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बुधवार, नवंबर 30, 2022

सरप्राईज़ सप्लाई की राहत के कुछ पल कैमरे की ज़ुबानी

 मोटरबोट में फंसे  नागरिकों को पहुंचे गई राहत सामग्री 


अदन की खाड़ी
: 30 नवंबर 2022: (अमेरिकी रक्षा विभाग के सौजन्य से इर्द गिर्द डेस्क)::

जब जंग लगी हुई हो तो बहुत कुछ बर्बाद कर देती है। बहुत कुछ उजाड़ देती है। बहुत से घरों और परिवारों को तबाह कर देती है। जंग का यही स्वभाव है। तबाही  निशाना रहती है। फिर भी कभी कभी जंग आवश्यक हो जाती है। इसे लड़े बिना गुज़ारा भी नहीं होता। इसलिए कोशिश रहती है जंग न ही छिड़े लेकिन कभी कभी दुश्म इसके लिए मजबूर कर देता है। जंग जैसी स्थितियां अक्सर कहीं न कहीं बनी ही रहती हैं। इन हालतों में भी जंग में काम करने वाले योद्धा लोग सक्रिय रहते हैं। आम नागरिकों का ध्यान रखते हैं और उन तक आवश्यक सामग्रियां पहुंचाते रहते हैं। जंग में  किस के लिए संकट आएगा इसका अंदाज़ा पहले से लगाना कई बार नामुमकिन जैसा ही होता है। इस तरह के अनिश्चित हालात में आम नागरिक कहीं न कहीं किसी न किसी कारणवश फंस ही जाते हैं। कई बार आम नागरिक ऐसी जगहों पर फंस जाते हैं जहां उनके पास न भोजन पहुँचता है, न ही पानी और न ही दवाएं। जंग लड़ने वाले योद्धा लोग आम नागरिकों तक बिना किसी भेदभाव के यह सब ज़रूरी सामग्रियां पहुंचाते ही रहते हैं। अमेरिकी सेना से जुड़े योद्धाओं ने एक मोटरबोट में फंसे हुए आम नागरिकों तक जब 29 नवंबर 2022 को राहत सामग्री पहुंचाई तो अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े हुए उच्च अधिकारी Navy Petty Officer 2nd Class Cryton Vandiesal ने इन ख़ास क्षणों को तुरंत अपने कैमरे में उतार लिया।  सरप्राइज सप्लाई से जो राहत इन नागरिकों को मिली होगी उसका अनुमान आप इस तस्वीर को देख कर लगा ही सकजते हैं। लगा ही सकते हैं। यह तस्वीर अदन की खाड़ी में खींची गई थी। 

बुधवार, फ़रवरी 16, 2022

बहुत दम है इन जांबाज़ लेकिन वफादार कुत्तों में

अमेरिकी सेना: कदम से कदम मिला कर चलते चार पैरों वाले फाईटर


इंटरनेट वर्ल्ड
: 16 फरवरी 2022: (इर्दगिर्द के लिए कार्तिका सिंह की खोज)::

बहुत सी हिंदी फिल्मों में जानवरों और इंसानों का प्रेम और हमदर्दी शिद्द्त से दिखाया गया है। किसी में हाथी से दोस्ती,  किसी में बंदर से, किसी में कुत्ते से और कहीं कहीं और मिसालें भी हैं। ऐसी बहुत सी फ़िल्में हैं जिनमें जानवर अपनी सीमाओं से विकास करते करते बल्कि उनसे भी कहीं पार जा कर इंसान की सहायता करते हैं। उनके लिए बाकायदा ज़िंदगी  के संघर्ष में भाग लेते हैं। इस तरह की मिसालें केवल भारत में ही नहीं विदेशों में भी हैं। आम लोगों के साथ साथ सेना में भी कुत्तों पर विशेष ध्यान दिया जाता है और उन्हें बाकायदा महंगी ट्रेनिंग दी जाती है। 

अमेरिकी सेना में जो ट्रेनिंग प्रोग्राम चलते हैं उनमें इस तरह एकमात्र नस्ल बेल्जियम मालिनोइस भी है जिसे उनकी उच्च ऊर्जा, मजबूत खोजी, प्रशिक्षण क्षमता, चपलता, गति, ड्राइव, कार्य नैतिकता, वफादारी और जब आवश्यक हो, उग्रवादियों के कारण सेना के लिए उसके दुश्मनों के साथ सख्त से सख्त जंग भी लड़नी। इसे इस दिशा में आदर्श माना जाता है। वे जर्मन शेफर्ड से मिलते जुलते हैं, लेकिन वास्तव में उनसे भी कहीं अधिक कॉम्पैक्ट हैं।

सूंघना, पहचान लेना, भाग कर पकड़ लेना जैसी इनकी बहुत सी खूबियां हैं। आग हो या पानी बस इसे आदेश की इंतज़ार रहती है। सड़क का सफर हो जा ट्रेन का या हवाज़ी जहाज़ का इसे कभी डर नहीं लगता। इसे सेना की महंगी ट्रेनिंग से पूरी तरह तैयार किया जाता है। इसमें हर आपातकाल से निपटने की पूरी तरह से क्षमता है। यह तस्वीरें और जानकारी अमेरिक रक्षा विभाग से साभार ली गई है। 

अमेरिकी सेना में कदम से कदम मिला कर चलते चार पैरों  वाले फाईटर 

शनिवार, मार्च 20, 2021

भारत-उज्बेकिस्तान प्रशिक्षण युद्धाभ्यास 'डस्टलिक' का समापन

 19th March 2021 at 16:50 IST

 रानीखेत (उत्तराखंड) में चला प्रशिक्षण युद्धाभ्यास 


युद्धाभ्यास क्षेत्र से
: 19 मार्च 2021: (पीआईबी//इर्दगिर्द)::

शांति की रक्षा के लिए युद्ध की भी तैयारी रखनी पड़ती है। केवल तैयार ही नहीं रहना पड़ता बल्कि इस क्षेत्र में हर तरह की नई तकनीक भी अपनानी पड़ती है। इस मकसद के लिए युद्धभ्यास भी किये जाते हैं। इसी तरह का युद्धभ्यास रानीखेत उत्तराखंड में हुआ। यह भारत और उज़्बेकिस्तान के साथ ही था। इसका मुख्य मकसद था प्रशिक्षण। 

1. परस्पर 10 दिन चले आपसी अभ्यास के बाद भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त क्षेत्र प्रशिक्षण युद्धाभ्यास डस्टलिक के दूसरे संस्करण काशुक्रवार, 19 मार्च 2021 को समापन हुआ ।

2. 10 मार्च, 2021 को शुरू हुए संयुक्त अभ्यास में ज़ोर शहरीपरिदृश्य में उग्रवाद/आतंकवाद विरोधी अभियानों पर होने के साथ-साथ हथियारोंके कौशल पर विशेषज्ञता साझा करने पर केंद्रित था । इस अभ्यास ने दोनोंसेनाओं के सैनिकों को स्थायी पेशेवर और सामाजिक संबंधों को बढ़ावा देने काअवसर भी प्रदान किया ।

3. गहन सैन्य प्रशिक्षण के बाद दोनों सेनाओं के संयुक्तअभ्यास का समापन हुआ, दोनों देशों की सेना इस अभ्यास के दौरान आतंकवादीसमूहों पर अपनी युद्ध शक्ति और प्रभुत्व का प्रदर्शन कर रही थी । समापनसमारोह में दोनों देशों के अनूठे पारंपरिक संपर्क के साथ अपार प्रतिभा काप्रदर्शन किया गया । वरिष्ठ अधिकारियों ने अभ्यास के व्यावसायिक संचालन केप्रति संतोष और आभार व्यक्त किया ।

4. अभ्यास के दौरान पैदा हुई मिलनसारिता, दल भावना एवंसद्भावना से भविष्य में दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच संबंधों कोमजबूत करने में और बढ़ावा मिलेगा ।

एमजी /एएम/ एबी