें। बहुत से छोटे छोटे लेकिन बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल ऐसे  के लोगों की दाल रोटी सैलानियों से ही चलते हैं। इस लिए अगर कुछ महंगा भी लगे तो खरीद अवश्य लें। म्हणत करके रोटी खाने वालों के हाथ मज़बूत करना बहुत अच्छा रहता है। 

अंत में, चाहे आप दूर-दराज स्थानों की यात्रा करें या आस-पास के स्थानों की, महत्वपूर्ण यह है कि आप यात्रा का आनंद लें और नए अनुभवों से खुद को समृद्ध बनाएं। इससे आपका देश और दुनिया के साथ एक भावुक जुड़ाव पैदा होगा जो हर बार मज़बूत होता चला जाएगा जाएगा। हो सके तो आप भी सुनिए उन आवाज़ों को जो आपको पुकार रही हैं।