सोमवार, मई 21, 2012

आतंकवाद निरोधी दिवस:सरकारी कर्मचारियों ने ली शपथ

सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा का किया विरोध
दिल्ली की वीर भूमि पर स्थित दिवंगत प्रधानमन्त्री श्री राजीव गाँधी की समाधि पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए नैशनल एडवाइज़री  काउन्सिल की चेयरपर्सन   सुश्री सोनिया गाँधी उनके साथ उनके बेटे राहुल गाँधी भी हैं
इसी दुखद घड़ी पर प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने भी अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये (पीआईबी फोटो)
कर्मचारियों को शपथ दिलाते केन्द्रित गृह मंत्री पी चिदम्बरम (पीआईबी) फोटो)
आज पूरे देश में आतंकवाद निरोधी दिवस मनाया जा रहा है। देश के सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और अन्‍य जनसंस्‍थानों के कर्मचारियों ने सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा के विरूद्ध शपथ ली। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदम्‍बरम ने आज प्रात: नॉर्थ ब्‍लाक स्थित गृह मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को शपथ दिलाई।
देश के सभी वर्गों के लोगों में आतंकवाद, हिंसा और जनता, समाज और पूरे देश पर पड़ने वाले इसके खतरनाक प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
आतंकवाद निरोधी दिवस मनाये जाने के पीछे मुख्‍य उद्देश्‍य युवाओं को आम जनता की पीड़ा के बारे में जानकारी देते हुए और यह दर्शाते हुए कि आतंकवाद किस प्रकार राष्‍ट्रीय हितों के विरूद्ध है, आतंकवाद/हिंसा की पद्धति से दूर रखना है। स्‍कूलों, कॉलेजों और विश्‍वविद्यालयों में वाद-विवाद/विचार-विमर्श के आयोजन, आतंकवाद और हिंसा के खतरों के बारे में विचार गोष्‍ठियों/सेमिनारों/व्‍याख्‍यानों आदि के आयोजन द्वारा तथा आतंकवाद व हिंसा के विरूद्ध जागरूकता लाने के लिए समर्पित एवं स्‍थायी अभियान चलाकर इन उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने का लक्ष्‍य है।( पीआईबी)
21-मई-2012 13:48 IST 

मंगलवार, मई 15, 2012

बहुत ही उत्साह से देखा गया रेड रिबन एक्सप्रेस को

रेड रिबन एक्सप्रेस जब 15 मई 2012 को तमिलनाडू के ज़िला करूर में पहुंची तो वहां इसे बहुत ही उत्साह से देखा गया।  इस मौके पर जिला कुलेक्टर सुश्री वी शोभना ने भी इस रेलगाड़ी में लगी प्रदर्शनी को विशेष तौर पर देखने के लिए \वक्त  निकला।.(पीआईबी फोटो)   15-May-2012

सोमवार, मई 14, 2012

दूरियों को नजदीकियों में बदलने का एक और प्रयास


ब्रह्मपुत्र नदी पर देश का सबसे लंबा पुल
विशेष लेख


एच सी कुंवर *
            असम में बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर रेल सह रोड़ पुल बनाए जाने की घोषणा 1996-97 के रेल बजट में एक राष्‍ट्रीय परियोजना के रूप में की गई थी। इसकी आधारशिला 1997 में तत्‍कालीन भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई और निर्माण कार्य वर्ष 2002 में शुरू किया गया। देश के इस सबसे लंबे पुल को 2007 में एक राष्‍ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। इसका निर्माण पूर्वोत्‍तर फ्रंटियर रेलवे करवा रहा है और काम चल रहा है। इसकी अनुमानित लागत रूपये 3232.01 करोड़ है और इसके अंतर्गत छोटे-बड़े पुलों, स्‍टेशनों और तटबंधों को मजबूत करने का काम भी शामिल है जो इस पुल के उत्‍तरी तट और दक्षिणी तट पर पूरा किया जा चुका है।

लक्ष्‍य मार्च 16                              करोड़ रूपये में
स्‍वीकृति का वर्ष
अनुमानित लागत
अनुमानित संपूर्णता मार्च-12
   2012-13
प्रगति ( %)
1997-98
3230.01
2382.61
 परिव्‍यय    
व्‍यय (अप्रैल     12 तक)
75 %
230
-

      इस पुल की लंबाई 4.940 किलोमीटर होगी और इसे बनाने के लिए 42 खंभे खड़े किये जायेंगे। इनमें से 32 खंभे बनाने का काम पूरा किया जा चुका है और इस सेतु के 2013 तक बनकर पूरा हो जाने की संभावना है। इस परियोजना को पूरी करने की सबसे बड़ी बाधा मौसम है क्‍योंकि निर्माण कार्य सूखे मौसम में ही चलता है। ऐसा कार्य सिर्फ चार महीनों के दौरान 15 नवम्‍बर से 15 मार्च तक हो पाता है। वर्ष के बाकी महीनों के दौरान यहां बारिश होती रहती है जिससे नदी में खंभे गलाने का काम मुश्किल हो जाता हे। वर्ष 2015-16 तक इसे बना कर चालू कर देने का लक्ष्‍य तय किया गया है1
      बोगीबील रेल सड़क सेतु पर बड़ी लाइन की दोहरी लाइनें बिछाई जायेंगी और इसपर तीन लेन वाली सड़क होगी जिससे ब्रह्मपुत्र नदी के उत्‍तरी और दक्षिणी तट को जोड़ा जा सकेगा और इसपर यातायात सुगम हो सकेगा। अरूणाचल प्रदेश और असम के पूर्वी भाग के लोगों को इसके कारण बहुत लाभ होगा। इस सेतु के बन जाने पर असम के सोनितपुर, लखीमपुर, ढेमाजी जिलों और अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए असम आना-जाना आसान हो जायेगा। अभी तक इन लोगों को ब्रह्मपुत्र नदी नाव से पार करनी पड़ती है।
      अरुणाचल प्रदेश के लोगों को इसके रास्‍ते ईटानगर जाने पर चौबीस घंटे से ज्यादा का समय बचेगा। यही नहीं इस सेतु के बन जाने पर रंगिया से मुकोंगसेलेक बड़ी लाइन के बीच संपर्क जुड़ जायेगा और देश के अन्‍य भागों से लोग सीधे वहां पहुंच सकेंगे। इसके चलते ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच संपर्क भी सुधरेगा। इस बड़ी परियोजना के पूरी हो जाने पर पूरे इलाके का सामाजिक-आर्थिक विकास तेज ही नहीं होगा बल्कि पूर्वी क्षेत्र में देश की सुरक्षा व्‍यवस्‍था भी मजबूत होगी। (पीआईबी)
*उपनिदेशक (मीडिया एवं संचार), रेल मंत्रालय

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रविवार, अप्रैल 22, 2012

कामरेड अनिल रजिमवाले ने लुधियाना में कहीं खरी खरी बातें

इन्कलाब न बटन दबाने से आयेगा और न ही थाने पर हमला करने से
लुधियाना में भी बहुत उत्साह से मनाया गया लेनिन का जन्म दिन
मानव समाज को दरपेश समस्याएं किसी दैवी शकित की तरफ से नहीं बल्कि मानव के हाथों मानव की लूट खसूट के कारन ही पैदा हो रही हैं. यह विचार आज लुधियाना में आयोजित एक विचार गोष्ठी में मुक्य वक्ता व  मार्क्सवादी दार्शनिक कामरेड अनिल र्जिम्वाले ने रखा.  इस गोष्ठी का आयोजन भारतीय कमियूनिस्ट  पार्टी की लुधियाना इकाई ने सोवियत संघ के संस्थापक व्लादिमीर लेनिन के जन्म दिवस के अवसर पर किया गया था. इसके साथ ही पार्टी विश्व भूमि दिवस को मनाना भी नहीं भूली.न्याय व  बराबरी पर आधारित भारत के विकास मार्ग की चर्चा करते हुए विचार गोष्ठी में इस बात पर चिंता  व्यक्त की गयी न-न्राब्री और बेरोज़गारी जैसी समस्याएं बहुत ही तेज़ी से लगता विकराल हो रही है. इस हकीकत को स्वीकार करने के साथ ही मार्क्सवादी दार्शनिक कमरे अनिल र्जिम्वाले ने चेताया कि न तो कोई बटन द्बनेसे इन्कलाब आयेगा और न ही कीई थाने टी. पर हमला करने से. इन्कलाब अगर आयेगा तो उए आप और हम जैसे आम आदमी ही लायेंगे. उन्होंने इसके लिए बार बार कार्ल मार्क्स के हवाले दिए और याद कराया कि ,आर्क्स के रस्ते पर चल कर ही इन्कलाब आएगा.
इस बेहद गंभीर मुद्दे पर बहुत ही सहजता से लगातार बोलते हुए कामरेड अनिल ने बीच बीच में शायरी का पुट देते हुए समझाया कि सुबह होती है शाम होती है तो यह किसी दैवी शक्ति के कारन नहीं बल्कि प्रकृति और  विज्ञानं के कारण. साम्यवाद के सिद्धांतों कि विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा हर विज्ञानं ने मार्क्सवाद को और मजबूत किया, बार बार सही साबित किया. इन्कलाब में हो रही देरी की तरफ संकेत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया की न तो बटन दबाने से इन्कलाब आने वाला है और न ही थाने पर हमला करने इन्कलाब आएगा. ढांडस बंधाते हुए उन्होंने कहा की सरमायेदारी से समाजवाद की तरफ जाता रास्ता लम्बा भी है और कठिन भी. उन्होंने स्पष्ट किया की हमारे लड़ने के कई तरीके हैं और जन संघर्षों का तरीका भी हमारा है. उन्होंने कहा की इन्कलाब आयेगा और इस के लिए इन्कलाब के मार्क्सवादी सिद्धांत जन जन तक पहुँचाने होंगें.  उन्होंने अपने लम्बे भाषण के बावजूद श्रोतायों को बांधे रखा. इक्क्लाबी सिद्धांतों के साथ साथ उन्होंने इतिहास की चर्चा भी की.  उन्होंने अख़बार निकलने के काम को भी इकलाब के लिए सहायक बताया और तकनीकी विकास के सदुपयोग की तरफ इशारा करते हुए कहा की मोबाईल और इंटरनेट का उपयोग भी इस कार्य के लिएये किया जाना चाहिए. इस सेमिनार में डाक्टर अरुण मित्र भी थे, डी पी मौड़ भी और कामरेड विजय कुमार भी और कई अन्य कामरेड भी. संगोष्ठी में महिलाएं भी बढ़ चढ़ कर शामिल थीं. -रेक्टर कथूरिया  

शनिवार, अप्रैल 21, 2012

जगदीश बजाज: जिसे मांगने पर गर्व है...!

शुरुआत: बूँद से सागर बन जाने के सफ़र की
Gyan Sathal mandir
रेल गाडी तेज़ी से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रही थी. रात गहराने लगी तो थके टूटे मुसाफिर भी सोने की तैयारी करने लगे.  उस डिब्बे में एक जोड़ी भी थी जिसमें पुरुष को बहुत ही जल्द गहरी नींद आ गयी थी. उसके साथ सफ़र कर रही महिला यात्री की आँखों में भी नींद अपना रंग दिखाने लगी. इतने में ही एक टिकट चैकर आया और उसने उस महिला से टिकट माँगा. महिला यात्री पुरुष के कंधे को झंक्झौरते हुए जोर से बोली जीजा जी जीजा जी. पुरुष हडबडा कर उठा और बोला क्या बात है. महिला ने चैकर की तरफ इशारा किया और कहा टिकट..! पुरुष कोई रेलवे मुलाजिम था, उसने झट से अपनी जेब में से एक पास निकाला और चैकर के हवाले कर दिया. पास देख कर चैकर बोला श्रीमान इस पास पर आप अपनी पत्नी के साथ तो सफ़र कर सकते हैं लेकिन साली के साथ नहीं. पुरुष यात्री ने टिकट चैकर की ने सारी बात समझ कर उसे पूरे विस्तार से समझाया कि जब उसकी पहली पत्नी का देहांत हुआ तो परिवार वालों ने मेरी दूसरी  शादी  उसीकी बहन के साथ कर साथ कर दी जो रिश्ते में मेरी साली ही लगती थी. इस तरह मेरी यह प्यारी सी साली मेरी पत्नी बन गयी पर मुझे जीजा जी कहने की आदत इसे अब तक पड़ी हुयी है सो यह अब भी मुझे जीजा जी ही कहती है. यह कहानी सुनाते हुए उस बुज़ुर्ग के चेहरे पर एक नयी चमक, होठों पर कुछ  रूमानी सी मुस्कान और आँखों में हल्की सी शरारत आ गयी. कहने लगे मुझे भी बस आदत सी पड़ी हुयी है....छूटती ही नहीं...मैंने पूछा कैसी आदत...तो कहने लगे...यही...मांगने की आदत....बस मुझे पता चल जाये कि इसकी जेब में पैसे हैं...फिर मैं उन्हें निकलवा ही लेता हूँ.... कई बार इस आदत को छोड़ना चाहा छोड़ना चाहा पर यह आदत जाती ही नहीं. साथ ही वह ये भी बताते हैं कि मांगना आसान नहीं होता. सब कि औरत बन के रहना पड़ता है. हजारों झमेले सामने आते हैं. कई बार ऐसा होता है कि लोग सब के सामने रसीद बुक से पर्ची तो कटवा लेते हैं पर पैसे दिए बिना चले जाते हैं. उस हिसाब को सम्भालना, फिर उनके चक्कर लगाना और उनसे पैसे निकलवाना...सब बहुत मुश्किल है पर मैं करता हूँ.गौर तलब है कि अब तो इस आदत के कारण ही उनके बहुत से किस्से कहानियां भी अख़बारों में भी छप चुके. टीवी चैनलों पर उनके प्रोग्राम भी दिखाए जा चुके लेकिन यह आदत कभी कम नहीं हुयी. वह इस वृद्ध अवस्था में भी सक्रिय हैं.
एक बार यह बुज़ुर्ग एक विशेष आग्रह पर महाराष्ट्र में रोटरी क्लब के एक कार्यक्रम में गए. बहुत जोर देने पर जब बोलने लगे तो वहां भी कहने लगे देखिये मुझे सब अनपढ़ समझते हैं लेकिन मैंने पीएचडी की हुयी है. वास्तव में यह एक ऐसा कार्यक्रम थ जिसमें सवाल जवाब भी साथ साथ हो रहे थे. सो इस वृद्ध व्यक्ति से भी सम्मान सहित सवाल किया गया कि आपने किस विषय में पीएचडी की है. वहां भी जनाब बिना किसी झिझक के जवाब देते हुए बोले जी मांगने में. मैं मांगने में एक्सपर्ट हूँ.  इसके बाद जैसे ही उन्होंने मांगने का कारण और लम्बे समय से चल रहा अपना  मिशन बताया तो वहां नोटों की बरसात होने लागिओ और देखते ही देखते  इस वृद्ध की झोली भर गयी. 
मेरी मुराद है लुधियाना के जानेमाने धार्मिक व्यक्ति जनाब जगदीश बजाज से जो गरीब बच्चों को पढाने के साथ साथ गरीब विधवा महिलायों को हर महीने राशन भी वितरित करते हैं.  गरीब लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कम्प्यूटर, सिलाई, कढाई और ब्यूटी पार्लर चलाने जैसे कई और प्रोजेक्ट भी चलाते हैं. यह सब होता है लुधियाना के सुभानी बिल्डिंग चोंक में स्थित ज्ञान स्थल मन्दिर में. इस चौंक  की कई इमारतों में फैले इस मन्दिर को इस तरह की मजबूती देने में जगदीश बजाज ने अपनी उम्र का एक बहुत सा हिस्सा इस तरफ लगा दिया.
मैंने एक बार पूछा बजाज साहिब लोग इस उम्र में आराम करते हैं और आप सारा सारा दिन काम. सुबह 9 नजे से लेकर मन्दिर के कार्यालय में बैठना दुखी लोगों के दुःख सुननाऔर फिर उनके कष्ट हरने के लिए मांगने के लिए निकल पड़ना. इस मिशन को लेकर फेसबुक जैसे मंच का इस्तेमाल भी बाखूबी करना...आखिर यह लगन आपको कहाँ से लगी. बजाज साहिब का चेहरा कुछ गंम्भीर हो गया.उनकी आँखें कहीं दूर अतीत में झाँकने लगीं. बस कुछ ही पलों का अंतराल और फिर बोले बात बहुत पुरानी है. हमने एक जागरण रखा था. मैं पंजाब केसरी पत्र समूह के मुख्य सम्पादक विजय चोपड़ा जी के पास गया और उन्हें निवेदन किया कि आप इस जागरण में मुख्य मेहमान बन कर आने की कृपा करें. उनके पास वक्त नहीं था और मैं उन्हें बार बार वक्त निकलने  के लिए विनती कर रहा था. इतने में ही दो महिलाएं वहां आयीं और विजय जी ने अपने किसी कर्मचारी को इशारा किया की इन्हें आटे की दो थैलियाँ  दे दो. इसके साथ ही विजय जी मुझे मुखातिब हो कर बोले अगर आप इस तरह का कोई काम करें तो मैं सुरक्षा का खतरा उठा कर भी वक्त ज़रूर निकालूँगा. मैंने उन औरतों का दर्द सुना तो मुझे अहसास हुआ कि यह काम कितना आवश्यक है.  मैंने तुरंत हाँ कर दी. इस तरह सितम्बर 1991 से केवल 51  विधवा महिलायों को राशन की राहत देने से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है. आज  यहाँ से राहत पाने वाली महिलायों की संख्या 51 से बढ़ कर 900 के आंकड़े को भी पार कर चुकी है.बहुत से नाम अभी प्रतीक्षा सूची में हैं.सन 2000 में यहाँ लडकियों को कम्प्यूटर सिखाने, सिलाई-कढाई सिखाने और ब्यूटी पार्लर चलाने जैसे काम भी सिखाये जा रहे हैं तांकि वे आत्म निर्भर हो सकें. 
अपने इस मिशन के लिए कई बार उन्हें इम्तिहान की घड़ियाँ  भी देखनी पड़ी. सन 2006 की 26  अप्रैल को उनकी धर्म पत्नी शांति देवी का हार्ट अटैक के कारण देहांत हो गया. रस्म क्रिया की तारीख भी आठ मई की निकली और विधवा महिलायों को राशन वितरित करने की तारीख भी पहले से ही आठ मई घोषित थी.दुःख और संकट की इस घड़ी में भी जगदीश बजाज ने कर्तव्य को नहीं भुलाया. क्रिया आठ की जगह छह मई को ही करली गई पर राहत के इस कार्यक्रम में कोई तबदीली नहीं की गयी. फिर सन 2010 में 30 दिसम्बर के दिन उनकी एक बहू का देहांत हो गया. उस समय भी रस्म क्रिया  ८ जनवरी को आती थी लेकिन इस रस्म को भी दो दिन पूर्व अर्थात 6 जनवरी को ही पोर कर लिया गया ता कि आठ जनवरी को होने वाले र्स्शन वितरण कार्यक्रम में कोई भी तबदीली न हो.  मैंने कहा आप कैसे इंसान हैं...अपने परिवारिक सदस्य को अंतिम विदा कहने के लिए एक आध कार्यक्रम भी इध उधर नहीं कर सकते....मेरी बात सुन कर उन्होंने एक लम्बा सांस लिया और बोले मैं नहीं चाहता था कि जो इंसान इस दुनिय से चला गया उसका दिन मनाते समय कोई बद दुया दे या फिर यह कहे कि इस मौत ने तो हमारा काम चौपट कर दिया.
दुनियादारी  का इतना लिहाज़  और दुखी लोगों से इतनी गहरी सम्वेदना रखने वाले जगदीश बजाज का जन्म हुआ था १० अक्टूबर १९३५ को कामरेड राम किशन के पडोस में पड़ते एक मकान में. यह मकान कोट ईसे शाह में था. झंग का यह इलाका अब पाकिस्तान में है. सं 1947 में जब हालात बिगड़े तो इस परिवार को भी पाकिस्तान छोड़ना पड़ा. कभी अमृतसर, कभी जालंधर और कभी कहीं. गर्दिश के दिन थे. आखिर 1950 में लुधियाना में आ गये. तब से लेकर यहीं पर कर्म योग की साधना  में लगे हुए हैं. सरकारी नौकरी से अपना काम और फिर अपने काम से जन सेवा का यज्ञ. आज इस यज्ञ में योगदान देने वालों की संख्या भी बहुत बड़ी है और इससे राहत लेने वालों की संख्या भी. ज्ञान स्थल मन्दिर अब मानव सेवा संस्थान के तौर पर स्थापित हो चूका है. यहाँ सभी धर्मों के लोग बिना किसी भेद भाव के आते हैं.  अगर आप भी यहाँ आना चाहें तो आपका स्वागत है. आप कभी यहाँ आ सकते हैं.  --रेक्टर कथूरिया

सोमवार, मार्च 26, 2012

इडिंठकरई में चल रहे उपवास के समर्थन में

सात दिवसी देश व्यापी उपवास  जगह-जगह विरोध
कूड़ंकुलम में सक्रिय परमाणु विरोधी अभियान गरमाया मार्च २६, नयी दिल्ली : कूड़ंकुलम परमाणु बिजलीघर के विरोध में इडिंठकरई, तमिल नाडु में चल रहे उपवास के समर्थन में, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, परमाणु निशस्त्रीकरण और शांति के लिए गठबंधन, लोक राजनीति मंच और दिल्ली समर्थक समूह ने संयुक्त रूप से जंतर मंतर, दिल्ली, पर 26 मार्च से 1 अप्रैल 2012 तक सात दिवसीय उपवास का आह्वान दिया है। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय समन्वयक और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पाण्डेय ने आज से जंतर मंतर पर सात दिन का उपवास सुरु किया है | इन सात दिनों में अन्य कई लोग क्रमिक अनशन भी करेंगे |


कूड़ंकुलम परमाणु बिजलीघर के विरोध में चेन्नई में भी लोग उपवास पर हैं और मुंबई में प्रख्यात फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन दादर रेलवे स्टेशन के सामने विरोध का नेतृत्व करेंगे। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय आन्ध्र प्रदेश ने २७ मार्च को शाम ६ बजे से ८ बजे तक एक प्रदर्शन और मोमबती जुलूस निकलने का भी कार्यक्रम आंबेडकर मूर्ती, टैंक बंद, हैदराबाद में किया है |
कूड़ंकुलम परमाणु बिजली घर के विरोध में, 27 मार्च 2012 को एक दिवसीय उपवास का आयोजन देश में जगह जगह होगा।


यह विडम्बना ही तो है कि एक तरफ भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में, श्री लंका में तमिल लोगों के ऊपर हुए अत्याचार का मुद्दा उठाया है, परंतु देश के भीतर तमिल नाडु में परमाणु बिजली घर बनाने की जिद्द पर भारत अड़ा हुआ है जिसकी वजह से तमिल नाडु में रह रहे लोग खतरनाक परमाणु दुष्परिणामों को आने वाले सालों में भुगत सकते हैं।


हम भारत सरकार के गैर लोकतान्त्रिक ढंग से परमाणु ऊर्जा थोपने के प्रयास का विरोध करते हैं। अमरीका और यूरोप में जब भारी संख्या में आम लोग सड़क पर उतार आए तब उनकी सरकारों को परमाणु ऊर्जा त्यागनी पड़ी परंतु भारत में जब आम लोग परमाणु ऊर्जा पर सवाल उठा रहे हैं तो उनकी आवाज़ दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कुडनकुलम, तमिल नाडु के डॉ उदयकुमार के नेतृत्व में परमाणु ऊर्जा के विरोध में जन अभियान को भारत सरकार ने भ्रामक आरोपों आदि द्वारा दबाने का पूरा प्रयास किया है। जब कि डॉ उदयकुमार ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया है और उनके पास ‘एफ.सी.आर.ए.’ ही नहीं है जिससे ‘विदेशी पैसा’ लिया जा सके। यह भी साफ ज़ाहिर है कि भारत सरकार स्वयं ‘विदेशी’ ताकतों (जैसे कि अमरीका, रूस, आदि) के साथ मिलजुल कर सैन्यीकरण और परमाणु कार्यक्रम बढ़ा रही है।


भारत सरकार ने एक जर्मन नागरिक को जिसने शांतिपूर्वक कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा विरोधी अभियान में भाग लिया था, उसको पकड़ कर वापिस जर्मनी भेज दिया। 8 मार्च 2012 को भारत सरकार ने एक जापानी नागरिक का वीसा भी रद्द कर दिया। ‘ग्रीनपीस’ के निमंत्रण पर फुकुशिमा,जापान में 11 मार्च 2011 को हुई परमाणु दुर्घटना झेले हुए माया कोबायाशी को भारत सरकार ने 15 फरवरी 2012 को ‘बिजनेस’ वीसा दिया था जिससे कि वो भारत में एक सप्ताह आ कर जगह-जगह आयोजित कार्यक्रमों में परमाणु विकिरण आदि खतरों के बारे में बता सकें। परंतु 8 मार्च 2012 को भारत ने उनका वीसा ही रद्द कर दिया।


हाल हे में तमिल नाडु मुख्य मंत्री द्वारा डॉ एस.पी. उदयकुमार को नक्सलवादी करार करने का प्रयास यह ज़ाहिर करता है कि सरकार परमाणु कार्यक्रम को लागू करने के लिए कितनी मजबूर है। हम सरकार के आम लोगों को गुमराह करने का और परमाणु कार्यक्रम में पारदर्शिता नहीं रखने का भरसक विरोध करते हैं।


अब विकसित दुनिया यह मानने लगी है कि निम्न चार कारणों से नाभिकीय ऊर्जा का कोई भविष्य नहीं हैः (1) इसका अत्याधिक खर्चीला होना, (2) मनुष्य स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरनाक, (3) नाभिकीय शस्त्र के प्रसार में इसकी भूमिका से जुड़े खतरे, व  (4) रेडियोधर्मी कचरे के दीर्घकालिक निपटारे की चुनौती।


भारत को नाभिकीय ऊर्जा का विकल्प ढूँढना चाहिए जो इतने खर्चीले व खतरनाक न हों। पुनर्प्राप्य ऊर्जा के संसाधन, जैसे सौर, पवन, बायोमास, बायोगैस, आदि, ही समाधान प्रदान कर सकते हैं यह मान कर यूरोप व जापान तो इस क्षेत्र में गम्भीर शोध कर रहे हैं। भारत को भी चाहिए कि इन विकसित देशों के अनुभव से सीखते हुए नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में अमरीका व यूरोप की कम्पनियों का बाजार बनने के बजाए हम भी पुनर्प्राप्य ऊर्जा संसाधनों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करें। भारत को ऐसी ऊर्जा नीति अपनानी चाहिए जिसमें कार्बन उत्सर्जन न हो और परमाणु विकिरण के खतरे भी न हो।


हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर लोकतान्त्रिक तरीके से खुली बहस करवाए और जब तक यह सर्व सम्मति से निर्णय नहीं होता कि भारत को परमाणु कार्यक्रम चलना चाहिए या नहीं, परमाणु कार्यक्रम को स्थगित करे।


जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, परमाणु निशस्त्रीकरण और शांति के लिए गठबंधन, और लोक राजनीति मंच


अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: पी.के. सुंदरम 9810556134, रमेश शर्मा 9818111562, मधुरेश कुमार ९८१८९०५३१६, विजयन एम् जे 9582862682

मंगलवार, मार्च 20, 2012

राष्‍ट्रीय जनजातीय पुरस्‍कारों 2011-12 की घोषणा

श्री गुरू रियुबेन मशहंगवा को जनजातीय कला तथा संस्‍कृति के क्षेत्र में पुरस्कार 

मणिपुर से श्रीमती एम.सी.मेरी कॉम को खेल के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट उपलब्धि तथा मणिपुर के श्री गुरू रियुबेन मशहंगवा को जनजातीय कला तथा संस्‍कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ग- ए में सर्वश्रेष्‍ठ जनजातीय विजेता का राष्‍ट्रीय जनजातीय पुरस्‍कार 2011-12 प्रदान किया जाएगा। श्रीमती बिन्‍नी यांगा (माया) को अनुसूचित जनजातियों में अनुकरणीय समुदाय सेवा के लिए वर्ग ‘बी’ में यह पुरस्‍कार दिया जाएगा

जनजातीय मामलों तथा पंचायती राज मंत्री श्री वी. किशोर चंद्र देव के नेतृत्‍व में राष्‍ट्रीय चयन समिति ने इस महीने हुई एक बैठक में विजेताओं का चयन किया। वर्ग ‘ए’- में सर्वश्रेष्‍ठ जनजातीय विजेता को 2 लाख रूपए का नकद इनाम, प्रशस्ति पत्र तथा एक ट्रोफी और वर्ग’बी ’में 5 लाख रूपए का नकद इनाम, प्रशस्ति पत्र तथा एक ट्रोफी दी जाएगी। 

यह पुरस्‍कार राष्‍ट्रीय जनजातीय त्‍यौहार- प्रकृति के दौरान दिए जाएंगे। इस त्‍यौहार का उद्घाटन 20 मार्च, 2012 को शाम 7 बजे सिरी फोर्ट सभागार में किया जाएगा। (पीआईबी)
19-मार्च-2012 18:12 IST